उदयपुर। सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय (एसपीएसयू), उदयपुर के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) प्रकोष्ठ द्वारा 29 जुलाई को बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) एवं कपिला योजना जागरूकता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, नवप्रवर्तकों एवं उद्यमियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के महत्व के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान प्रतिभागियों को पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिज़ाइन संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा नवाचारों के व्यावसायीकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही भारत सरकार की कपिला योजना के माध्यम से नवाचार, पेटेंट फाइलिंग एवं प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध अवसरों पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. संजय सिन्हा, एफआरएसए (FRSA) ने नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शोध एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने में बौद्धिक संपदा अधिकारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। प्रो प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) प्रसून चक्रवर्ती तथा स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंसेज़ (एसईएस) के डीन प्रो. अमित कुमार गोयल ने नवाचार-आधारित शोध पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का परिचय आईपीआर प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. कमल कांत हीरण ने प्रस्तुत किया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. जगदीश लोहार, इंडियन पेटेंट एजेंट एवं पंजीकृत एसआईपीपी (SIPP) फैसिलिटेटर, तथा डॉ. मयंक पटेल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज़, उदयपुर ने किया। उन्होंने उपयोगिता एवं डिज़ाइन पेटेंट को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया, बौद्धिक संपदा संरक्षण, शोध के व्यावसायीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा कपिला योजना के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी साझा की।
कार्यशाला में संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं नवप्रवर्तकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर संवाद करते हुए बौद्धिक संपदा संरक्षण एवं नवाचार से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
कार्यशाला के सफल आयोजन में आईपीआर टीम के सदस्य डॉ. पूनम सैनी, डॉ. चांदनी जोशी, डॉ. लोकेश गुप्ता एवं डॉ. ब्रजेश शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय की नवाचार, उद्यमिता एवं बौद्धिक संपदा जागरूकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ किया।
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