21 मई भारतीय राजनीति और लोकतंत्र के इतिहास का वह भावुक दिवस है, जब देश आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा, भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है। राजीव गांधी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे युवा भारत की आशाओं, तकनीकी क्रांति, शिक्षा सुधार और आधुनिक सोच के प्रतीक थे। उन्होंने उस भारत का सपना देखा था जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर विश्व में अपनी अलग पहचान बनाए।
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ। वे देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और वरिष्ठ नेता फीरोज़ गाँधी के पुत्र थे। प्रारंभ में उनकी रुचि राजनीति में नहीं थी और वे एक सफल विमान चालक के रूप में कार्यरत थे। किंतु परिस्थितियों ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। छोटे भाई संजय गाँधी की असामयिक मृत्यु और बाद में इंदिरा गांधी की शहादत के पश्चात उन्होंने देश की जिम्मेदारी संभाली।
सन् 1984 में प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव गांधी ने भारत को नई दिशा देने का प्रयास किया। वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने और उन्होंने युवाओं की शक्ति को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत माना। संगणक, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देकर उन्होंने भारत में तकनीकी क्रांति की मजबूत नींव रखी। आज का डिजिटल भारत कहीं न कहीं उनके दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है।
राजीव गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु नई शिक्षा नीति लागू की तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर देने के लिए जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना की। पंचायत राज व्यवस्था को सशक्त बनाने, मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष करने तथा महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे उनके निर्णय आज भी ऐतिहासिक माने जाते हैं।

राजीव गांधी के जीवन में उनकी धर्मपत्नी सोनिया गाँधी का विशेष योगदान रहा। सोनिया गांधी हर कठिन समय में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। राजीव गांधी की शहादत के बाद भी उन्होंने गांधी परिवार की राजनीतिक एवं सामाजिक विरासत को संभाला और भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। त्याग, धैर्य और सेवा की भावना के कारण सोनिया गांधी आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
इसी प्रकार राजीव गांधी के पुत्र राहुल गाँधी और पुत्री प्रियंका गाँधी वाड्रा भी देश की राजनीति और जनसेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राहुल गांधी युवाओं, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के मुद्दों को निरंतर उठाते रहे हैं, जबकि प्रियंका गांधी अपनी प्रभावशाली वाणी, जनसंपर्क और संवेदनशील नेतृत्व के कारण लोगों के बीच विशेष पहचान रखती हैं। दोनों ही अपने पिता के लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में आतंकवादी हमले में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। उनकी शहादत ने पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया। किंतु उनके विचार, सपने और राष्ट्र निर्माण की सोच आज भी करोड़ों भारतीयों के हृदय में जीवित हैं।
आज जब भारत तकनीकी प्रगति, डिजिटल विकास और युवा शक्ति के बल पर विश्व मंच पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब राजीव गांधी का योगदान और भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। वे मानते थे कि भारत का भविष्य उसके युवा, शिक्षा और विज्ञान में छिपा है। यही कारण है कि उन्हें आधुनिक भारत का नवयुग निर्माता कहा जाता है।
राजीव गांधी की पुण्यतिथि हमें यह संदेश देती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो देश के भविष्य को पहचानकर आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार करे। उनका जीवन राष्ट्र सेवा, आधुनिक सोच और मानवता के प्रति समर्पण की अमिट प्रेरणा देता रहेगा।