उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर एक बार फिर वैश्विक कला और संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठी, जब भारतीय लोक कला मंडल में पिवोट संस्था द्वारा आयोजित चार दिवसीय “वल्र्ड हेरिटेज इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल-2026” का भव्य समापन हुआ। कला, संस्कृति और विरासत को समर्पित इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव ने न केवल विभिन्न देशों की कलात्मक परंपराओं को एक मंच पर लाया, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और लोक विरासत की वैश्विक पहचान को भी नई ऊंचाइयाँ प्रदान कीं।
समापन समारोह में देश-विदेश के कलाकारों, कला प्रेमियों और संस्कृति जगत से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात कलाविद् प्रो. सुरेश शर्मा तथा पेसिफिक विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. हेमन्त कोठारी रहे।
इस अवसर पर पिवोट संस्था के संस्थापक राजेश यादव ने अपनी 25 वर्षों की कला यात्रा, सांस्कृतिक संरक्षण और सरकार के साथ कला-संवर्धन में किए गए योगदानों पर आधारित पुस्तक का विमोचन अतिथियों एवं विदेशी कलाकारों के साथ किया। यह पुस्तक भारतीय कला परंपरा, सांस्कृतिक संवाद और कलाकारों के संघर्ष व सृजन की जीवंत दस्तावेज के रूप में सामने आई।
राजेश यादव ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य विश्वभर की सांस्कृतिक विरासत को एक साझा मंच प्रदान करना और नई पीढ़ी को कला एवं संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि उदयपुर जैसे सांस्कृतिक शहर में आयोजित यह आयोजन भारत की लोक एवं पारंपरिक कलाओं को वैश्विक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
फेस्टिवल के अंतिम दिन कला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। मिनिएचर पेंटिंग की सूक्ष्म एवं पारंपरिक शैली को नई पहचान देने वाले कलाकार ओमप्रकाश सोनी को “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” प्रदान किया गया। वहीं बनारस घराने की विशिष्ट चित्र शैली को जीवंत बनाए रखने के लिए डॉ. गोपाल प्रसाद को सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय कला क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले उत्तरी आयरलैंड के कलाकार टॉमी बार को “कला रत्न अवार्ड” से नवाजा गया।
चार दिनों तक चले इस महोत्सव में 65 देशों के कलाकारों ने भाग लेकर 150 से अधिक चित्रों, मूर्तियों और शिल्प कृतियों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में आधुनिक कला के साथ-साथ लोक, जनजातीय और पारंपरिक भारतीय कला शैलियों की झलक ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराया। विभिन्न देशों के कलाकारों ने भारतीय लोक संस्कृति, अध्यात्म और विरासत से प्रेरित कृतियों को विशेष रूप से सराहा।
समारोह के दौरान आगामी 4 से 7 फरवरी तक बनारस में पिवोट आर्ट संस्था एवं बनारस लिटरेचर फेस्टिवल के संयुक्त तत्वावधान में पांचवें संस्करण के आयोजन की घोषणा भी की गई। यह घोषणा कला और साहित्य के साझा सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
इस अवसर पर संस्था की को-फाउंडर आशा यादव, कार्यकारी सदस्य पंकज कनेरिया तथा टीम सदस्य भास्कर चैधरी को भी कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह से पूर्व अर्थ डायग्नोस्टिक के डॉ. अरविंदर सिंह ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों की सराहना करते हुए कुछ चयनित चित्रों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की इच्छा व्यक्त की।
चार दिवसीय यह आयोजन उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने के साथ-साथ यह संदेश भी दे गया कि कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने वाला सबसे सशक्त माध्यम है।
Udaipur
विश्व कला-संस्कृति का संगम बना उदयपुर, 65 देशों की रचनात्मक विरासत ने बिखेरे रंग
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