GMCH STORIES

बाल विवाह की आवश्यक रोकथाम के लिए हुआ विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

( Read 192 Times)

06 Feb 26
Share |
Print This Page

बाल विवाह की आवश्यक रोकथाम के लिए हुआ विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

          जैसलमेर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर द्वारा माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा प्रवर्तित योजना नालसा आशा (जागरूकता, समर्थन, सहायता और कार्यवाही) मानक संचालन प्रक्रिया - बाल विवाह से मुक्ति की ओर अग्रसर, 2025 व एक्शन प्लान के तहत् अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर ओमी पुरोहित के निर्देशन में मोन्टेसरी बाल निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, जैसलमेर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में प्रधानाचार्य सुरेश कुमार कल्ला, सहायक विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता शिप्रा सांडिल्य, खेमेन्द्र सिंह भाटी व अधिकार मित्र जगदीश कुमार ने भाग लिया।

             शिविर में न्याय-रक्षक शिप्रा सांडिल्य द्वारा बाल विवाह के संबंध में विधिक जानकारियां प्रदान करते हुए बताया कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति के साथ-साथ कानूनी अपराध है, इसकी रोकथाम के लिए विधायिका द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 पारित किया गया है, जिसके विधिक प्रावधानों के अनुसार विवाह के समय लड़के की आयु कम से कम 21 वर्ष तथा लड़की की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। इस अधिनियम के अनुसार बाल विवाह के लिए 02 वर्ष तक का कारावास और 01 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। शिविरों में बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में भी अवगत कराया जाकर बताया गया कि बाल विवाह के कारण अवयस्क बच्चों का स्वास्थ्य विपरीत रूप से प्रभावित हो सकता है व उनके व्यक्तित्व का विकास अवरूद्ध हो जाता है।

          उन्होंने ने यह भी बताया कि बाल विवाह रोकथाम व बाल विवाह पीड़ितों की सहायता हेतु नालसा आशा योजना के तहत् ‘‘आशा इकाई’’ का भी गठन किया गया है। एवं उन्होंने शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों को लैंगिक हिंसा व भेदभाव के उन्मूलन हेतु पारित महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 व घरेलू हिंसा से महिलाओं का सरंक्षण अधिनियम, 2005 के विधिक प्रावधानों के बारे में भी जानकारी प्रसारित की। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि पुलिस विभाग की ओर से बाल विवाह रोकथाम हेतु जिला मुख्यालय जैसलमेर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो 24 घंटे कार्यरत है व जिसके दूरभाष नंबर 02992-250747 एवं वाट्स एप नंबर 9530438715 है।

          साथ ही न्याय-रक्षक खेमेन्द्रसिंह भाटी ने विद्यार्थियों ने बताया की भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 में बलात् श्रम व अनुच्छेद 24 में बालश्रम पर पाबंदी लगाई गयी है एवं अनुच्छेद 39 राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का कोई दुर्व्यवहार न हो। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ यह भी जानकारी साझा की कि बालश्रम (निषेध व विनियमन) अधिनियम, 1986 के विधिक प्रावधानों के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मजदूरी करवाना एवं 14 से 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को जोखिम वाले कार्याें में रोजगार पर लगाने को दण्डनीय अपराध बनाया गया है तथा उन्होंने बच्चों को नशे व ऑनलाईन गेमिंग के दुष्प्रभावों के बारे में अवगत करवाया एवं भविष्य में कभी भी नशा नहीं करने के संबंध में ^^Say No to Drugs, Yes to Life” की प्रतिज्ञा दिलाई।

           इसके अतिरिक्त अधिकार मित्र, जगदीश कुमार ने रालसा के निर्देशों की पालना में बाल विवाह रोकथाम हेतु संचालित विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100 व चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 के बारे में उपस्थितों को अवगत कराया व विधिक सेवा प्राप्त करने की प्रक्रिया व पात्रता, लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों के निस्तारण, मध्यस्थता के प्रावधान तथा माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों को न्याय तक पहुँच प्रदान करने के लिए बनाए गए एक्सेसिबिलिटी वेब प्रोग्राम (Accessibility Web Program) के बारे में बताया। इस प्रकार शिविरों के माध्यम से उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों व कर्मचारियों को जागरूक किया गया।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like