उदयपुर । गवरी चौक पर आयोजित हिंदू सम्मेलन की समीक्षा बैठक का आयोजन श्री गणेश मंदिर सभागार, महाराणा प्रताप कॉलोनी सेक्टर 13 में संपन्न हुई। बैठक में बस्ती के पुजारी गणेश ,चम्पालाल ,मदन औदीच्य, कमलेश ,गोपाल एवं सम्मेलन में विशेष सहयोगी रहे सर्वश्री भानुप्रकाश दाहिमा,नरेंद्र पालीवाल,जयशंकर राय, चंद्रा माण्डावत,उछवलाल राजावत,नागदा ,सिंधी सेवा समिति,ओम मेनारिया एवम सामाजिक कार्यकर्ता मानवी राजपूत को आमंत्रित किया गया एवं उपस्थित को सम्मानित किया गया ।बैठक का प्रारंभ में सुंदरलाल मांडावत ने सम्मेलन को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं और बस्तीवासियों को धन्यवाद ज्ञापित किया और आह्वान किया कि हिंदू एकता के लिए निरंतर कार्य करते रहे।
विकसित भारत के लिए महावीर बस्ती का विकसित बनना भी आवश्यक है।बस्ती का विकास पंच सूत्रों के आधार पर करने का निर्णय किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र ने कहा कि भारत का विकास सामाजिक समरसता ,स्वदेशी भाव जागरण, कुटुंब का प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण एवं नागरिक कर्तव्य के पालन से तेजी से किया जाना संभव है। सामाजिक समरसता की व्याख्या में बताया कि जाति-पाति का भेदभाव न केवल अपने आचरण से प्रदर्शित करने की जरूरत है अपने मन से भी हिन्दू हिन्दू भाई भाई का विचार बैठाने की आवश्यक है।जिससे हिंदू समाज एक होकर विकसित भारत के लिए कार्य कर सके
। महात्मा गांधी के समय से भारत वासियों को स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल का आह्वान किया जाता रहा है वर्तमान समय में आवश्यकता है कि भारत में निर्मित भारतीय कंपनियों द्वारा वस्तुओं का उपयोग किया जाए जिससे विदेशी कंपनियां अपने लाभ को विदेश में ले जाकर भारत का जो कर्ज बढ़ती है उसे रोका जा सके। स्वदेशी का भाव केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं होकर स्वदेशी भाषा भूषा अपनाने तक होना चाहिए। स्थानीय बोलियों और हिंदी भाषा का गौरव होना चाहिए एवं दैनिक उपयोग में हिंदी भाषा का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
वर्तमान में विदेशी परिधान भारतीय वातावरण के अनुकूल नहीं है जिसके कारण न केवल शारीरिक दिक्कतें आती है। बल्कि स्वस्थ समाज के निर्माण में भी बाधा है अतः हिंदू त्योहारों पर भारतीय वेशभूषा का उपयोग प्रारंभ करना चाहिए ।
पर्यावरण की रक्षा करना हर एक व्यक्ति का कर्तव्य है। प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग कम करना, बस्ती में गन्दगी नहीं फैलाना, पानी को साफ रखना, वृक्षों का पालन करना, गांव की हरियाली की रक्षा करना, ऐसे पर्यावरण की रक्षा के लिए जो-जो काम हमें करना है, यह नहीं किया तो हमें इस विश्व में रहना बहुत कष्टदायक होगा। वायु, जल, भूमि, आकाश यह सब दूषित हुआ तो मानव जाति का कल्याण कैसे होगा. इसलिए पर्यावरण की सोच भी हम लोगों में होनी चाहिए।
हर एक व्यक्ति एक व्यक्ति के नाते समाज में रहते हुए समाज की भलाई और सु- व्यवस्था का पालन करने लायक जो नियम बनाया गया है, 'यातायात' का नियम होगा व 'कर' देने का नियम होगा और अपने बस्ती के घर की, शहर की बिजली का कैसे उपयोग करना है इसका संयमित व्यवहार होना चाहिए। सरकारी तंत्र, पुलिस, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, कर विभाग, विद्युत विभाग, सड़क सुरक्षा विभाग ऐसे जो समाज के रख-रखाव के लिए सरकार द्वारा बनाए गये हैं उसके साथ मिलकर ही हर एक व्यक्ति को जीना है हर एक नागरिक में यह संवेदना (CIVIC SENSE) नहीं होगी तो समाज में असुविधा उत्पन्न होगी। समाज में असुरक्षित स्थितिऔर भ्रम उत्पन्न होगी। ऐसे समाज में देश विरुद्ध, राष्ट्र विरुद्ध, समाज विरुद्ध, मानव जाति के विरुद्ध काम करने वाली शक्तियों का प्रभाव बढेगा। इसलिए हर एक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों (CIVIC SENSE) के बारे में अपना दायित्व क्या है उसके बारे में सोचना है। समाज के प्रति जो कर्तव्य है उसके बारे में भी हर एक व्यक्ति को चिंता करनी है।
कुटुंब प्रबोधब के बारे में बताया हजारों वर्षों के इतिहास, जीवन अनुभव व शोध ने हम भारतीयों को यह शिक्षित किया है कि मनुष्य का विकास, उसकी उत्तम शिक्षा दीक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक प्रगति आदि सब इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितने सुंदर परिवार व्यवस्था में से आता है। उसकी आर्थिक प्रगति हो अथवा उसका सामाजिक प्रभाव, उसकी जीवन की गुणवत्ता हो अथवा राष्ट्रीय प्रगति की प्रक्रिया, सब इस बात पर निर्भर है कि हम अपनी परिवार व्यवस्था को कितना अधिक मजबूत सोचते व संरक्षित रखते हैं।
बहस जैसे अवगुण ही उभरते हैं।भारत में भी जिस आबादी वर्ग या क्षेत्र विशेष पर इस पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव आया है वहां पर यह कठिनाइयां खड़ी होनी शुरू हो गई है।उदाहरण के रूप में कोटा से लेकर बेंगलुरु तक, पुणे से लेकर पटना तक, चंडीगढ़ से लेकर चेन्नई तक महानगरों के अंदर जहां पर युवक युवती पढ़ाई अथवा नौकरी करने के लिए अपने परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहते हैं, वहां वे अवसाद का शिकार अधिक होते हैं, विभिन्न प्रकार की बुराइयां कठिनाइयां उन्हें झेलनी पड़ती है। इसलिए भारत में होने वाली आत्महत्याओं में सर्वाधिक संख्या इन्हीं 20 स्थान (बड़े नगर) की है, जहां पर ट्यूशन, पढ़ाई अथवा नौकरी करने के कारण से युवा अकेले रहते हैं। इन्हीं क्षेत्र में ही रहने वाले युवा विवाह की इच्छा देरी से करना, विवाह देरी से करना, बच्चे देरी से करना जैसे विषयों से संघर्ष कर रहे हैं। एक नया विषय लिव इन रिलेशनशिप जैसी समस्या भी इन्हीं कुछ क्षेत्रों में ही उभरी है। परिवार व्यवस्था के अंतर्गत ही चलता है। इसे ही अधिक मजबूत बनाना, व्यक्ति, समाज और देश के सुखी समृद्ध और निरामय होने की आवश्यक शर्त है।
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि महावीर बस्ती में पंच सूत्रों को स्थापित कर विकसित कर भारत को परम वैभव पर पहुचाने की संकल्पना पूरी करेंगे।
संयोजक मनोहर सिंह राठौड़ ने कहा कि उन्हें गौरव है की सभी कार्यकर्ताओं ने अपना शत प्रतिशत देखकर कार्यक्रम को सफल बनाया।भविष्य में बस्ती में होने वाले महाराणा प्रताप जयंती,महावीर जयंती,श्री झूलेलाल जयंती, गुरु गोविन्द सिंह जयंती एवं अन्य कार्यक्रमों में सभी बस्तीवासी के सहयोग का आवाहन किया।
मंच संचालन श्री अखिलेश बंसल जी ने किया।