श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुर्वेद विभाग राजस्थान द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से 10 दिवसीय अर्श/भगन्दर निःशुल्क क्षारसूत्र चिकित्सा शिविर सनातन धर्म मंदिर एल ब्लॉक हनुमान मंदिर में आयोजित शिविर का शुक्रवार को समापन हुआ।
समापन समारोह में आयुर्वेद विभाग के संभागीय अतिरिक्त निदेशक डॉ. राधेश्याम ने शिविर में भर्ती रोगियों का फीडबैक लिया एवं शिविर की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। शिविर के समापन समारोह में अपने उदबोधन में उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत का प्राचीन चिकित्सा विज्ञान है, जो सदियों से इस धरती पर आरोग्य प्रदान करता रहा हैं, आयुर्वेद न केवल रोग की चिकित्सा करता है अपितु व्यक्ति व समाज स्वस्थ कैसे रहे, इसके तरीके, दिनचर्या, ऋतुचर्या एवं आहार विहार के माध्यम से बताये हैं।
शिविर में विशेषज्ञ शल्य चिकित्सक डॉ. पंकज पोटलिया एवं डॉ. हरवीर सिंह सांगवा ने भर्ती रोगियों को पथ्य के बारे में जानकारी देते हुये जिन व्यक्तियों को यह बीमारी नहीं है, उनके लिये आहार विहार और पथ्य के बारे में जानकारी दी जिससे यह रोग उत्पन्न ही नहीं हो। शिविर प्रभारी डॉ. राजकुमार पारीक ने बताया कि अर्श (बवासीर), भगन्दर एवं फिशर के कुल 98 रोगियों को भर्ती कर क्षारसूत्र विधि से शल्य चिकित्सा कर लाभान्वित किया। ओपीडी में 2147 रोगियों को औषधि व चिकित्सा परामर्श देकर लाभान्वित किया गया।
उपनिदेशक डॉ. कृष्ण चन्द्र ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुये शिविर के स्टॉफ को भी पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन व आयुष मंत्रालय भारत सरकार के दिशा-निर्देशों की पूर्ण पालना करते हुये शिविर में सम्पर्ण व्यवस्थायें कर रोगियों को लाभान्वित किया गया। अतिथियों द्वारा विभाग के सेवानिवृत्त पचकर्म विशिषज्ञ डॉ. ओम पारीक की पंचकर्म चिकित्सा की पुस्तक का विमोचन किया। शिविर में उपस्थित चिकित्सक एवं नर्स कम्पाउण्डर को पुस्तक की प्रति वितरित की गई।
केबीएस हर्बल के प्रोपराइटर भामाशाह श्री दीपक गोयल द्वारा कैंप में औषधि व अन्य कार्यों में आर्थिक सहयोग किया गया। संभागीय अतिरिक्त निदेशक ने उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानीत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुर्वेद विभाग के संभागीय अतिरिक्त निदेशक डॉ. राधेश्याम ने की एवं विशिष्ट अतिथि संभाग के सहायक निदेशक डॉ. जितेन्द्र सिंह भाटी उपस्थित रहे।