राजस्थान बहुरंगी सांस्कृतिक परम्पराओं का प्रदेश है। यहां की लोक संस्कृति और पर्यटक स्थलों की विदेशों में धूम है।

यह विचार साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही रविवार को राजस्थान दिवस पर आयोजित संस्कृति में सिरमौर राजस्थान विषय पर निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को वल्लभनगर गुमानपुरा में आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में व्यक्त किए।

उन्होंने हाड़ोती अंचल के साहित्यिक योगदान की चर्चा करते हुए कहा डॉ. सिंघल ने साहित्य के साथ अब संस्कृति और पर्यटन को भी जोड़ दिया है। प्रतियोगिता का आयोजन केसर काव्य मंच, संस्कृति,साहित्य,मीडिया फोरम और रुचि हस्पताल के त्वावधान में किया गया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने कहा सिंघल ने कला,संस्कृति,पर्यटन के साथ विगत कुछ वर्षों में साहित्य के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान किया है। विशिष्ठ अतिथि बाल साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम ने कहा राजस्थान का निर्माण विभिन्न चरणों में किया गया। पहले इसे राजपुताने के नाम से जाना जाता था। इस दिवस पर इस तरह के सार्थक आयोजन किए जाने चाहिए।

संस्कृति,साहित्य,मीडिया फोरम की सह संयोजक डॉ . वैदेही गौतम ने सभी का स्वागत कर बताया कि संभागीय प्रतियोगिता में 46 प्रतिभागियों ने भाग लिया। विजेताओं को प्रमाण पत्र और नकद राशि से पुरस्कृत किया जा रहा है।

प्रतियोगिता में संयुक्त रूप से प्रथम रहे दिव्या वर्मा इटावा , कालीचरण राजपूत, कोटा ,द्वितीय रहे डॉ.शशि जैन एवं रेखा पंचोली कोटा, तृतीय रहे जुगराज राठौर, नंदिनी दाधीच, कोटा , चतुर्थ स्थान पर रहे शुभांगी शर्मा, भवानीमंडी , एलवीरा कोटा ,पंचम स्थान पर रहे पल्लवी दरक न्याति कोटा , नैना नागर बारां तथा प्रोत्साहन के लिए डॉ. इंदु बाला शर्मा, रीता गुप्ता रश्मि, प्रतिभा पाल, डॉ. सुशीला जोशी कोटा, राजेश कुमार शर्मा भवानीमंडी, रेखा शर्मा बूंदी एवं कृष्ण सिंह हाडा झालावाड़ को पुरस्कृत किया गया।

अतिथियों में माँ शारदे की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आयोजन में संदीप द्विवेदी एवं राम मोहन कौशिक ने सहयोग किया। संचालन डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने किया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने काव्यपाठ किया।