जयपुर। गोटन राजस्थान के नागौर जिले का एक महत्वपूर्ण कस्बा है, जो अपने ऐतिहासिक महत्व, औद्योगिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। गोटन का इतिहास मारवाड़ क्षेत्र की परंपराओं और राजपूत शासन से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र कभी स्थानीय ठिकानों और जागीरों का हिस्सा रहा। गोटन विशेष रूप से चूना पत्थर (स्पउमेजवदम) के विशाल भंडार के कारण प्रसिद्ध हुआ। इसी कारण यहां सीमेंट उद्योग विकसित हुआ और क्षेत्र को औद्योगिक पहचान मिली। रेलवे लाइन आने के बाद गोटन का महत्व और बढ़ा तथा यह कृषि एवं व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र बन गया।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन ने बताया कि गोटन रेलवे स्टेशन जोधपुर-जयपुर रेलमार्ग पर स्थित होने के कारण लंबे समय से व्यापार और आवागमन का केंद्र रहा है, विशेषकर सीमेंट उद्योग, खनिज परिवहन और लोडिंग-अनलोडिंग कार्यों का यह प्रमुख केंद्र रहा है। यहां 20 जोड़ी ट्रेनों का ठहराव दिया गया है और प्रतिदिन 3 हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं। ऐसे में स्टेशन का कायाकल्प न केवल यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करेगा बल्कि औद्योगिक आवागमन को भी नई गति देगा। आने वाले समय में यह स्टेशन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की धुरी के रूप में और अधिक सशक्त भूमिका निभाएगा। भारतीय रेलवे की महत्त्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत गोटन रेलवे स्टेशन का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। लगभग 18.93 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा यह विकास कार्य स्टेशन को एक आधुनिकएसुव्यवस्थित और यात्री.केंद्रित परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
पुनर्विकास कार्य के तहत गोटन रेलवे स्टेशन परिसर में नई आधुनिक स्टेशन बिल्डिंग का निर्माण किया गया है जिसमें स्थानीय स्थापत्य शैली की झलक भी समाहित की गई है। यात्रियों की सुविधा के लिए विस्तृत वेटिंग हॉल और विश्राम क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जहां बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, बेहतर वेंटिलेशन और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित होगा। स्टेशन के प्रवेश एवं निकास द्वारों को चौड़ा और सुव्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि बढ़ती यात्री संख्या के बीच आवागमन सहज बना रहे। इसके साथ ही पार्किंग एवं सर्कुलेटिंग एरिया का विस्तार कर यातायात प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। प्लेटफॉर्मों के बीच सुरक्षित आवागमन के लिए पैदल पुल (एफओबी) का निर्माण किया जा रहा है। स्टेशन को पूरी तरह दिव्यांगजन अनुकूल बनाने के लिए रैंप, रेलिंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं का समावेश किया गया है।
गोटन स्टेशन पर स्वच्छता और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए आधुनिक टॉयलेट ब्लॉक, बेहतर ड्रेनेज एवं जल निकासी प्रणाली तथा सुव्यवस्थित पार्सल कार्यालय और इलेक्ट्रिकल रूम भी विकसित किए जा रहे हैं। यात्रियों को रीयल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराने हेतु डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम और सूचना तंत्र लगाया जा रहा है, जिससे यात्रा और भी सुगम और पारदर्शी बनेगी। वर्तमान में परियोजना के अधिकांश प्रमुख कार्य पूर्ण हो चुके हैं और विभिन्न संरचनाओं पर फिनिशिंग कार्य तेजी से जारी है। इन सभी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पुनर्विकास का मुख्य उद्देश्य स्टेशन को स्वच्छ, सुरक्षित, आरामदायक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। साथ ही निर्माण कार्य में पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि स्टेशन केवल आधुनिकता का प्रतीक ही नहीं बल्कि क्षेत्र की विरासत का भी परिचायक बने। पुनर्विकसित गोटन रेलवे स्टेशन भविष्य में न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा, बल्कि औद्योगिक प्रगति और आधुनिक अवसंरचना के संगम के रूप में क्षेत्र की नई पहचान स्थापित करेगा।
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गोटन में औद्योगिक आवागमन को मिलेगी नई गति
गोटन रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत हो रहा पुनर्विकास
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