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आफरी जोधपुर की ओर से IFS अधिकारियों के लिए रिफ्रेशर

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16 Jan 26
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प्रशिक्षणमोहनगढ़ में किया फील्ड भ्रमण,

11 राज्यों के 15 IFS अधिकारियों ने मरुस्थलीय पारिस्थितिकी

 पौधारोपण कार्यों का किया अवलोकन

जैसलमेर।

आईसीएफआरई आफरीजोधपुर द्वारा भारतीय वन सेवा (आईएफएसअधिकारियों के लिए 12 से 16 जनवरी 2026 तक रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है यह कार्यक्रम निदेशक के मार्गदर्शन में तथा डॉअनुराग कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में संचालित हो रहा है। प्रशिक्षण में देश के 11 राज्यों से आए 15 आईएफएस अधिकारी भाग ले रहे हैं।

      प्रशिक्षण के तहत 14  15 जनवरी को अधिकारियों का एक्सपोजर विजिट आयोजित किया गयाजिसमें मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (डेजर्ट इकोसिस्टमसे जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रत्यक्ष अध्यय्न कराया गया। इसी क्रम में आफरी जोधपुर की टीम द्वारा जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र का सघन भ्रमण किया गया।

     नर्सरी  ETF का किया निरीक्षण

     मोहनगढ़ भ्रमण के दौरान आईएफएस अधिकारियों की टीम ने क्षेत्र में स्थित इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतिम छोर जीरो आरडीनर्सरी एवं 128 ईटीएफ (इको टास्क फोर्सपरिसर का गहन निरीक्षण किया। 128 ईटीएफ के कमान अधिकारी कर्नल मोहन सिंह राठौड़ के निर्देशन में अधिकारियों  जवानों ने दल के अधिकारियों को विभिन्न प्रजातियों के पौधों की नर्सरी तैयारीदेखरेखसिंचाई व्यवस्था तथा संरक्षण तकनीकों की जानकारी दी गई। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप लगाए जा रहे पौधों की उपयोगिता एवं उनके पर्यावरणीय महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

     ईटीएफ परिसर में पर्यावरण संरक्षणजल संरक्षण एवं हरित क्षेत्र विकास से संबंधित कार्यों का अवलोकन किया गया। ईटीएफ के जवानों ने बीज संग्रहण से लेकर पौधे तैयार करने और रोपण तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इन्हें भविष्य में हरित पर्यावरण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

 

             IGNP परियोजना से जुड़े पौधारोपण कार्यों का अध्ययन

     हरियाणा की सचिव वन एवं वन्यजीव वास्वी त्यागी ने बताया कि 11 राज्यों के 15 आईएफएस अधिकारी मिड-सर्विस करियर ट्रेनिंग के तहत यहां आए हैं। एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य यह जानना था कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना ¼IGNP)  लागू होने के समय क्षेत्र में किस प्रकार के पौधारोपण कार्यक्रम किए गएजिससे नहर परियोजना सुरक्षित रह सके।

    उन्होंने बताया कि टेरिटोरियल आर्मी द्वारा पौधारोपण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है। यहां फलदार वृक्षों के साथ साथ सजावटी पौधे एवं पर्यावरण के लिए उपयोगी विभिन्न प्रकार की घासें सफलतापूर्वक विकसित की गई हैं। यह विषम परिस्थितियों में भी पौधारोपण को सफल बनाने का बेहतरीन उदाहरण है।

    ‘नेशन फर्स्ट के लक्ष्य के साथ पर्यावरण संरक्षण

    128 ईटीएफ की ओर से कर्नल मोहन सिंह राठौड़ ने कहा कि भारतीय सेना का मूल मंत्र ‘नेशन फर्स्ट है और इसी भावना के तहत उनकी यूनिट पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि आईएफएस जैसे अनुभवी अधिकारियों के साथ संवाद से विशेषज्ञता का आदान-प्रदान होता हैजो दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है।

    भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों पर पौधारोपण  पर्यावरणीय कार्यों के प्रभाव पर भी विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराकर वनों के प्रति उनकी सहभागिता और संवेदनशीलता बढ़ाई जा सकती है।

    सतत् मरुस्थलीय विकास पर केंद्रित प्रशिक्षण

    यह रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम “इंटीग्रेटेड एप्रोच फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट ऑफ फ्रैजाइल डेजर्ट इको-सिस्टम” विषय पर आधारित है, जिसे पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित किया गया है। कोर्स डायरेक्टर डॉ. संगीता सिंह के निर्देशन में वैज्ञानिक डॉ. विश्वनाथ शर्मा, डॉ. रतनराम लोहटा ¼ACTO)  एवं डॉ. जगराम चौधरी ¼ACTO) द्वारा तकनीकी सत्र लिए जा रहे हैं  कार्यक्रम का उद्देश्य मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, प्रबंधन एवं सतत विकास के लिए आईएफएस अधिकारियों को वैज्ञानिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। 


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