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राजस्थान की विरासत का सैलानियों में बढ़ता आकर्षण

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14 Jan 26
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राजस्थान की विरासत का सैलानियों में बढ़ता आकर्षण

गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

राजस्थान की विरासत के दर्शन के प्रति सैलानियों में बढ़ता आकर्षण इस बात का प्रमाण है कि राजस्थान में भजन लाल शर्मा की सरकार ने पर्यटन की सही नीति और नेतृत्व से पर्यटन को आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास का सशक्त माध्यम बनाया है। 

राजस्थान अपनी भव्य विरासत, राजसी स्थापत्य, लोक संस्कृति और ऐतिहासिक गौरव के कारण देश–विदेश के सैलानियों के लिए सदैव आकर्षण का केंद्र रहा है। किले, महल, हवेलियाँ, मंदिर, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और पारंपरिक जीवनशैली ये सभी मिलकर राजस्थान को केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक जीवन्त विरासत बनाते हैं। हाल के वर्षों में प्रदेश में विरासत-आधारित पर्यटन के प्रति सैलानियों का रुझान तेजी से बढ़ा है और इसके पीछे एक स्पष्ट, सुनियोजित और दूरदर्शी सोच भी दिखाई देती है। आज का पर्यटक केवल स्मारक देखना नहीं चाहता, वह उससे जुड़े इतिहास को महसूस करना चाहता है। इसी सोच के अनुरूप राजस्थान में हेरिटेज टूरिज़्म को हकीकत में महसूस करने का स्वरूप दिया जा रहा है। आमेर, मेहरानगढ़, कुम्भलगढ़, चित्तौड़गढ़ जैसे किलों के साथ-साथ अब छोटे ऐतिहासिक स्थलों, बावड़ियों, हवेलियों और लोक संस्कृति को भी पर्यटन मानचित्र पर उभारा जा रहा है। राज्य में हेरिटेज वॉक, लाइट एंड साउंड शो, फोक परफॉर्मेंस और पारंपरिक खानपान ने सैलानियों के अनुभव को और समृद्ध किया है। स्थानीय संस्कृति और कारीगरों को बढ़ावा देने से

विरासत पर्यटन का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचा है। हस्तशिल्प, लोककला, पारंपरिक वस्त्र, ब्लू पॉटरी, मीनाकारी, बंधेज और लकड़ी की नक्काशी आदि को पर्यटन से जोड़ने से कारीगरों को नया बाज़ार मिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न में “वोकल फॉर लोकल” केवल नारा नहीं, बल्कि ज़मीनी कार्य योजना है। प्रदेश में हाट, फेयर और हेरिटेज फेस्टिवल के माध्यम से लोक संस्कृति को वैश्विक मंच मिल रहा है। राजस्थान की विरासत अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों और वैश्विक आयोजनों में राजस्थान की मजबूत उपस्थिति बनी है। महलों में डेस्टिनेशन वेडिंग, हेरिटेज होटल्स और पैलेस टूरिज़्म ने विदेशी सैलानियों को विशेष रूप से आकर्षित किया है। इससे राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय पहचान और भारत की सांस्कृतिक कूटनीति भी सफल हुई है।

 

 

राजस्थान में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार से विरासत स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क, साफ-सफाई, संकेतक, डिजिटल गाइड, ऑडियो-विजुअल टूर और ऑनलाइन टिकटिंग जैसी सुविधाओं ने सैलानियों का भरोसा बढ़ाया है। राज्य सरकार पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा, स्वच्छता और आतिथ्य को प्राथमिकता दे रही है। इसका सीधा असर घरेलू ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी देखने को मिला है।

 

राजस्थान की उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी के विज़न ने राज्य के पर्यटन और विरासत संरक्षण विभाग को नई मजबूती और दिशा दे रही है। राजसी पृष्ठभूमि और विरासत से गहरे जुड़ाव के कारण दीया कुमारी राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा को भली-भांति समझती हैं। उनके सक्रिय नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण का परिणाम है कि राज्य में पर्यटन नए आयामों को छू रहा है ।उनका स्पष्ट मानना है कि विरासत का संरक्षण और पर्यटन विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी सोच के साथ विभागीय नीतियों में संतुलन लाया गया है। राजस्थान में जहाँ एक ओर स्मारकों का संरक्षण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी सृजित हों रही है। प्रदेश के नेतृत्व और पर्यटन विभाग ने “हेरिटेज फर्स्ट” दृष्टिकोण को अपनाया है। इसमें ऐतिहासिक धरोहरों की मरम्मत, रखरखाव, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जा रहा है, ताकि सैलानी सुविधाजनक और यादगार अनुभव लेकर लौटें। सस्टेनेबल टूरिज़्म के साथ ही विरासत स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जीवनशैली के सम्मान पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन विकास से विरासत को नुकसान न पहुँचे, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे। दीया कुमारी के विज़न ने न केवल पर्यटन एवं विरासत विभाग को मजबूती दी है, बल्कि राजस्थान की आत्मा—उसकी संस्कृति और इतिहास—को वैश्विक मंच पर नए सम्मान के साथ प्रस्तुत किया है। आज राजस्थान की विरासत केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान की पहचान और भविष्य की संभावनाओं का आधार बन चुकी है।

 

 

प्रदेश की राजधानी गुलाबी नगर जयपुर में आयोजित होने वाले तीज और त्यौहार भी पर्यटन को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा रहे है। हाल ही मकर संक्रांति पर जयपुर में अंतरराष्ट्रीय पतंगबाजी समारोह के प्रति देशी विदेशी पर्यटकों का आकर्षण देखने लायक है। हमेशा की तरह जयपुरराइट्स इस बार भी पतंगबाजी के लिए तैयार हैं। गुलाबी नगरी में जगह-जगह जमकर पतंगों-डोर की बिक्री हो रही है। परकोटा, हांडीपुरा और अन्य जगहों पर पतंगों का मार्केट चरम पर है। यहां नेताओं और अभिनेताओं के नाम की पतंगों का खासा क्रेज दिख रहा है। 

इस बार बाजार में बैटरी, लाइटिंग वाली फिरकी का खास क्रेज है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बनी पतंगों और मांझे की बिक्री भी तेज है।पतंगबाजों में खासकर जयपुर में बनी पतंगों का क्रेज सबसे ज्यादा है। बच्चों के लिए कार्टून मोटू-पतलु, छोटा भीम वाली पतंगें भी खास हैं। जयपुर में हजारों लोग पतंगें बनाने में जुटते हैं।  

 

जयपुर में होने वाले तीज से गणगौर तक के त्यौहारों का आयोजन राजस्थान में पर्यटन को विश्व प्रसिद्ध बनाने में अहम योगदान देता है। संयोग से राज्य की पर्यटन मंत्री दिया कुमारी की राजसी पृष्ठभूमि इन त्यौहारों के उन्नयन को एक नई दिशा भी दे रही है।


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