नोएडा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडियाश् (डीएफसीसीएल) की मालगाड़ी ने बुधवार को माल ढुलाई के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। पहली बार 25-टन एक्सल लोड वाली मालगाड़ी को सफलतापूर्वक रवाना किया गया। यह ट्रेन पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (डब्ल्यूडीएफसी) पर संचालित हुई और स्टील कॉइल्स का परिवहन करते हुए गुजरात के न्यू गोथांगांव स्थित गति शक्ति कार्गो टर्मिनल से हरियाणा के पलवल स्थित हिंद टर्मिनल तक कुल 1106 किलोमीटर की दूरी तय की।
100 किमी/घंटा की गति से दौड़ने वाली यह ट्रेन न केवल तकनीकी उन्नति का प्रतीक है, बल्कि ‘‘गति शक्ति’’ अभियान को नई ऊर्जा देने वाली उपलब्धि है। 45 वैगनों वाली इस ट्रेन ने पहले के मुकाबले अधिक माल ढोया गया। जहां सामान्य मालगाड़ियां 60-70 किमी/घंटा की गति से चलती हैं, वहीं यह 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ने में सक्षम है। मालूम हो कि 25-टन एक्सल लोड का यह सफल संचालन भारतीय रेलवे के लिए केवल एक पड़ाव है। यह प्रयोग साबित करता है कि भारत अब हैवी-हॉल माल ढुलाई के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। यह सफलता 30 टन एक्सल लोड के साथ भविष्य के संचालन के लिए नए अवसर खोलने की अपेक्षा है, जिससे भारत को एक वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की परिकल्पना को और बल मिलेगा।
25-टन एक्सल लोडश् का विज्ञान
सरल शब्दों में, ‘‘एक्सल लोड’’ वह अधिकतम भार है जो ट्रेन के पहियों की एक जोड़ी (धुरी) पटरियों पर डालती है। अब तक भारतीय रेल नेटवर्क मुख्य रूप से 22.1 से 23.1 टन एक्सल लोड पर निर्भर था। इसे बढ़ाकर 25 टन करना डीएफसी इंजीनियरिंग और पटरियों की मजबूती में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। इसका सीधा परिणाम कम फेरों में अधिक माल की ढुलाई के रूप में सामने आएगा।
गणितः 15-20 प्रतिशत की हुई वृद्धि
इस नई प्रणाली ने भारतीय माल ढुलाई क्षमता को विश्वदस्तमरीय मानकों के करीब है। पुराने और नए सिस्टम के आंकड़ों की तुलना इस प्रकार है। प्रति वैगन क्षमता, पिछली व्यवस्था के तहत, वैगन 22.9 टन के एक्सल लोड के साथ चलते थे। 25 टन के अपग्रेड किए गए एक्सल लोड के साथए अब हर वैगन लगभग 8.4 टन का अतिरिक्त भार ले जा सकता है।
बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, लॉजिस्टिक्स लागत कम होना
परिवहन क्षमता बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी। माल ढुलाई सस्ती होने से उत्पादन लागत भी घटेगी, जिसका सीधा लाभ उधमियों व आम जनता को मिलेगा। लॉजिस्टिक्स खर्च कम होने से रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर लगाम लगेगी और भारतीय उत्पाद विश्व के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
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डीएफसी की (बड़ी छलांग) पहली बार 25-टन एक्सल लोड मालगाड़ी ने भरी रफ्तार
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