"कल हो ना हो" कल का इंतजार... लेकिन आज का क्या?

हरपल,हर क्षण और हर दिन का उपयोग करें, जिससे आप सही पथ पर चल सके।

अपने 'भविष्य' और 'आज' को 'अभी' से अपनाएं जिससे आपका कल बेहतर हो... क्योंकि अब नहीं तो कभी नहीं।

क्यों ना शुरुआत अब, इसी क्षण से हो।

'आज' खुद कहता है कि मेरी परवरिश इस तरह करिये कि आपका आने वाला कल बेहतर हो।

चूंकि 'भविष्य' तैरते क्षणों की श्रृंखला है, फिर भी वह एक वक्त तक ही है।

अपने 'आज' को उस 'क्षमा' की तरह। बनाएं, जिससे आपका दीया गुल ना हो सके।

चाहे जो भी हो भले ही दिन अच्छे हो या बुरे, 'आज' एक भगवान का आशीर्वाद है, जिससे आप उन चुनौतियों को स्वीकार करें, ताकि आपका प्रतिपल बेहतर हो।

'आज' का उपयोग करने के बजाय, अभी इस क्षण में जिसमें।

अपने हर पल का नियोजन करें, अपने 'आज'को महत्व दें जिससे आपका हर पल, हर लम्हा बेहतर से बेहतर हो।

अपने हर घड़ी का प्रयोग करें, विचारों को इस तरह गुणा करें, जिससे आपका हर पल महत्वपूर्ण हो।

अपना प्रतिपल नियोजित करें और संरचना करें कि आप हर लक्ष्य को प्राप्त कर सकें, क्योंकि जिंदगी का भरोसा नहीं कल हो ना हो।

हर लम्हें में जियें क्योंकि 'वक्त' किसी का नाम था, ना हुआ है और ना होगा।