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कहानियों से संस्कारों की सीख: तीन दिवसीय ‘उदयपुर टेल्स’ का समापन कल

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10 Jan 26
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कहानियों से संस्कारों की सीख:  तीन दिवसीय ‘उदयपुर टेल्स’ का  समापन  कल

उदयपुर। बच्चों के बालमन को कल्पना, संवेदना और जिम्मेदारी के सूत्र में पिरोने वाला तीन दिवसीय Udaipur Tales स्टोरी टेलिंग फेस्टिवल अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। शिल्पग्राम रोड स्थित पार्क एक्जोटिका में Maa My Anchor Foundation के तत्वावधान में आयोजित इस सांस्कृतिक उत्सव के दूसरे दिन कहानियों ने बच्चों को कर्तव्य-बोध, भावनात्मक समझ और संबंधों के महत्व का सहज पाठ पढ़ाया।


रहस्य, रोमांच और प्रेम से जुड़ी रोचक कथाओं में बच्चे इस कदर डूबे कि कहानी सुनते-सुनते उन्होंने उसे महसूस भी किया। मनोरंजन के साथ प्रेरणा का संतुलन ऐसा रहा कि तालियों, ठहाकों और जिज्ञासु प्रतिक्रियाओं से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में बच्चों का सामूहिक नृत्य मानो उनकी ऊर्जा और उल्लास का उत्सव बन गया। संचालन श्रुति मंत्री ने किया।


दूसरे दिन की शुरुआत शोना मल्होत्रा की कहानियों—द माउंटेन डेथ लव अर्थ और मुजिया मगू—से हुई। प्रेम और रहस्य के इन रंगों ने बच्चों को कल्पना की दुनिया में ले जाकर खड़ा कर दिया। फाउंडेशन की संस्थापक Sushmita Singha ने बताया कि इन कथाओं के जरिए बच्चों को यह संदेश दिया गया कि प्रेम विश्वास, धैर्य और समर्पण से पनपता है—न कि जल्दबाजी, झूठ या किसी प्रकार के अंधविश्वास से।

लोक साहित्य की फोक रोल कहानी के जरिए Maiya Ganatra ने बच्चों को साहस और आत्मविश्वास का संदेश दिया। सह-संस्थापक Salil Bhandari ने बताया कि कहानीकार Rajesh Shinde ने हास्यपूर्ण अंदाज में गोपी गाइन और उपेन्द्र बाघा बाइन सुनाकर बच्चों का भरपूर मनोरंजन किया और यह भाव जगाया कि अच्छा दिल और सकारात्मक मन किसी भी राह को रोक नहीं सकता।

दोपहर सत्र में महिलाओं के लिए ‘जमघट’ आयोजित हुआ, जहां गृहणियों, कॉलेज छात्राओं और स्वतंत्र प्रतिभागियों ने ओपन माइक पर अपनी कहानियां प्रस्तुत कीं। शाम और रात के सत्र में थिएटर निर्देशक Danish Hussain की किस्सेबाजी, अभिनेता Arif Zakaria की रोमांटिक कहानी और गायक-अभिनेता Meiyang Chang की स्वतंत्र संगीत प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर लोक श्रेणी में पद्मश्री Parshuram Gangavane और समसामयिक श्रेणी में Valentina Trivedi को मास्टर स्टोरीटेलर सम्मान प्रदान किया गया।

थिएटर निर्देशक दानिश हुसैन ने कहा कि नेरेटिव जीवन का आईना है—असहमति में भी गरिमा बची रहे, यही कहानी की सीख है। उन्होंने रेखांकित किया कि उदयपुर के श्रोताओं में कहानी समझने की भूख है और यही कला की सबसे बड़ी जीत है।

फेस्टिवल के अंतिम दिन आत्मकथा, शास्त्रीय महाकाव्य, पौराणिक कथा, बैंड प्रस्तुति, हास्य-व्यंग्य और सूफी कव्वाली जैसे रंग मंच पर उतरेंगे—और ‘उदयपुर टेल्स’ एक बार फिर यह साबित करेगा कि कहानियां सिर्फ सुनाई नहीं जातीं, वे संस्कार गढ़ती हैं।


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