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मकर संक्रांति पर जयपुर की सड़कें सूनी और छतें हुई आबाद तथा सतरंगी हुआ आसमां…

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15 Jan 26
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मकर संक्रांति पर जयपुर की सड़कें सूनी और छतें हुई आबाद तथा सतरंगी हुआ आसमां…

गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

अंतरराष्ट्रीय पतंगबाजी में इस बार गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में जयपुर ने परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। गुलाबी नगरी की छतों से लेकर जलमहल की पाल तक पतंगों का उत्सव पूरे शबाब पर रहा। जल महल पर राजस्थान पर्यटन विभाग के तत्वावधान में हुए खूबसूरत आयोजन में देश-विदेश से आए पतंगबाजों ने भाग लिया, जिससे जयपुर एक बार फिर वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर चमक उठा। इस बार जयपुर के अंतरराष्ट्रीय पतंगबाजी -2026 कार्यक्रम में कई विशेष मेहमान आए जिनमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और खुद पतंग उड़ाते हुए उत्सव का आनंद लिया। उनके साथ प्रदेश की उप मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री दिया कुमारी भी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहीं और उन्होंने भी पतंगबाजी में सक्रिय भाग लिया।

 

जलमहल क्षेत्र में, जहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोक कलाकारों की झांकियों और पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों ने उत्सव को बहुरंगी स्वरूप दिया। वहीं विदेशी पतंगबाजों ने अपने-अपने देशों की खास डिज़ाइन और तकनीक से बनी पतंगें उड़ाकर दर्शकों को आकर्षित किया। खास बात यह रही कि इस बार पर्यावरण-अनुकूल पतंगों और सूती मांझे पर विशेष जोर दिया गया।हालांकि मौसम ने पूरी तरह साथ नहीं दिया। हवा अपेक्षाकृत कमजोर रहने से सुबह के समय पतंगबाजी कुछ धीमी रही, लेकिन दोपहर बाद आसमान रंगों से भर उठा। बाजारों में सेलिब्रिटी, सामाजिक संदेश और सांस्कृतिक प्रतीकों वाली पतंगों की खूब मांग दिखी।साथ ही, प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों ने पक्षी सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। घायल पक्षियों के लिए हेल्प डेस्क और रेस्क्यू टीम सक्रिय रहीं, जो इस आयोजन की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, इस बार की अंतरराष्ट्रीय पतंगबाजी जयपुर के लिए उत्सव, पर्यटन और जिम्मेदारी—तीनों का संतुलित उदाहरण बनी। कमियों के बावजूद, सतरंगी आसमान और छतों पर उमड़ा उल्लास यह साबित करता है कि जयपुर की पतंगबाजी सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पहचान है।

 

राजस्थान पर्यटन विभाग की आयुक्त रूकमणी रियाड़ ने आयोजन का संचालन और शुभारंभ करते हुए इसकी सांस्कृतिक व पर्यटन महत्ता पर प्रकाश डाला। जयपुर के पतंग महोत्सव में पतंगबाजी के अलावा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लाइव पतंग निर्माण और आतिशबाज़ी जैसी गतिविधियाँ भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनीं। 

 

उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति के आते ही गुलाबी नगरी जयपुर का मिज़ाज बदल जाता है। आम दिनों में जहां चहल-पहल से भरी सड़कें दिखाई देती हैं, वहीं इस दिन सड़कें सूनी और शहर की छतें आबाद नजर आती हैं। हर छत एक उत्सव स्थल बन जाती है और आसमान सतरंगी पतंगों से भर उठता है। नीले गगन पर उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें जयपुर की पहचान बन चुकी हैं, जिन्हें देखने देश-विदेश से सैलानी यहां खिंचे चले आते हैं। दरअसल जयपुर की पतंगबाजी लोगों  का केवल शौक नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा है। ‘काई पो छे’ और ' वो काटा' की गूंज, ढोल-नगाड़ों की थाप और घर-घर में बनते तिल के लड्डू व घेवर इस पर्व को खास बना देते हैं। इस बार भी गुलाबी नगरी जयपुर की आभा कुछ इस तरह से ही खिली। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई पतंग की डोर थामे आसमान से संवाद करता नजर आया शहर की पुरानी हवेलियों, ऐतिहासिक किलों और आधुनिक इमारतों की छतों से एक साथ उड़ती पतंगें जयपुर को मानो खुली-हवा की रंगशाला में बदल दिया।शाम ढलते-ढलते आसमान का रंग बदल गया । पतंगों के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ और जगमगाती रोशनी, रंगीन फुलझड़ियां और आकाश में खिलते आतिशी फूलों ने जयपुर की रौनक को कई गुना बढ़ा दिया। ऐतिहासिक स्मारकों की पृष्ठभूमि में चमकती आतिशबाजी ने गुलाबी नगरी को एक अलौकिक सौंदर्य प्रदान किया। जिसे कैमरों में कैद करने के लिए पर्यटक घंटों इंतजार दिखे।जयपुर की यह पतंगबाजी और आतिशबाजी केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भी है। छतों पर पड़ोसी, मित्र और परिवार एक साथ जुटते हैं, मिठाइयां बांटी जाती हैं और हंसी-ठिठोली का दौर चलता है। यही कारण है कि यह पर्व हर साल नई ऊर्जा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

 

सच कहा जाए तो मकर संक्रांति के दिन जयपुर ने अपने नाम को पूरी तरह सार्थक कर दिया। यह गुलाबी नगरी नहीं, बल्कि सतरंगी नगरी बनकर कर हर किसी के दिलों दिमाग पर छा गया। सड़कें भले ही सूनी दिखी हों, लेकिन छतों पर उमड़ा जन उल्लास और आसमान में बिखरे रंगों ने  जयपुर को दुनिया भर में एक बार फिर अपनी खास पहचान दिलाई है।

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