उदयपुर – भारत की प्राचीन परंपराओं में योग और आयुर्वेद को सर्वोत्तम स्वास्थ्य का आधार माना गया है। इसी परंपरा को जीवंत रखने और आम जनमानस तक पहुँचाने का कार्य राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय सिन्धी बाजार द्वारा लगातार किया जा रहा है। वर्ष 2007 से योगी अशोक जैन और उनकी समर्पित टीम उदयपुर के सिन्धी बाजार में जनहित में योग की अलख जगा रहे हैं।
यह पहल केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय, सिन्धी बाजार, उदयपुर में वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी वैद्य शोभालाल औदीच्य के कुशल निर्देशन में योग और आयुर्वेद के समन्वित कार्यक्रम के रूप में चल रही है। इन दोनों प्राचीन विज्ञानों का संगम आज जनस्वास्थ्य के लिए एक मिसाल बन गया है।
18 वर्षों की निरंतर सेवा – एक प्रेरक यात्रा
राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय सिन्धी बाजार का यह सफर वर्ष 2007 में शुरू हुआ। उस समय योग के प्रति जागरूकता इतनी व्यापक नहीं थी, लेकिन समिति ने बिना रुके निरंतर प्रयास कर हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया।
हर सुबह सिन्धी बाजार स्थित आयुर्वेद औषधालय के प्रांगण में योगाभ्यास आयोजित होता है, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोग सम्मिलित होते हैं। आज यह नियमित अभ्यास लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है।
सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क है। औषधालय का उद्देश्य है – स्वस्थ भारत का निर्माण और इसी सोच के साथ योग और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाना।
योग और आयुर्वेद का संगम – डॉ. शोभालाल औदीच्य का दृष्टिकोण
वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी वैद्य शोभालाल औदीच्य का मानना है:
“योग और आयुर्वेद एक-दूसरे के पूरक हैं। योग शरीर और मन को संतुलित करता है, जबकि आयुर्वेद व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार आहार, विहार और औषध का मार्गदर्शन करता है। जब दोनों का संयोजन होता है, तब हम केवल रोगमुक्त ही नहीं, बल्कि स्वस्थ और आनंदपूर्ण जीवन प्राप्त करते हैं।”
औषधालय में आने वाले रोगियों को केवल दवा नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें योगाभ्यास और दिनचर्या सुधारने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। परिणामस्वरूप, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, जोड़ों के दर्द, मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
योगाभ्यास का स्वरूप – क्या सिखाया जाता है?
पतंजलि के पूर्णकालिक योग प्रशिक्षक अशोक जैन और उनकी टीम भंवरलाल सोनी, प्रेम जैन, मंजू शर्मा, सीमा जैन, भानु बाफना द्वारा योगाभ्यास को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक ढंग से कराते हैं।
शिविर में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
सूर्य नमस्कार – रक्तसंचार बढ़ाने और लचीलापन के लिए
प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, उज्जायी
ध्यान व मंत्रजाप – मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए
चिकित्सकीय आसन – रोग विशेष के अनुसार जैसे भुजंगासन, वज्रासन, त्रिकोणासन
रोगानुसार योगासन और प्राणायाम
1. मधुमेह (Diabetes)
आसन: सूर्य नमस्कार, मण्डूकासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, धनुरासन
प्राणायाम: कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी
2. उच्च रक्तचाप (High BP)
आसन: शवासन, बालासन, सुखासन, वज्रासन
प्राणायाम: अनुलोम-विलोम, ब्रह्मरी, शीतली
3. मोटापा (Obesity)
आसन: त्रिकोणासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, चक्रासन
प्राणायाम: कपालभाति, भस्त्रिका
4. संधि-वात / गठिया (Joint Pain / Arthritis)
आसन: ताड़ासन, गोमुखासन, वज्रासन, मरजारासन
प्राणायाम: अनुलोम-विलोम
5. सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
आसन: गर्दन के हल्के व्यायाम, मकरासन
प्राणायाम: भ्रामरी, उज्जायी
6. अस्थमा और श्वसन रोग
आसन: भुजंगासन, मत्स्यासन, अर्धचक्रासन
प्राणायाम: अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, कपालभाति
7. तनाव और अवसाद (Stress & Depression)
आसन: शवासन, सुखासन, योग निद्रा
प्राणायाम: नाड़ी शोधन, भ्रामरी, ओम
8. थायराइड समस्याएं
आसन: सर्वांगासन, मत्स्यासन, हलासन
प्राणायाम: उज्जायी, नाड़ी शोधन
साथ ही, प्रतिभागियों को ऋतु और प्रकृति के अनुसार आहार-विहार का मार्गदर्शन भी दिया जाता है।
ऋतु के अनुसार आहार-विहार – आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
ग्रीष्म ऋतु (गर्मी): इस मौसम में शरीर को ठंडक की आवश्यकता होती है। इसलिए ठंडे और रसयुक्त फलों का सेवन करें जैसे तरबूज, खरबूज, साथ ही छाछ और शीतल जल का उपयोग करें। तैलीय और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए।
वर्षा ऋतु (बरसात): बरसात के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर होती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। उबला हुआ पानी पीना लाभदायक है। कच्चे सलाद और अधिक तैलीय भोजन से परहेज करना चाहिए।
शरद ऋतु (पतझड़): इस ऋतु में घी युक्त भोजन और मौसमी फलों का सेवन करना हितकारी है। खट्टे पदार्थों का सेवन अधिक न करें।
हेमंत ऋतु (सर्दी): सर्दी के मौसम में पौष्टिक और घी-दूध युक्त भोजन करना चाहिए। ठंडी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
वसंत ऋतु: वसंत ऋतु में हल्का भोजन करना चाहिए जो कम तेल और मसालों वाला हो। भारी और तैलीय भोजन से बचना चाहिए।
शीतकाल: इस ऋतु में ऊर्जावान भोजन करना आवश्यक है। दालें, मेवे और पौष्टिक आहार लें। ठंडे पेय पदार्थों का सेवन न करें।
सामाजिक प्रभाव – हजारों लोग लाभान्वित
पिछले 18 वर्षों में इस अभियान ने हजारों लोगों को रोगमुक्त और स्वस्थ जीवन प्रदान किया है।
कोविड काल में भी समिति ने ऑनलाइन योग सत्रों के माध्यम से सेवा जारी रखी। यह समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
आगामी योजनाएं
विशेष योग-अभ्यास सप्ताह – मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप के लिए
संयुक्त योग-आयुर्वेद परामर्श शिविर
स्कूलों में योग प्रचार अभियान – बच्चों में योग की आदत डालना