सफ़ेद कुर्ता, धोती, पगड़ी थी शान,
सादा जीवन, ऊँचा था आपका मान।
मीठे बोल, चेहरे पर मुस्कान,
सबके दिल में बसता था आपका सम्मान।
कभी न किसी पर क्रोध जताया,
हर रिश्ते को प्रेम से निभाया।
नानी के जाने के बाद भी आपने,
नाना-नानी दोनों का प्यार लुटाया।
"बेटा, कब आओगे?"
हर बार यही कहते थे आप,
आज वही अपनापन भरी आवाज़,
बन गई जीवन की सबसे अनमोल याद।
अब ननिहाल तो रहेगा वही,
पर वो अपनापन मिलेगा नहीं।
वो आँगन, वो चौखट सब रहेंगे,
बस हमारा इंतज़ार करने वाला कोई रहेगा नहीं।
आप चले गए, पर आपके संस्कार,
हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी रहेंगे।
जब-जब ननिहाल की याद आएगी,
सबसे पहले आप ही याद आएँगे।
आपकी मुस्कान, आपका प्यार,
हर धड़कन में बस जाएगा।
समय भले ही बीत जाएगा,
पर दिल आपको न भूल पाएगा।
 

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