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मोदी सरकार के बजट पर कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया

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01 Feb 26
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मोदी सरकार के बजट पर कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया

उदयपुर | केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पेश आम बजट पर उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह बजट एक बार फिर निराशाजनक साबित हुआ है और इससे स्पष्ट है कि सरकार के पास देश के लिए न तो कोई स्पष्ट विजन है और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति। बजट में देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के समाधान का अभाव है। युवाओं के रोजगार के लिए कोई ठोस योजना नहीं दी गई, वहीं गरीब और मध्यम वर्ग को महंगाई से कोई राहत नहीं मिली। आम लोगों की बचत लगातार घट रही है और सरकार केवल पुराने वादों को दोहराने तक सीमित है।राठौड़ ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर हालात और बदतर हुए हैं। शहर रहने लायक नहीं रह गए हैं और इंदौर जैसे स्मार्ट सिटी में गंदा पानी पीने से लोगों की जान तक जा रही है, फिर भी सरकार जुमलों से काम चला रही है। कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में बजट कटौती कर देश को पीछे धकेलने की कोशिश की जा रही है। आंकड़ों का खेल खेलकर वास्तविकता से ध्यान हटाया जा रहा है।


वहीं राजस्थान प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया को-ऑर्डिनेटर डॉ. संजीव राजपुरोहित ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नाम पर राजस्थान की जनता से वोट तो लिए गए, लेकिन केंद्र के बजट में राजस्थान के इंजन को ईंधन ही नहीं मिला। देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान का बजट भाषण में उल्लेख तक न होना प्रदेश के साथ अन्याय है। गरीबों, श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के लिए कोई बड़ी राहत की घोषणा नहीं की गई और महंगाई पर नियंत्रण के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

डॉ. राजपुरोहित ने कहा कि रुपये की गिरावट, बढ़ती असमानता और रोजगार सृजन जैसे गंभीर मुद्दों पर बजट पूरी तरह मौन है। असमानता ब्रिटिश राज के स्तर को भी पार कर चुकी है, लेकिन सरकार ने इसका जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक थकी हुई सरकार का बजट है, जो न तो राज्यों को पूरा पैसा देती है और न ही मिले बजट का समुचित उपयोग करती है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस नेताओं के अनुसार यह बजट गरीबों और युवाओं के हितों की अनदेखी करता है। महंगाई कैसे कम होगी और रोजगार कैसे पैदा होंगे—इन सवालों के जवाब बजट में नहीं मिलते। डबल इंजन के बावजूद यह बजट राजस्थान के लिए “ऊंची दुकान, फीका पकवान” साबित हुआ है और देश के लिए भी अत्यंत निराशाजनक है।


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