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सूर्य नगरी से राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने का अप्रत्यक्ष संकेत की निकली रोशनी   

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12 Jan 26
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सूर्य नगरी से राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने का अप्रत्यक्ष संकेत की निकली रोशनी   

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के सबसे विश्वस्त अथवा यू कहें कि उनके राजनीतिक चाणक्य केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े और राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर  नगर की यात्रा केवल एक औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसके जरिए राजस्थान की राजनीति, संगठनात्मक दिशा और आगामी चुनावी रणनीतियों के कई स्पष्ट संकेत सामने आए है । मरुधरा से हरियालो राजस्थान की ओर करवट लेती राजस्थान की धरती से दिए गए उनके संदेशों में जहां राष्ट्रीय सुरक्षा, सुशासन और विकास का एजेंडा दिखा, वहीं इसके निहितार्थ प्रदेश की सियासत में दूरगामी प्रभाव डालने वाले हैं।

 

अमित शाह की पहचान एक सख्त संगठनकर्ता और रणनीतिकार के रूप में रही है। जोधपुर यात्रा के दौरान पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ उनका संवाद यह दर्शाता है कि भाजपा राजस्थान में संगठन को और अधिक धार देने के मूड में है। यह साफ संकेत है कि पार्टी जमीनी स्तर तक कैडर को सक्रिय कर, *बूथ से प्रदेश* तक की रणनीति को फिर से धार दे रही है।

 

जोधपुर अंचल केवल सांस्कृतिक या प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम इलाका है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और विकास तीनों मुद्दे संवेदनशील हैं। अमित शाह की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि केंद्र सरकार पश्चिमी राजस्थान को केवल सामरिक दृष्टि से नहीं, बल्कि विकास के केंद्र के रूप में भी देख रही है। आने वाले दिनों में पचपदरा तैल रिफाइनरी और पेट्रो कॉम्प्लेक्स का प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के  हाथों उद्घाटन कराना भी इसका एक अहम अंग कहा जाएगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत करने की मंशा झलकती है।

 

गृह मंत्री के तौर पर अमित शाह के भाषणों और बयानों में कानून-व्यवस्था, आतंकवाद के खिलाफ सख्ती और आंतरिक सुरक्षा आदि प्रमुख विषय रहे। जोधपुर यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर जोर यह संकेत देता है कि भाजपा आने वाले समय में राजस्थान में *सुरक्षा बनाम लापरवाही* के नैरेटिव को और मजबूत करेगी। यह संदेश खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं को साधने के लिए अहम माना जा रहा है।

 

अमित शाह की यात्रा को मौजूदा राज्य सरकार के कामकाज के मूल्यांकन के रूप में भी देखा जा रहा है। केंद्र की योजनाओं, विकास कार्यों और *डबल इंजन सरकार* के लाभ गिनाकर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि यदि राज्य और केंद्र में एक ही दल की सरकार हो, तो विकास की रफ्तार तेज होती है। यह विपक्ष के लिए सीधी राजनीतिक चुनौती के रूप में सामने आई। हालांकि मंच से चुनावों की सीधी घोषणा नहीं हुई, लेकिन समय, स्थान और संदेश तीनों मिलकर यह बताते हैं कि यह यात्रा भविष्य की राजनीतिक तैयारी का हिस्सा है। जोधपुर से दिया गया संदेश प्रदेशभर में यह संकेत देने के लिए काफी है कि भाजपा अब स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के चुनावी मोड में आ चुकी है और हर क्षेत्र को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। अमित शाह की यात्राओं की एक खास बात यह होती है कि वे केवल भाषण नहीं देते, बल्कि संगठन को अनुशासन और स्पष्ट दिशा का संदेश भी देते हैं। जोधपुर यात्रा से यह संकेत भी मिला कि पार्टी नेतृत्व राज्य इकाई से अपेक्षा रखता है कि वह केंद्र की नीतियों और वैचारिक लाइन के अनुरूप एकजुट होकर काम करे।

 

 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जोधपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मातृभाषा के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि भाषा केवल बोलचाल का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की आत्मा उसकी मातृभाषा में बसती है और यदि आने वाली पीढ़ी अपनी भाषा से कट जाती है तो वह अपनी जड़ों से भी दूर हो जाती है।अमित शाह ने अभिभावकों से विशेष आग्रह किया कि वे घर में बच्चों से अपनी मातृभाषा और हिंदी में ही संवाद करें। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने इतिहास, संस्कारों तथा सांस्कृतिक मूल्यों को सहज रूप से समझ पाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मातृभाषा को उपेक्षित किया जाए।

उन्होंने स्वदेशी और स्वभाषा को आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद बताते हुए कहा कि जब तक हम अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व नहीं करेंगे, तब तक सशक्त और आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।

 

*राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने का अप्रत्यक्ष संकेत*

 

इस प्रकार लगता है कि अमित शाह ने जोधपुर की धरती पर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की अपनी सरकार की मंशा का अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिया है। आंचलिक भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में करने का काम अमित शाह का गृह मंत्रालय ही करता है। यदि ऐसा होता है तो करोड़ों राजस्थानियों की आशाओं और मंसूबे सफलता के शिखर पर पहुंच जायेंगे। जलते दीप और माणक समूह ने कई दशकों से राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने का अभियान चला रखा है। इस समूह के प्रमुख पदम मेहता हर संसद सत्र और राज्य विधानसभा के हर सत्र में प्रदेश के प्रत्येक सांसद और विधायक को पत्र लिख कर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने का स्मरण कराते है। वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मोदी सरकार में शामिल राजस्थान के मंत्री गणों गजेन्द्र सिंह शेखावत,अर्जुन राम मेघवाल, अश्विनी वैष्णव,भूपेन्द्र यादव, भागीरथ चौधरी आदि से व्यक्तिगत रूप से मिल कर इस संदर्भ में गंभीर प्रयास करते आए है। अमित शाह के मातृभाषा के सम्बन्ध में ताजा बयान से राजस्थ भाषा प्रेमियों की उम्मीदें फिर से जगी है। कुछ दिनों पूर्व केन्द्रीय  कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी राजस्थानी भाषा को मोदी सरकार द्वारा संवैधानिक मान्यता देने की संभावना सम्बन्धी बयान दिया था।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हाल ही अपनी भाषा को बचाने तथा उसके संवर्धन की बात कही है।

 

अमित शाह की जोधपुर यात्रा को यदि समग्र रूप से देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि इसके निहितार्थ केवल एक शहर या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं हैं। यह यात्रा राजस्थान में भाजपा की राजनीतिक दिशा, संगठनात्मक मजबूती, सुरक्षा और विकास के एजेंडे तथा आगामी चुनावी रणनीति सभी का संकेत देती है। पश्चिम राजस्थान से उठी यह राजनीतिक आहट आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा करने वाली साबित हो सकती है। साथ ही केन्द्र सरकार द्वारा राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की उम्मीदें भी जगी  है। सूर्य नगरी जोधपुर से नया वर्ष 2026 राजस्थान के लिए नए सूरज की रोशनी लेकर आयेगा ऐसा विश्वास किया है सकता है ।


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