उदयपुर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं महामंत्री इंजी. अरविन्द कौशल ने संयुक्त रूप से जारी प्रेस वक्तव्य में कहा है कि राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट लिखित आदेश हैं कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक रोगी को अस्पताल में उपलब्ध समस्त आवश्यक दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं तथा यदि कोई दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो तो उसे स्थानीय बाजार से तत्काल क्रय कर रोगी को उपलब्ध कराया जाए। किसी भी रोगी को निजी मेडिकल स्टोर से स्वयं दवाइयां खरीदने के लिए कहना विभागीय आदेशों एवं जनहित दोनों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में इन आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है कि बाहर से दवाइयां खरीदने हेतु पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है अथवा उपलब्ध राशि अत्यंत अपर्याप्त है। परिणामस्वरूप हजारों रोगियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा पेंशनर्स को विवश होकर अपनी जेब से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आर. एस. चावड़ा (जोधपुर), डॉ. सुरेन्द्र कुमार भटनागर (उदयपुर), डॉ. अरुण कुमार शर्मा (कोटा), श्री मनफूल मंगल्या (बीकानेर) तथा श्री मूलचन्द जाट (जोबनेर) ने संयुक्त रूप से कहा कि आरजीएचएस (RGHS) से संबद्ध अनेक निजी दवा विक्रेता सरकार द्वारा भुगतान में अत्यधिक विलम्ब तथा कथित अनुचित कटौतियों के कारण लाभार्थियों को दवाइयां देने से इंकार कर रहे हैं अथवा बहुत सीमित मात्रा में दवाइयां उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में सामान्य नागरिकों को भी उधार अथवा तत्काल दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिससे रोगियों का उपचार प्रभावित हो रहा है।
महासंघ के प्रदेश मंत्री डॉ. भरत सिंह भीमावत (जोधपुर), श्री नेमाराम (बीकानेर), श्री मोहनलाल चांगवाल (जोबनेर), श्री महावीर शर्मा (कोटा) तथा डॉ. भूपेन्द्र उपाध्याय (उदयपुर) ने कहा कि प्रदेश में अब तक निजी दवा विक्रेताओं तथा डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केन्द्रों का व्यापक एवं सुव्यवस्थित सूचीबद्धीकरण (Empanelment) नहीं किया गया है। फलस्वरूप जिन सरकारी अस्पतालों में जांच एवं इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां रोगियों, विशेषकर आरजीएचएस कार्डधारकों, को अपने निजी खर्च पर जांचें करवानी पड़ रही हैं और उनके द्वारा वहन की गई राशि का पुनर्भरण भी नहीं किया जा रहा है।
प्रदेश संगठन मंत्री इंजी. सुरेन्द्र भूषण सहाय (उदयपुर) ने कहा कि यह स्थिति राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य नीति की भावना के विपरीत है। यदि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाइयां एवं जांच सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तो निःशुल्क चिकित्सा का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। इससे पेंशनर्स, वरिष्ठ नागरिकों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि—
1. सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध न होने वाली दवाइयों की स्थानीय स्तर पर तत्काल खरीद की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
2. इसके लिए पर्याप्त एवं पृथक बजट तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
3. प्रदेशभर में निजी दवा विक्रेताओं तथा डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केन्द्रों का शीघ्र व्यापक सूचीबद्धीकरण (Empanelment) किया जाए।
4. आरजीएचएस कार्डधारकों एवं अन्य पात्र रोगियों द्वारा विवशतावश खरीदी गई दवाइयों तथा कराई गई जांचों पर हुए वास्तविक व्यय का समयबद्ध पुनर्भरण (Reimbursement) सुनिश्चित किया जाए।
5. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आदेशों का सभी सरकारी अस्पतालों में कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा उल्लंघन करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जाए।
राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने माननीय मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि इस अत्यंत गंभीर जनहित के विषय में तत्काल प्रभाव से ठोस निर्णय लेकर प्रदेश के लाखों रोगियों, वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनर्स को राहत प्रदान की जाए।