GMCH STORIES

‘‘खेला पोलमपुर’’ का प्रभावशाली मंचन

( Read 2097 Times)

17 Jun 26
Share |
Print This Page

‘‘खेला पोलमपुर’’ का प्रभावशाली मंचन

उदयपुर | भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर द्वारा 6 मई 2026 से आयोजित 40 दिवसीय प्रस्तुति-परक नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन बुधवार को प्रसिद्ध नाटक खेला पोलमपुर के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ।

भारतीय लोक कला मण्डल के निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय कौशल, व्यक्तित्व विकास, वॉइस एवं स्पीच, माइम एवं मूवमेंट, इम्प्रोवाइजेशन, रंगमंचीय प्रस्तुति तथा अभिनय की विभिन्न विधाओं का नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों, संस्था के मानद सचिव सत्य प्रकाश गौड़ एवं निदेशक डॉ. लईक हुसैन द्वारा संस्था संस्थापक पद्मश्री देवीलाल सामर की तस्वीर पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने प्रसिद्ध साहित्यकार मणि मधुकर द्वारा रचित नाटक खेला पोलमपुर का डॉ. लईक हुसैन के निर्देशन में प्रभावी मंचन किया। यह नाटक लोककथा पर आधारित एक सशक्त लोकनाट्य है, जो सत्ता, शोषण, अन्याय एवं जनसामान्य के संघर्ष की कथा को व्यंग्यात्मक एवं लोक शैली में प्रस्तुत करता है।

नाटक की कहानी पोलमपुर राज्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ लक्की शाह नामक अत्याचारी और स्वेच्छाचारी राजा का शासन है। उसके शासन में प्रजा भय, अन्याय और शोषण से त्रस्त है। राजमहल की षड्यंत्रकारी शक्तियाँ, भ्रष्ट दरबारी और सत्ता के मद में चूर शासक आम जनजीवन को संकट में डाल देते हैं।

नाटक में लोकजीवन से जुड़े पात्र सत्ता के अत्याचारों का सामना करते हैं। हास्य, व्यंग्य, लोकगीत, लोकनृत्य और रहस्यपूर्ण घटनाओं के माध्यम से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार साधारण लोग अपनी बुद्धिमत्ता, साहस और एकजुटता के बल पर अन्याय का प्रतिरोध करते हैं। प्रेम, संघर्ष, छल, सत्ता की क्रूरता और जनशक्ति की विजय जैसे विविध रंगों से सजा यह नाटक दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक चेतना का संदेश भी देता है। घटनाओं के रोचक मोड़, लोकनाट्य की जीवंत शैली और तीखे राजनीतिक व्यंग्य ने नाटक को समकालीन समाज का दर्पण बना दिया। अंततः सत्य, साहस और जनशक्ति की विजय होती है तथा पोलमपुर की जनता एक नए भविष्य की ओर अग्रसर होती है।

नाटक में समरू की भूमिका में मोहम्मद अली बशर, जड़िया की भूमिका में दिविशा पालीवाल, लखी शाह की भूमिका में दिव्यांशु नागदा, फूल कुँवर की भूमिका में तन्वी बिजारणिया, दीवान दाताराम के रूप में रमेश डांगी, माताराम के रूप में राजेश सेन, जल्लाद की भूमिका में किशन सोनी, प्रियांशु सुहालका एवं धनंजय सुहालका भूत की भूमिका में एकांश नन्दवानी, कृष्णवीर साहू एवं धैर्य बोर्दिया तथा मौत महारानी की भूमिका में देवयानी साहू ने प्रभावशाली अभिनय किया। इसके अतिरिक्त जॉनी की भूमिका में जसपाल सोनी, सूत्रधार के रूप में दर्शिता भल्ला तथा नृत्य प्रस्तुति में ज्योति माली, रीना बागड़ी एवं गीतिशा पाण्डे ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस नाटक के सह निर्देशक डॉ. गिरीश वर्मा ध्वनी प्रखर, प्रकाश परिकल्पना प्रबुद्ध पाण्डे, नृत्य संरचना शिप्रा चटर्जी, वेशभूषा अनुकम्पा लईक, सामग्री किशनी गमेती एवं सेट- भगवती माली, मोहन डाँगी एवं राकेश देवड़ा ने किया।

कार्यक्रम के अंत में  संस्था निदेशक ने सफल आयोजन हेतु सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like