जयपुर : जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ट्रस्ट द्वारा आयोजित 9वें आर्यन इंटरनेशनल चिल्ड्रन्स फिल्म फेस्टिवल ऑफ जयपुर (AICFF 2026) एवं 11वें सिक्सटीन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स (16IFF 2026) के अंतर्गत गुरुवार को रयान इंटरनेशनल स्कूल, वीटी रोड, मानसरोवर और डॉल्फिन्स हाई स्कूल, प्रताप नगर, जयपुर में 29 चयनित फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई।

इन फिल्मों में अलग-अलग संस्कृतियों, समाजों और मानवीय अनुभवों को दर्शाने वाली कहानियां शामिल रहीं। भारत की फिल्मों में तुम और मैं’, हम नई सुबह की किरणें हैं, यह नया ज़माना हमारा है – DJIME’, आखिर ऐसा क्यों होता है?’, वारंटी’ और सुधा वाइफ’ प्रमुख रहीं। इन फिल्मों के माध्यम से भारतीय समाज, मानवीय रिश्तों, सामाजिक परिस्थितियों और समकालीन विषयों को अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया।

सम्मान समारोह

इस दौरान फेस्टिवल डायरेक्टर हनु रोज ने तुम और मैं’ फिल्म के निर्देशक प्रणकुर चतुर्वेदी और अंजन सिंह, हम नई सुबह की किरणें हैं’ फिल्म की टीम, फिल्म वारंटी’ के निर्देशक संदीप राज के., आखिर ऐसा क्यों होता है’ के निर्देशक मोहनिंदर पाल विद्रोही तथा सिमंतिनी रमेश वेलुसकर को सम्मानित किया।

अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में दक्षिण कोरिया की बटरफ्लाई आइज’ और ईरान की द ट्रांसलेटर’ ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। फिलिस्तीन और अमेरिका की संयुक्त फिल्म माय फुट इज़ इन हेवन’, ऑस्ट्रिया की ए मदर्स लव’, नॉर्वे की डायनासोर्स इन हेवन’ और अमेरिका की द क्यूरियस इंसिडेंट ऑफ एवरेट वाइल्डर’ जैसी फिल्मों ने परिवार, भावनाओं, कल्पना और मानवीय अनुभवों से जुड़े विषयों को सामने रखा।

पाकिस्तान की करीम’, ऑस्ट्रेलिया की ऑस्ट्रेलिया – द ब्यूटीफुल’, ग्रीस की द पैच’, अमेरिका की लिटिल फियर्स लूंग’, रूस की द चीफ’ और फ्रांस की या हनूनी’ सहित अन्य फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की विविधता और अलग-अलग देशों की कहानी कहने की शैली से विद्यार्थियों को परिचित कराया। इन फिल्मों में सामाजिक सरोकार, प्रकृति, साहस, परिवार, संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और कल्पनाशीलता जैसे विषय प्रमुख रहे।

विशेष रूप से AI तकनीक से एकता कपूर के बैनर तले बनी राजस्थानी फिल्म ‘वॉटर’ ने विद्यार्थियों में उत्सुकता पैदा की। कक्षा 8 के एक छात्र ने फिल्म देखने के बाद कहा कि पहली बार AI से बनी फिल्म और वह भी राजस्थानी भाषा में देखकर उसे बहुत अच्छा लगा। इस फिल्म ने विद्यार्थियों को सिनेमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों की संभावनाओं से भी परिचित कराया। फिल्म पानी की समस्या को लेकर है

प्रांकुर चतुवेर्दी:-आज बच्चों के साथ उनके बीच बैठ कर फिल्म देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा

तुम और मेरे फिल्म के निर्देशक प्रांकुर चतुवेर्दी और अंजन सिंह ने कहा कि सच में आज बच्चों के साथ उनके बीच बैठ कर फिल्म देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। मैं जनवरी में जिफ में फिर आना चाहूंगा।

जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ट्रस्ट की ओर से आयोजित यह पहल विद्यार्थियों को विश्व सिनेमा से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें फिल्म निर्माण, रचनात्मक अभिव्यक्ति और नई तकनीकों के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।