नई दिल्ली। सरकार की विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) नीति के दिनांक 15.10.2020 के परिपत्र को समय-समय पर बदला गया है। इसके अनुसार रेलवे अवसंरचना क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी जाती है। अनुमत क्षेत्रों में निम्नलिखित का निर्माण, संचालन और रखरखाव शामिल है, जिसके तहत पीपीपी के माध्यम से उपनगरीय गलियारा परियोजनाएं, हाई स्पीड ट्रेन परियोजनाएं, समर्पित माल ढुलाई लाइनें, ट्रेनसेट और लोकोमोटिव/कोच विनिर्माण और रखरखाव सुविधाओं सहित रोलिंग स्टॉकय, रेलवे विद्युतीकरणय, सिग्नलिंग प्रणालियांय, फ्रेट टर्मिनल, यात्री टर्मिनल, रेलवे लाइन/साइडिंग से संबंधित औद्योगिक भाग में अवसंरचना जिसमें विद्युतीकृत रेलवे लाइनें और मुख्य रेलवे लाइन से संपर्क शामिल है और मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम। रेलवे क्षेत्र में 2014-15 से 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) तक कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश य(फडीआई) इक्विटी इनफ्लो यूएस 942 मिलियन है।
रेलवे में 2013-14 में पूंजी निवेश के लिए सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) 29,055 करोड़ रूपये था। नेटवर्क बढ़ाने, रोलिंग स्टॉक बढ़ाने, सुरक्षा में सुधार, यात्री सुविधाओं, सड़क सुरक्षा के कार्यों और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए प्रचुर सहायता देने के लिएए भारत सरकार ने हर वर्ष सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) को लगातार बढ़ाया है और 2026-27 के लिए 2.78 लाख करोड़ रूपसे दिए गए हैं। प्रचुर घरेलू फंडिंग ने भारतीय रेल क्षेत्र को वैश्विक बाजार के साथ स्पर्धा करने के लिए अवसंरचना और प्रौद्योगिकी में ज्यादा निवेश करने में सहायता की है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग की लगातार प्रक्रिया के तौर पर, रेल मंत्रालय ने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस, स्पेन वगैरह के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते माल और यात्री ऑपरेशन (मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट), हाई-स्पीड रेल डेवलपमेंट और रेलवे ऑपरेशन और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए आईटी सॉल्यूशन, एसेट्स के प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस वगैरह के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए किए गए हैं।
अन्य देशों को निर्यात
पिछले दस वर्ष में, भारत ने मजबूत औरविविधीकृत रेल विनिर्माण पारिस्थितिकी विकसित की है, जिसमें भारतीय रेल की उत्पादन इकाइयां और इंडस्ट्री बेस शामिल हैं। अभी, यह उद्योग भारत में रेलवे रोलिंग स्टॉक्स की लगभग पूरी रेंज जैसे लोकोमोटिव, पैसेंजर कोच, वैगन और जरूरी कंपोनेंट्स जैसे ट्रैक्शन मोटर्स, गियर बॉक्स, मोटराइज्ड बोगी, ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर, मेट्रो कार, प्रोपल्शन सिस्टम, ट्रैक्शन और ऑक्सिलरी कन्वर्टर्स, केबल हार्नेस, इलेक्ट्रॉनिक कार्ड, मैग्नेटिक्स इत्यादि बनाता है। ये मद ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, अमरीका, फ्रांस, जर्मनी, मोजाम्बिक, मैक्सिको, बांग्लादेश, श्रीलंका, रोमानिया, स्पेन और इटली जैसे विकसित और विकासशील देशों में किए जाते हैं। इस समर्थक पारिस्थितिकी के साथ, 2016-17 से 2025-26 (जनवरी 2026 तक) के दौरान, भारत से रेल क्षेत्र में निर्यात कुल यूएस 3355 मिलियन (्26,000 करोड़ रूपये) तक पहुँच गया है।
केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
National News
भारतीय रेल ने अपनी अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए पिछले 11 वर्ष में ऑटोमैटिक रूट से यूएस 942 मिलियन का एफडीआई इक्विटी इनफ्लो हासिल किया
हाई-स्पीड रेल, फ्रेट और पैसेंजर ऑपरेशन्स और टेक्निकल सहयोग से एडवांस्ड आईटी सॉल्यूशंस के लिए स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस और स्पेन के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए
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