उदयपुर। ऑस्ट्रेलिया के कॉन्सुल जनरल पॉल मर्फी एवं उनके प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के शिल्पग्राम का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने शिल्पग्राम के चौपाल मंच पर प्रस्तुत लंगा गायन, डांगी नृत्य, पोवाड़ा, कालबेलिया एवं भवाई जैसी लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लिया तथा कलाकारों के साथ संवाद कर सामूहिक छायाचित्र भी खिंचवाए।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे की पहल पर राजस्थान की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से संभावित कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल ने शिल्पग्राम का भ्रमण कर यहां की सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के एबोरिजिनल समुदाय और राजस्थान के आदिवासी समाज के बीच सांस्कृतिक संरक्षण एवं आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। राज्यपाल के निर्देशानुसार इस दिशा में केन्द्र स्तर पर आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल का शिल्पग्राम के मुख्य द्वार पर पारंपरिक रूप से तिलक एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के उप निदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत ने उन्हें शिल्पग्राम परिसर का भ्रमण कराया तथा विभिन्न राज्यों की पारंपरिक झोपड़ियों, स्कल्पचर पार्क और ग्रामीण जीवन शैली की जानकारी दी। इस दौरान श्री पॉल मर्फी ने शिल्पग्राम प्रांगण में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण भी किया।
प्रतिनिधिमंडल ने शिल्पग्राम में आयोजित विशेष सांस्कृतिक संध्या का अवलोकन किया, जिसमें लंगा, डांगी, पोवाड़ा, कालबेलिया एवं भवई जैसी पश्चिम भारत की प्रसिद्ध लोककलाओं की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों ने पश्चिम भारत की समृद्ध एवं विविध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराया तथा भारतीय लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सतत प्रयासों को रेखांकित किया।
अपने संबोधन में श्री पॉल मर्फी ने शिल्पग्राम में प्रस्तुत लोककलाओं एवं कलाकारों की सराहना करते हुए इसे भारतीय पारंपरिक कला एवं शिल्प संरक्षण का एक अद्वितीय केन्द्र बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्य दूतावास को हाल ही में राजस्थान की कांसुल जनरल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इससे पहले महावाणिज्य दूतावास गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने कहा कि इस विस्तारित दायित्व के तहत राजस्थान के सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के साथ संवाद स्थापित कर सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशा जाएगा।
उन्होंने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के बड़ी संख्या में लोग दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किशनराव बागड़े के मार्गदर्शन में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में अनेक साझा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पश्चिमी भारत में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत श्री पॉल मर्फी ने किया। उनके साथ सुश्री ऐश्वर्या वर्मा, रिसर्च ऑफिसर (पॉलिसी) तथा सुश्री नाज़नीन लूथर, एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट (प्रोटोकॉल एवं मीडिया) भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन सिद्धांत भटनागर ने किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, दयाराम सुथार सहित केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।