उदयपुर, राजस्थान साहित्य अकादमी एवं टीम संस्था के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक सृजन पखवाड़ा के तहत सुप्रसिद्ध कवि, आलोचक तथा अनुवादक कुंदन माली का एकल रचना पाठ एवं संवाद आयोजित किया गया। अध्यक्षता प्रो. जी. एम. मेहता ने की, मुख्य अतिथि डॉ. एम. एल. नागदा और विशिष्ठ अतिथि पूर्व आरएएस अधिकारी दिनेश कोठारी थे।

गुजरात विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त अंग्रेजी प्राध्यापक कुंदन माली ने राजस्थानी, हिंदी और अंग्रेजी में तीस पुस्तकें लिखी हैं। इनमें इतावली कविताओं का हिंदी अनुवाद, गुजराती उपन्यास का हिंदी अनुवाद सहित राजस्थानी आलोचना की पुस्तकें सम्मिलित हैं। वे केंद्रीय साहित्य अकादमी, राजस्थानी भाषा, साहित्य व संस्कृति अकादमी बीकानेर व राजस्थान साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से पुरस्कृत व सम्मानित हो चुके हैं। कार्यक्रम में श्री कृष्ण कुमार जुगनू , मंजु चतुर्वेदी , मधु अग्रवाल श्रीनिवास अय्यर, शारदा भट्ट, गौरीकांत शर्मा, जी एस राठौड़, रेणु देवपुरा, तराना परवीन, आशीष हरकावत, विपुल शर्मा, अम्बा लाल माली , जमना लाल माली , सुरेश सालवी का सम्मान किया गया गणमान्य मौजूद थे। टीम संस्था की तरफ़ से अशोक शर्मा, सुनील टांक, लक्षा पोटा, शैली श्रीवास्तव, प्रदीप कौशिक, महिपाल सिंह राठौड़ दीपक शर्मा, मुकेश धनगर ने अथितियों का सम्मान किया। इसके साथ शारदा जी पोटा का परिचय पढ़ा गया और उनका और वरिष्ठ साहित्यकारों और कलाप्रेमियों का सम्मान किया गया प्रारंभ में संचालक गौरीकांत ने कुंदन माली की रचना प्रक्रिया और आलोचना कर्म का परिचय दिया। स्वागत टीम संस्था के सुनील टांक ने किया और अकादमी के रामदयाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
अपनी चयनित कविताओं के पाठ से लूटी वाहवाही
कुंदन माली ने अपने जीवन काल में आरम्भ से अद्यतन चयनित कविताओं का पाठ किया। उनकी "चींटी संचे तीतर जाय" जैसी कविताओं में सामाजिक सत्यों का उद्घाटन था। अन्य रचनाओं में उन्होंने राजस्थानी के मुहावरों का नवीनीकरण किया और वाहवाही लूटी। “रुख़ बचाना” कविता में वृक्ष की भूमिका का चित्रण रोचक था। एक अन्य रचना में कपोल कल्पनाओं का रस था।
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