उदयपुर। देवेंद्र धाम में चल रहे चातुर्मास में महावीर स्वामी के प्रवचनों में वीतराग वाणी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रवर्तक डॉ.सुरेंद्र मुनि ने कहा कि भगवान महावीर की उपदेश वाणी को ही वीतराग वाणी, आगम वाणी अथवा शास्त्र वाणी कहा जाता है। यह वाणी मनुष्य को राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे आंतरिक विकारों से मुक्त होकर आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
उपाध्याय डॉ राजेंद मुनि ने कहा कि जिनवाणी की विशेषता यह है कि उसमें किसी प्रकार का पक्षपात नहीं होता। आगम की व्याख्या करते समय भी वीतराग भाव आवश्यक है। यदि मन में दुर्भावना या स्वार्थ हो तो उसके परिणाम भी अनुकूल नहीं होते। जिस प्रकार बीज के अनुरूप ही फल प्राप्त होता है, उसी प्रकार शुद्ध भाव से किया गया कार्य सदैव श्रेष्ठ परिणाम देता है।
डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच, सद्भाव और निष्पक्ष दृष्टि अपनाने से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है तथा समाज में सौहार्द और समरसता का वातावरण बनता है। वीतराग वाणी का अनुसरण कर प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सार्थक और सफल बना सकता है।
कार्यक्रम में दीपेश मुनि द्वारा मंगलाचरण एवं उपाध्याय रमेश मुनि द्वारा मंगल पाठ का वाचन किया गया। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन,महामंत्री हिम्मत बडाला,समाजसेवी कान्तिलाल जैन साहित अनेक श्रावक श्रविकाएं मौजूद थी.