GMCH STORIES

पल्लव ( बाल काव्य निकुंज ) मनोरंजन के साथ बच्चों को सीख देती रचनाएं

( Read 373 Times)

01 Feb 26
Share |
Print This Page
पल्लव ( बाल काव्य निकुंज )    मनोरंजन के साथ बच्चों को सीख देती रचनाएं

पर की निन्दा अपनी स्तुति / मत कर, मत कर, मत कर। / आत्मनिरीक्षण स्वदोष दर्शन / नित कर, नित कर, नित कर।

जलन, ईर्ष्या, द्वैष, कलह/ मत कर, मत कर, मत कर । /बड़ों का मान, अपना काम /नित कर नित कर, नित कर।

 जयपुर की लेखिका अक्षयलता शर्मा की नई बाल काव्य निकुंज " पल्लव " की यह बानगी अपने आप में लेखिका की संवेदनशीलता को बताती है। वे कितने सहज और सरल शब्दों में कविताओं के माध्यम से कितनी गहरी बात समझने में सक्षम है। नित कर, नित कर, नित कर ( पृष्ठ 36 ) कविता बाल बोध से परिपूर्ण है जो बच्चों को जीवन का सार बताती है। आगे इसी कविता में वे बच्चों को घृणा, लालच, पर-पीड़ा, आलस्य-प्रमाद, मोह-जड़ता नहीं करने और पर उपकार, परिजन की सेवा ,योग-व्यायाम प्रभु का ध्यान  करने का संदेश भी देती हैं। इस संग्रह की कविताएं छोटे-छोटे बच्चों के बाल मन एकदम सीधे छूती ही हैं साथ ही ये आसानी से उनकी जुबान पर भी चढ़ जाती हैं और वे गुनगुनाने लगते हैं। यह है लेखिका के बाल बाल मन को समझने का मनोविज्ञान और बच्चों के प्रति उनकी संवेदनशीलता।

 "रंगीन मिठाई" कविता की तरलता और सीख देखिए...( पृष्ठ 27 ).....

मम्मी बोली, ठीक नहीं है/ खुली मिठाई को खाना/ बन्द पड़ी है, वो भी बासी/ घर चलो तुम ताजी खाना/ 

समझदार था दीपू नन्हा/ कहना मम्मी का झट माना/  चीकू लोट गया वहीं पर/ रूठ गया जरा न माना/

 जिद पर आ गया/ खा गया दौनाभर, खुली रंगीन मिठाई / घर आते ही शामत आई /चले हॉस्पिटल चीकू भाई ।

   कितना सार्थक संदेश  है कि मेलों में खुली मिठाई खाना सेहत के लिए ठीक नहीं है। चीकू नहीं माना और मिठाई खा कर अस्पताल जाना पड़ गया। एक संदेश यह भी कि बच्चों को बड़ों की बात माननी चाहिए, वे हमेश अपने बच्चों का हित चाहते हैं, जैसा कि दीपू ने मम्मी का कहा माना।

" पंछी" कविता में आजादी का महत्व बताता गया है कि आजादी सबको प्यारी होती है। जब किसी परिंदे को पालतू बना लिया जाता है तो वह कितना बेबस हो जाता है। आजाद उड़ने के लिए छटपटाता है । जब वह पिंजरे से उड़ जाएगा उसकी खुशी को महसूस किया है इस कविता में ( पृष्ठ 13  ).....

वो देखो उड़ते हैं पंछी /उड़ते कितनी मौज में / अपना मिट्टू बन्द पड़ा है,/ वो कितना नाराज है/! पिंजड़ा खोलो, पिंजड़ा खोल /, ये उसके दिल की आवाज है।/ चलें खोल दें पिंजड़ा/ मिले उसको आकाश / हां, हां मिले उसको आकाश / पेड़ों पर झट चढ़ जाएगा,/डालों पर झूले खाएगा/ दोस्तों से मिल पाएगा/ कितना मज़ा उसको आएगा/

  बच्चों की ऐसी ही मनभावन कविताओं चिड़िया, कितनी चिड़ियां, तितली मुझे बना देना, चंदामामा आ जाना, बादल धूप छिपा दो ना, पतंग उड़ी, टॉय ट्रेन, जन्मदिन की मिठाई, टीटू का घोड़ा,देखो मस्ती बालक की,मित्रों के संग होली का निकुंज है संग्रह पल्लव।

     पुस्तक की भूमिका में बाल साहित्यकार डॉ. श्रीमती युगल सिंह ने लिखा है किकवयित्री के शब्द चुप रहकर भी बोलने से प्रतीत होते हैं। उन्होंने नन्ही पौध को खाद पानी देने का प्रयास किया है। उनकी रुचियां और क्षमताओं को पहचानने का सफल प्रयत्न है। बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए भाषा भावानुकूल, सरल, सहज एवं बोधगम्य हैं। आशा है बच्चों को ' पल्लव' पुस्तक बेहद पसंद आएगी। वे पढ़ने के साथ ही कविताओं को गुनगुनाने पर विवश हो जाएंगे। निवेदन में लेखिका लिखती हैं कि आवश्यकता है सत्साहित्य से बाल मन की आकर्षित कर संस्कारित करने की।

साहित्य जगत् में इस दिशा में हलचल होने लगी है। साहित्यपुरोधा भी रचनाधर्मियों को इस ओर प्रेरित करते दिखाई दे रहे हैं। मेरा मन भी संवेदना से भर आया और ध्यान इस विषय पर केंद्रित हो गया। परिणाम है-'बाल काव्य-निकुंज । 'इसमें जीवनमूल्यों की प्रेरक कविताओं, बालगीतों व काव्य पहेलियों को स्थान दिया गया है। पल्लव' बाल काव्य-निकुंज का प्रथम भाग है। इस में 26 सचित्र काव्य रचनाएं हैं। बच्चे चित्रों में रंग भरने का आनंद भी ले सकेंगे। पुस्तक का आवरण पृष्ठ  प्राकृतिक वातावरण में संवेदना से भरपूर उत्साही बच्चों का दृश्य आकर्षित करता है। 

( लेखिका को नन्हें नन्हें बच्चों के लिए इतनी सुंदर और उपयोगी पुस्तक लिखने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। )

 

 

( संपर्क : मो. 94617 04390 / लेखिका श्रीमती अक्षयलता शर्मा को साहित्यिक सेवाओं के लिए 7 फरवरी को नाथद्वारा में आयोजित पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह में साहित्य मंडल द्वारा सम्मानित किये जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.)

 


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like