उदयपुर। सुरों की मंडली के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि झीलों की नगरी में सुर, लय और ताल का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला जिसने कड़ाके की ठंड में भी संगीत प्रेमियों के उत्साह को कम नहीं होने दिया।
संगीत के प्रति समर्पित संस्था सुरों की मण्डली' की ओर से शनिवार, 10 जनवरी को 100 फीट रोड, शोभागपुरा स्थित अशोका पैलेस के मधुश्री बैंक्वेट हॉल में आयोजित 'एसकेएम स्वर कोकिला व स्वर सम्राट 2026' प्रतियोगिता सुरमयी यादों के साथ देर रात्रि संपन्न हुई।
लगभग 550 मिनट तक चले इस मैराथन आयोजन में सुरों की ऐसी सरिता बही कि संगीत प्रेमी दोपहर 3:00 बजे से लेकर मध्य रात्रि 12:30 बजे तक अपनी कुर्सियों से बंधे रहे।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अमृता बोकड़िया द्वारा मां सरस्वती की वंदना और निर्णायक मंडल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि नए साल के इस पहले भव्य आयोजन में करीब 55 प्रतिभागियों ने अपनी गायकी का हुनर दिखाया। प्रतियोगिता का सबसे मनमोहक और रोचक संयोग तब देखने को मिला जब टोकन प्रक्रिया के दौरान मंच पर पहली प्रस्तुति देने के लिए एक 'ससुर जी' का नाम आया, वहीं कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति उनकी 'बहू' द्वारा दी गई। इस इत्तेफाक ने तब और खुशी बढ़ा दी जब अंतिम प्रस्तुति देने वाली बहू डॉ. हर्षा नेभनानी को उनके उत्कृष्ट गायन के लिए 'स्वर कोकिला 2026' के ताज से अलंकृत किया गया।
उन्होंने बताया कि प्रतिस्पर्धा के कड़े मुकाबलों के बीच निर्णायकों ने प्रतिभा को तराशा। महिला वर्ग में डॉ. हर्षा नेभनानी विजेता बनीं, जबकि इनू रावल उपविजेता और नन्ही गायिका आराध्या वैष्णव तीसरे स्थान पर रहीं। पुरुष वर्ग में कमलेश कुमावत ने अपनी गायकी से 'स्वर सम्राट' का खिताब जीता, वहीं गौरव स्वर्णकार दूसरे और गोपाल गोठवाल तीसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता में निष्पक्ष निर्णय के लिए उदयपुर के राजकुमार नेभनानी, झूमर चक्रवर्ती और चित्तौड़गढ़ के विजय मलकानी ने अपनी नि:शुल्क सेवाएं दीं। कार्यक्रम की विशिष्टता यह रही कि फाइनल राउंड में न केवल विशेषज्ञ जज, बल्कि उपस्थित श्रोताओं को भी निर्णायक की भूमिका में शामिल किया गया।
संयोजक रमेश दतवानी और सचिव अरुण चौबीसा ने बताया कि आयोजन के बीच-बीच में श्रोताओं के लिए फिल्मी प्रश्नोत्तरी भी रखी गई, जिसमें सही उत्तर देने वालों को पुरस्कृत किया गया। आयोजन को सफल बनाने में अमृता बोकड़िया, लक्ष्मी आसवानी, चेतना जैन, ईश्वर जैन "कौस्तुभ", महावीर जैन और राजकुमार बाफना सहित पूरी टीम का विशेष सहयोग रहा। विजेताओं को मोमेंटो और उपरणा पहनाकर सम्मानित किया गया।