उदयपुर । आर्य समाज हिरण मगरी सेक्टर 4 द्वारा रविवार को नवीन पीढ़ी को संस्कारवान, राष्ट्रभक्त, ईश्वर भक्त और स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से सनातन पाठशाला आयोजित की गई। पाठशाला में मुख्य वक्ता सरला आर्या ने कहा कि सनातन वह है सदा शाश्वत ही रहता है जैसे सूर्य। पुरातन का अर्थ पुराना है जबकि नूतन का अर्थ नया है। सनातन ज्ञान मानव मात्र की सुख, समृद्धि, शान्ति, आरोग्यता का ज्ञान है।
योगाचार्य जिग्नेश शर्मा द्वारा विद्यार्थियों को नेत्र की मांसपेशियों को मजबूत करने, नेत्र ज्योति बढ़ाने, एकाग्रता बढ़ाने तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाले आसन, प्राणायाम और ध्यान आदि का अभ्यास करावाया गया।
योगाचार्य शर्मा ने बताया कि वर्तमान में मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की आंखों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
ताड़ासन, गौमुखासन, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम तथा नेत्र व्यायाम के नियमित अभ्यास से न केवल नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है, बल्कि स्मरण शक्ति और एकाग्रता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है।
शिक्षिका बेला सिसोदिया द्वारा कबीर के दोहों के माध्यम से सदाचार, मधुर वाणी और सेवा का प्रेरक सत्र लिया गया।
हृदयम आयुर्वेद एंड योग केन्द्र की डॉ हर्षा कानावत ने स्वास्थ्य वार्ता में मिठाई, चॉकलेट, पीजा, बर्गर आदि जंक फूड कभी भी न खाने का संकल्प दिलवाया।
भूपेंद्र शर्मा द्वारा प्रेरक खेल, सनातन ज्ञान प्रश्नोत्तरी सत्र और विजेताओं को पुरस्कृत किया।
श्रीमान संपादक महोदय से प्रकाशनार्थ हेतु सादर निवेदन है।