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निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का संकल्प 46 वर्षों से सतत जारी

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14 Jan 26
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निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का संकल्प 46 वर्षों से सतत जारी

उदयपुर।स्वामी रामदास की पावन स्मृति एवं संत रामज्ञानदास की प्रेरणा से पिछले 46 वर्षों से उदयपुर व चित्तौड़गढ़ जिले के चिकित्सक निःस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। मानव सेवा के इस महायज्ञ की निरंतरता में इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में विशाल निःशुल्क चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया गया।

शिविर के समापन अवसर पर श्री राम वन कुटीर आश्रम, हंडियाकोल जंगल (बाराबंकी) में आयोजित समारोह को महाराज भगवान दास जी, विष्णु जी महाराज, ट्रस्टी कैप्टन सुरेश ईनाणी, शंकरलाल सोमानी एवं मैनेजर शिव कुमार निगम ने संबोधित किया।
महाराज भगवान दास जी ने इस सेवा को निष्काम मानव सेवा बताते हुए चिकित्सकों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना की।

90 सदस्यीय चिकित्सा दल ने दी सेवाएं

इस वर्ष आयोजित शिविर में 90 सदस्यीय चिकित्सा दल ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
शिविर निदेशक डॉ. जे. के. छापरवाल (पूर्व एमेरिटस प्रोफेसर मेडिसिन एवं उपकुलपति, साईं तिरूपति विश्वविद्यालय, उमरड़ा, उदयपुर) ने बताया कि दल सेवा के इस पुनीत कार्य हेतु बाराबंकी पहुंचा था।

डॉ. छापरवाल ने जानकारी दी कि हंडियाकोल जंगल स्थित श्री राम वन कुटीर आश्रम में आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर में हजारों जरूरतमंद रोगियों का उपचार किया गया।

3300 से अधिक सफल ऑपरेशन

इस विशाल चिकित्सा शिविर के दौरान—

मोतियाबिंद

हर्निया

हाइड्रोसिल

बवासीर

गर्भाशय संबंधी रोग

के लगभग 3300 ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए।

शिविर में—

40 चिकित्सक

60 नर्सिंग स्टाफ

10 वैद्य

5 तकनीशियन
के साथ वार्ड बॉय, आया एवं समाजसेवी शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त कोलकाता, अहमदाबाद, भिवानी, दिल्ली, जयपुर, लखनऊ एवं हरियाणा से आए चिकित्सकों ने भी शिविर में अपनी सेवाएं प्रदान कीं।

सेवा में समर्पित चिकित्सक व सहयोगी

चिकित्सा दल में प्रमुख रूप से—

चिकित्सक एवं सर्जन:
डॉ. जे. के. छापरवाल, डॉ. एस. के. सामर, डॉ. एस. एस. भारद्वाज (पूर्व विधायक, भिवानी-हरियाणा), डॉ. जे. एल. कुमावत, डॉ. एल. एल. सेन, डॉ. नीलाभ अग्रवाल (लखनऊ), डॉ. बी. एस. बाबेल (जयपुर)

एनेस्थीसिया विशेषज्ञ:
डॉ. अर्चना अग्रवाल (लखनऊ), डॉ. शरद नलवाया (गंगापुर), डॉ. प्रशांत जैन

वैद्य:
लक्ष्मीकांत आचार्य, जयंत व्यास, अरुण व्यास, पुष्कर चौबीसा

नर्सिंग स्टाफ व सहयोगी:
संपत बराला, सुखलाल धाकड़, संतोषपुरी (उदयपुर), हेमंत संत, गोपाल जीनगर, सुरेश लॉवटी (कुरज), दीपचंद रेगर (रेलमगरा)

वार्ड बॉय व समाजसेवी:
हीरालाल खटीक, चमन लाल, रतन देवी, मोतीलाल, प्रकाश देवपुरा, दीपक पोद्दार, बुद्धिप्रकाश पारीक, भगवती प्रसाद शर्मा (किले वाले), विदेश जीनगर सहित अनेक सेवाभावी कार्यकर्ता शामिल रहे।

यह शिविर 46 वर्षों से निरंतर चल रही निःशुल्क चिकित्सा सेवा परंपरा का एक और सफल अध्याय रहा, जिसने मानवता, करुणा और सेवा भाव की सशक्त मिसाल प्रस्तुत की।


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