उदयपुर। पशुओं से स्वच्छ दुग्ध उत्पादन प्राप्त करने एवं बिना पशुओं के थन को नुकसान पहुंचाये दुग्ध दोहन करना एक वैज्ञानिक तकनीकी एवं कला है। यह बात पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान के उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने दुग्ध दोहन चार्ट के विमोचन के अवसर पर पशुपालक डिप्लोमा विद्यार्थियों से कही। डॉ. छंगाणी ने बताया कि पशुओं में दुग्ध दोहन करते समय अंगूठे को बाहर की तरफ रखकर दुहने से पशुओं के थनों को घाव होने से या थनेला रोग से पशुओं को बचाया जा सकता है एवं दुग्ध उत्पादन में गिरावट को रोका जा सकता है। डॉ. छंगाणी ने जानकारी दी कि अत्यधिक दुग्ध उत्पादन वाले पशुओं को 7-8 मिनिट में पूर्ण दुग्ध निकालने के लिए मशीन विधि का उपयोग करना चाहिए। संस्थान के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी नेबताया कि पशुपालक प्रायः अंगूठे से दबाव बनाकर दुग्ध दोहन करते हैं। यह बिल्कुल अनुचित है अतः उन्हें पूर्ण हस्त विधि से अंगूठा बाहर की ओर रखकर दुग्ध दोहन करना चाहिए। यह विधि अपनाने में प्रारम्भ में पशुपालको का दिक्कत हो सकती है किन्तु बाद में अभ्यास हो जाता है। छोटे थन वाले पशुओं में चुटकी विधि द्वारा दुग्ध दोहन करना चाहिए। संस्थान के उपनिदेशक डॉ. छंगाणी ने पशुपालन डिप्लोमा के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में पशुपालकों को दुग्ध दोहन प्रबंधन की उपयुक्त जानकारियां देकर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें।