उदयपुर। सावन मास में सेवा महातीर्थ में चल रही शिव कथा में शुक्रवार को जब शिव नाम की गूंज उठी तो वातावरण केवल कथा का नहीं, बल्कि आस्था, करुणा और आत्मबल का हो गया।
नारायण सेवा संस्थान में अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में चल रही ‘अपनों से अपनी बात - कथा भोलेनाथ के साथ’ में 51 शक्तिपीठों का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया गया।
कथा में संस्थान से लाभान्वित दिव्यांगजन भी शिव भक्ति में ऐसे रमे कि उनके चेहरों पर श्रद्धा के साथ आत्मविश्वास की चमक दिखाई दी।कथा में माता सती के देह त्याग और भगवान शिव के विरह से जुड़े प्रसंग के माध्यम से 51 शक्तिपीठों की महिमा बताई गई।
कहा गया कि सती के अंग और आभूषण जिन-जिन स्थानों पर गिरे, वे शक्ति के पावन केंद्र बन गए।
प्रत्येक शक्तिपीठ मां के अलग स्वरूप के साथ प्रेम, शक्ति, अभय, करुणा और आरोग्य का संदेश देता है।प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि मां की शक्ति केवल मंदिरों में पूजे जाने वाला स्वरूप नहीं, बल्कि वह करुणा है जो किसी के आंसू पोंछती है, वह प्रेम है जो टूटे मन को संभालता है और वह शक्ति है जो निराश व्यक्ति को फिर खड़े होने का साहस देती है।
शक्ति की सच्ची आराधना तभी है, जब उसका प्रकाश हमारे कर्मों में दिखाई दे।उन्होंने कहा कि 51 शक्तिपीठ हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देते हैं कि मानवता की सेवा, समाज के कल्याण और देश की उन्नति में हम भी अपनी भूमिका निभाएं।
भक्ति केवल मंदिर तक सीमित न रहे, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में उम्मीद बनकर उतरे।कथा में शिव तांडव स्तोत्र की महिमा का भी वर्णन किया गया।
शिव के तांडव को सृजन, परिवर्तन और ऊर्जा का प्रतीक बताते हुए कहा गया कि जीवन की कठिनाइयां मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाने का अवसर भी देती हैं।कथा के दौरान दिव्यांगजन सहित श्रद्धालु शिव नाम में लीन रहे।
किसी ने हाथ जोड़कर भोलेनाथ को नमन किया तो किसी की आंखें भक्ति से नम हो गईं। सेवा से मिले नए जीवन में जब शिव भक्ति का रंग घुला, तो लगा जैसे कथा केवल सुनी नहीं जा रही, बल्कि जीवन को भीतर तक स्पर्श कर रही है।