उदयपुर। शायरी की मिठास, गीतों की सुरलहरियों और सावन-भादों की भावनाओं से सजी शायराना परिवार उदयपुर की सावन-भादों मिलन महफिल ऐश्वर्या कॉलेज परिसर में उत्साह और उमंग के साथ आयोजित हुई। देशभक्ति, रक्षाबंधन और सावन-भादों की थीम पर हुए इस आयोजन में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों, शायरों, गायकों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस अधीक्षक यादराम अधिकारी रहे, जबकि अध्यक्षता विदेश सेवा में रह चुकीं डॉ. शौकत परवीन ने की। नर्सिंग अधिकारी चंद्रकांता तलेसरा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। अतिथियों एवं प्रतिभागियों का उपरणा और पगड़ी पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
शायराना परिवार के मुख्य सलाहकार डॉ. हुकुम राज जोशी ने बताया कि परिवार पिछले करीब 16 वर्षों से साहित्य और संगीत की सामाजिक सेवा के लिए निशुल्क कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। संस्था का उद्देश्य साहित्य और संगीत की प्रतिभाओं को बिना किसी शुल्क के खुला मंच उपलब्ध कराना है, ताकि उभरते कलाकार अपनी प्रतिभा को बड़े मंचों तक ले जा सकें।
कार्यक्रम प्रभारी आभा सिरसीकर ने बताया कि समारोह में कविता, दोहे, छंद, मुरकियां, लोकगीत और लोकप्रिय फिल्मी गीतों सहित विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियां हुईं। अलग-अलग जिलों से पहुंचे कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर समारोह को यादगार बना दिया।
गीत, गजल और कविताओं ने बांधा समां
साहित्यिक और सांगीतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत से ही माहौल सुर और शब्दों से सराबोर रहा। डॉ. राजकुमार राव ने अपनी रचना “जब-जब भी चांद निकला और तारे जगमगाए, तुम आए...” प्रस्तुत कर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। राजसमंद के कमलेश कुमावत और नेहा तलदार ने भी प्रभावी प्रस्तुतियां दीं।
लक्ष्मी आसवानी ने भाई-बहन के स्नेह और रक्षाबंधन की भावनाओं को समर्पित गीत प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को भावुक कर दिया। वहीं चित्तौड़ के शायर गुलजार ने वफा पर अपना कलाम पेश कर दाद हासिल की।
हेमा जोशी, एच. काजी, नारायण लाल लोहार, छगन खत्री और जूही वाधवानी ने कविता और गीतों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। फतेहनगर की शिक्षिका रतन टांक और योगाचार्य जिग्नेश शर्मा की प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम में विविधता जोड़ी। अशोक परनामी ने अपनी रचना से श्रोताओं को प्रभावित किया।
सावन की भावनाओं को सुरों में पिरोते हुए आभा सिरसीकर ने “सावन का महीना, पवन करे शोर...” गीत प्रस्तुत किया, जिस पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। अजीत सिंह खींची, अशोक परियानी, दिनेश बोरीवाल और आकाशवाणी के आरजे शमिल शेख ने भी अपनी रचनाओं एवं प्रस्तुतियों से महफिल में रंग भर दिया। इसके अलावा अनेक कलाकारों ने देशभक्ति गीतों, सावन-भादों और रक्षाबंधन पर आधारित कविता, दोहे, छंद, लोकगीत एवं संगीत प्रस्तुत कर आयोजन को यादगार बना दिया।
कलाकारों को आगे बढ़ाने की पहल
शायराना परिवार के संस्थापक एवं मीडिया सलाहकार तथा गीतकार ने बताया कि संस्था कलाकारों को केवल मंच उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आगामी राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में अपनी कला प्रस्तुत करने के अवसर भी उपलब्ध कराती है। अनुभवी कलाकारों के मार्गदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों की कला को और निखारने का प्रयास किया जाता है, जिससे वे साहित्य और संस्कृति से गहराई से जुड़ सकें।
इस अवसर पर आगामी दिनों में आयोजित होने वाली संगीत कार्यशाला की जानकारी भी दी गई। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों के सानिध्य में संगीत और गायन के सूक्ष्म पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संगीत, साहित्य, शायरी और लोक संस्कृति के रंगों से सजी यह महफिल देर तक श्रोताओं को बांधे रही और सावन-भादों की भावनाओं को शब्दों और सुरों के माध्यम से जीवंत कर गई।