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वासुदेव देवनानी : एक  महान व्यक्तित्व और कृतित्व के धनी

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10 Jan 26
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गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

वासुदेव देवनानी : एक  महान व्यक्तित्व और कृतित्व के धनी

राजस्थान की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल सत्ता या पद के कारण नहीं, बल्कि अपने विचार, आचरण और सतत सार्वजनिक सेवा के कारण स्मरणीय बनते हैं। वासुदेव देवनानी ऐसे ही नेताओं में अग्रणी हैं। वे एक अनुभवी जनप्रतिनिधि, कुशल संगठनकर्ता, संवेदनशील शिक्षक, विचारशील लेखक और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के सजग प्रहरी के रूप में जाने जाते हैं। उनका जीवन राजनीति को सेवा, शिक्षा को संस्कार और सत्ता को उत्तरदायित्व मानने की दृष्टि का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।

जीवन परिचय : संस्कारों से सेवा तक

वासुदेव देवनानी का जन्म राजस्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर अजमेर के अंचल में एक साधारण, किंतु संस्कारयुक्त परिवार में हुआ। उनका परिवार ने भी विभाजन की त्रासदी झेली थी । पारिवारिक वातावरण में अनुशासन, नैतिकता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना सहज रूप से विद्यमान थी। बाल्यकाल से ही उनमें अध्ययनशीलता, आत्मसंयम और सामाजिक विषयों के प्रति जिज्ञासा दिखाई देती थी।

उन्होंने शिक्षा को मात्र नौकरी या आजीविका का साधन न मानकर समाज निर्माण का सशक्त माध्यम माना। यही कारण रहा कि उन्होंने शिक्षक के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की। शिक्षक रहते हुए उन्होंने कई पीढ़ियों को केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं दिया, बल्कि उनमें राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्य, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का भी बीजारोपण किया। विद्यार्थियों के साथ उनका संबंध औपचारिक न होकर प्रेरणादायी और मार्गदर्शक रहा।

वैचारिक पृष्ठभूमि और संगठन से जुड़ाव

शिक्षक जीवन के साथ-साथ वासुदेव देवनानी सामाजिक गतिविधियों और वैचारिक आंदोलनों से भी सक्रिय रूप से जुड़े। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्यार्थी परिषद से प्रेरित संगठनों के संपर्क ने उनके व्यक्तित्व को वैचारिक दृढ़ता, संगठन क्षमता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की दृष्टि प्रदान की। संघ के संस्कारों ने उनमें अनुशासन, समर्पण और निस्वार्थ सेवा की भावना को और अधिक प्रखर किया।यही वैचारिक पृष्ठभूमि आगे चलकर उनके सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बनी। वे राजनीति में किसी आकांक्षा या पद-लालसा से नहीं, बल्कि सेवा-भाव और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ आए।

राजनीतिक यात्रा : जनप्रतिनिधि से विधानसभाध्यक्ष तक

वासुदेव देवनानी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया और अनेक बार विधायक के रूप में जनता का विश्वास प्राप्त किया। उनके निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों, जनसंवाद और सामाजिक सहभागिता के कारण उनकी पहचान एक सुलभ, सरल और कर्मठ जनप्रतिनिधि की रही है।

राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को केवल डिग्री-केंद्रित न रखकर उसे रोजगारोन्मुखी, गुणवत्तापूर्ण और मूल्यपरक बनाने पर बल दिया। सरकारी विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करना, शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाना, संस्कृत, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रोत्साहन देना उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएँ रहीं। उनका मानना रहा कि शिक्षा ऐसी हो जो व्यक्ति को सक्षम नागरिक और चरित्रवान मानव बनाए।स्कूली  शिक्षा पाठ्यक्रम में अकबर महान के स्थान पर महाराणा प्रताप महान और करीब दौ सौ महापुरुषों के पाठों को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए वे देश भर में चर्चित हुए।

वर्तमान में वासुदेव देवनानी राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष के संवैधानिक पद पर आसीन हैं। इस गरिमामय दायित्व का निर्वहन करते हुए उन्होंने विधानसभा को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। डिजिटल विधानसभा की परिकल्पना, विधानसभा की डिजिटल गैलरी में संविधान गैलरी और वन्दे मातरम् गैलरी की स्थापना, कारगिल शौर्य वाटिका का निर्माण, विधायकों के लिए डिजिटल हस्ताक्षर जैसी पहलें उनके दूरदर्शी और नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाती हैं ।वे विधानसभा में और भी कई नवाचार करने की मंशा रखतें है।

व्यक्तित्व के आयाम : सादगी, दृढ़ता और संतुलन

वासुदेव देवनानी का व्यक्तित्व सादगी, स्पष्टता और वैचारिक दृढ़ता का संतुलित समन्वय है। वे दिखावे और आडंबर से दूर रहकर कार्य में विश्वास रखने वाले नेता हैं। अनुशासन और समयबद्धता उनके स्वभाव की प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो उनके सार्वजनिक जीवन में भी स्पष्ट दिखाई देती हैं।वे संवाद में शालीन और विनम्र हैं, किंतु निर्णय के समय दृढ़ और स्पष्ट। विरोधी विचारों को भी लोकतांत्रिक मर्यादा के भीतर रह कर सभी पक्षों को सुनना उनके परिपक्व नेतृत्व का परिचायक है। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रवादी चिंतन उनके विचारों के केंद्र में हैं, परंतु वे इन्हें कट्टरता के बजाय समन्वय और संवाद के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं।उनका व्यवहार सत्ता के प्रदर्शन से अधिक सेवा भाव से प्रेरित प्रतीत होता है। यही कारण है कि पक्ष और विपक्ष दोनों ही उन्हें सम्मान और विश्वास की दृष्टि से देखते हैं।

कृतित्व और योगदान : राजनीति से परे प्रभाव

वासुदेव देवनानी का कृतित्व केवल राजनीतिक निर्णयों या प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं है। उन्होंने विचार और लेखन के माध्यम से भी समाज को दिशा देने का प्रयास किया है।मूल्यपरक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत और योग को शिक्षा व्यवस्था में सम्मानजनक स्थान दिलाने के उनके प्रयास दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ते हैं।विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक तकनीकी, पारदर्शी और प्रभावी बनाकर उन्होंने लोकतंत्र को नई ऊर्जा दी।उनकी हाल ही उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन के हाथों नई दिल्ली में लोकार्पित पुस्तक “सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि” भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करती है, जो वैचारिक जगत में विशेष रूप से चर्चित रही है।विधानसभा में कारगिल शौर्य वाटिका जैसी पहलें आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति और बलिदान के प्रति सम्मान की भावना जागृत करती हैं।

वासुदेव देवनानी का जीवन एक शिक्षक से लेकर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष तक की प्रेरक और मूल्यनिष्ठ यात्रा है। उनका व्यक्तित्व संस्कार, संगठन और सेवा का त्रिवेणी संगम है, जबकि उनका कृतित्व शिक्षा, लोकतंत्र और संस्कृति के क्षेत्र में स्थायी प्रभाव छोड़ता है। वे उन नेताओं में हैं जिन्होंने पद को प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और सेवा का माध्यम माना है ।

राजस्थान की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में वासुदेव देवनानी का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल मार्गदर्शक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि विचार, चरित्र और सेवा के बल पर राजनीति को समाज-निर्माण का साधन बनाया जा सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का  11 जनवरी को जन्मदिन है लेकिन इस बार उनकी धर्म पत्नी इंदिरा देवनानी के निधन के कारण यह जन्म दिन सादगी से मनेगा। इस अवसर पर उनके गृह नगर अजमेर में सिर्फ सुंदरकांड का पाठ होगा।देवनानी ने अपने सभी समर्थकों से आग्रह किया है कि वे 11 जनवरी को जन्मदिन पर कोई भव्य आयोजन न करे।उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष देवनानी के जन्मदिन पर अजमेर में भव्य आयोजन होता है लेकिन इस बार धर्म पत्नी के निधन के कारण जन्मदिन पर देवनानी अपने समर्थकों से माला, गुलदस्ता आदि भी स्वीकार नहीं करेंगे। 11 जनवरी के दिन देवनानी के अजमेर स्थित संत कंवर राम कॉलोनी के निवास पर दोपहर  सुंदरकांड का पाठ होगा। उनके समर्थकों से आग्रह किया गया है कि वे जन्मदिन को सादगी के साथ मनाए। समर्थक जो माला लाएंगे उसे राम दरबार में समर्पित किया जाएगा। देवनानी ने उम्मीद जताई कि उनके समर्थक उनकी भावनाओं का ख्याल करेंगे। देवनानी इस बार अपने जन्मदिन पर जेएलएन अस्पताल और कोटड़ा स्थित सैटेलाइट अस्पताल में जनोपयोगी कार्य भी  करा सकते है वहीं  12 जनवरी को जयपुर में विधानसभा सहकारी समिति के ब्लड डोनेशन कैंप में भी शामिल हों सकते है ।


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