लेखक : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर की सरस्वती सभा के सदस्य रहे मीठानाथ मीठेश निर्मोही साहित्यिक नाम मीठेश निर्मोही का जन्म 30 सितम्बर, 1954 को पिता स्व. पन्नानाथ रावल एवं माता स्व.चुन्नीबाई रावल के परिवार में पाली जिले के राजोला खुर्द ग्राम में हुआ। हिन्दी, संस्कृत एवं दर्शनशास्त्र विषयों में बीए, दर्शनशास्त्र एवं राजस्थानी में स्वर्ण पदक सहित एमए की शिक्षा प्राप्त की।
राजस्थानी एवं हिन्दी में विगत 50 वर्षों से
समानान्तर लेखन कर कहानी, कविता, शोध लेख,लघुकथा,अनुवाद, समीक्षा आदि लिखते हैं। देश की सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में
रचनाएं प्रकाशित और इण्टरनेट, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रसारित होती है। लगभग एक सौ से अधिक राज्य, राष्टीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठियों एवं सम्मेलनों में सहभागिता की है। तीन सौ से अधिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का संयोजन तथा संचालन किया है। ताशकन्द एवं समरकन्द (उज्जबेकिस्तान) एवं मास्को एवं सेन्ट पीटर्सबर्ग (रूस) की दो
अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक यात्राएं भी की हैं। शांति एवं मानवाधिकार विश्व साहित्य फोरम के 2021 से अंतरराष्ट्रीय शांति एम्बेसडर हैं। देश में कई संस्थाओं के पदाधिकारी हैं और
साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली एवं अन्य साहित्यिक संस्थानों से प्रदत्त राष्टीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार चयन समिति में निर्णायक रहे हैं। कई रचनाएं विविध पाठ्यक्रमों में शामिल है।
प्रकाशित राजस्थानी साहित्य की कृतियों में
कविता संग्रह - आपै रै ओठै-दोळे मुगती ,
आधुनिक राजस्थांनी कवितावां, कहानी संग्रह में आज री राजस्थांनी कहांणियां ,अमावस, ओकम अर चांद, सूरज उगाळी - प्रतिनिधि राजस्थानी कहानियों का संकलन,आखर-समकालीन राजस्थानी कहाणियां, उकरास प्रतिनिधि कहानीकारों की कहानिया, विविधा संग्रह -- कूंपळ बदळाव , पीळौ बादळ , कुंकूं पगलिया, अंवेर - राजस्थानी के प्रतिनिधि कवियों की कविताएं, तीन बीसी पार - आधुनिक राजस्थानी कहाणी, साख भरै सबद आजादी रै पछै री राजस्थानी कविता, अठारा असवार - पुरस्कृत कहानियां प्रकाशित हुई हैं। हिंदी कृतियों में कविता संग्रह -- चेहरों की तख्तियों पर , चिड़िया भर शब्द, शब्द की संगत, सिर्फ शब्द नहीं , अपना-अपना आकाश , सुनो ओ नदी रेत की, वस्तुस्थिति, रेत पर नंगे पांव , दोस्तों की कहानियां ,कविता का सच , रेतघड़ी , जलती हुई नदी , कविता कानन,
तुम्हारे लिए, मरुगंधा, कविता से कविता तक,
स्त्री होकर सवाल करती है , त्रिसुगंधि आदि अन्य पुस्तकें प्रकाशित हैं। इन कृतियों में कई कृतियां अन्य साहित्यकारों द्वारा संपादित की गई हैं।
अनुवाद - कई राजस्थानी कविताओं और कहानियों का अंग्रेजी, हिन्दी, बंगला, गुजराती, कश्मीरी, डोगरी, तेलुगू, मलयालम, मराठी, पंजाबी, असमिया, कन्नड़, मैथिली, ओडिआ, बोडो, मणिपुरी, सिंधी, उर्दू, इत्यादि भारतीय तथा अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच, नेपाली, ताजिक आदि विश्व भाषाओं में अनुवाद हुआ है। अंग्रेजी, रूसी, उज्बेकि, इटालियन, फ्रेंच, नेपाली, ताजिक, हंगरी, अफ्रीकी, टर्की, चीनी आदि विश्व भाषाओं की रचनाओं का राजस्थानी में अनुवाद हुआ हैं। कहानियों का नाट्य रूपांतरण भी किया गया है।
देश - विदेश की कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया है । पांचवां अन्तरराष्टीय हिन्दी सम्मेलन, ताशकंद उजबेकिस्तान में समग्र रचना कर्म पर सृजनश्री सम्मान, विधागत श्रेष्ठता कविता एवं कहानी पर पन्द्रहवां अन्तरराष्टीय हिन्दी सम्मेलन, मास्को-रूस में श्री सलेखचन्द जैन स्मृति अन्तरराष्टीय साहित्य सम्मान, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा कथाकृति 'अमावस, ओकम अर चांद' पर के लिए मुरलीधर व्यास 'राजस्थानी' कथा साहित्य पुरस्कार, कविता 'ओ मृत्यु !' पर राजस्थान पत्रिका, सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा काव्यकृति 'चिड़िया भर शब्द' पर सुधीन्द्र कविता पुरस्कार , महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाशन शोध संस्थान, मेहरानगढ म्यूज़ियम ट्रस्ट, जोधपुर एवं बाबा रामदेव शोध पीठ, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिये 'मायड भासा सेवा सम्मान, प्रगतिशील साहित्य संगम, जोधपुर द्वाराहिन्दी रत्न सम्मान, तेलुगु पत्रिका 'विपुला' हैदराबाद की ओर से राष्टीय स्तर पर सर्वभाषा कथा प्रतियोगिता पुरस्कार राजस्थानी कहानी 'बंधण' पर द्वितीय पुरस्कार, ज्ञान भारती, कोटा द्वारा महाकवि निराला पुरस्कार, दर्शन विभाग, जयनारायण व्यास वि.वि.जोधपुर द्वारा प्रवणानंद दर्शन पुरस्कार, जिला प्रशासन, जोधपुर द्वारा उत्कृष्ट साहित्य सृजन सम्मान,भाषा, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा राजस्थानी कविता संग्रह 'मुगती' पर साहित्य अकादेमी का मुख्य पुरस्कार एवं जनार्दन राय विद्यापीठ (डीम्ड टू बीयूनिवर्सिटी) उदयपुर की ओर से दीर्घकालिक साहित्य सृजना, अनुवाद के लिये कवि राव मोहन सिंह की स्मृति स्वरूप 'साहित्य शिरोमणि अलंकरण एवं राजस्थानी कविता संग्रह 'मुगती' पर कमला गोइनका फाउंडेशन, बैंगलोर की ओर से राष्टीय स्तर पर प्रदान किया जाने वाला मातुश्री कमला गोइनका राजस्थानी साहित्य पुरस्कार जैसे प्रमुख पुरस्कारों सहित कई अन्य पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। शिक्षा निदेशालय, राजस्थान सरकार के प्रशासनिक अधिकारी पद से सेवानिवृत्ति के पश्चात् सतत स्वतंत्र लेखन में सक्रिय है।
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