उदयपुर। आमतौर पर रक्त आधान के दौरान आवश्यकता से अधिक प्लाज्मा (FFP) रोगी को चढ़ा दिया जाता है, जिससे अपेक्षित लाभ कम और संभावित नुकसान अधिक हो सकता है। इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से सरल ब्लड सेंटर ने अत्याधुनिक क्रायो प्रेसिपिटेट मशीन स्थापित की है, जिससे रक्त के प्रत्येक घटक (कम्पोनेंट) को अलग-अलग कर केवल आवश्यक कम्पोनेंट ही रोगी को दिया जा सके।
इस संदर्भ में “क्रायो प्रेसिपिटेट” की बढ़ती उपयोगिता विषय पर सरल ब्लड सेंटर सभागार में शहर के प्रख्यात चिकित्सकों की उपस्थिति में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला सितंबर 2025 में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला “ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में प्रगति” में हुए गहन विचार-विमर्श के क्रियान्वयन एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से आयोजित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत में सरल संस्था के मानद सचिव सीए (डॉ) श्याम एस. सिंघवी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि पिछले 17 वर्षों से संचालित सरल ब्लड सेंटर को दक्षिणी राजस्थान का प्रथम ऐसा ब्लड सेंटर होने का गौरव प्राप्त है, जिसे क्रायो प्रेसिपिटेट सहित सभी प्रकार के रक्त कम्पोनेंट्स तैयार करने का लाइसेंस मिला है। इसके लिए संस्था द्वारा रेमीमेक कंपनी का अत्याधुनिक थॉइंग बाथ उपकरण भी क्रय किया गया है।
उन्होंने कहा कि एफएफपी के अनावश्यक उपयोग के कारण कई बार ऐसे फैक्टर्स भी रोगी के शरीर में चले जाते हैं जिनकी आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वे नुकसान का कारण बन सकते हैं। इसके विपरीत क्रायो प्रेसिपिटेट अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प है। उन्होंने ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ नरेंद्र मोगरा एवं उनकी पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए चिकित्सकों से इसके अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया।
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ नरेंद्र मोगरा ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि क्रायो प्रेसिपिटेट में फाइब्रिनोजन, कोएगुलेशन फैक्टर VIII व XIII, वॉन विलेब्रांड फैक्टर तथा फाइब्रोनेक्टिन प्रचुर मात्रा में होते हैं, जबकि प्रोटीन की मात्रा कम होती है। इसकी कुल मात्रा मात्र 15 मिलीलीटर होती है।
उन्होंने बताया कि इसका उपयोग अत्यधिक रक्तस्राव, डीआईसी, सर्जिकल व एक्सीडेंटल ट्रॉमा तथा किडनी फेलियर जैसी स्थितियों में अत्यंत लाभकारी है।
डॉ मोगरा ने स्पष्ट किया कि एफएफपी की लगभग 180 मिलीलीटर मात्रा शरीर में जाने से बच्चों व वृद्ध मरीजों में सर्कुलेटरी ओवरलोड का खतरा बढ़ जाता है, जबकि क्रायो प्रेसिपिटेट में यह जोखिम नहीं होता। साथ ही इसकी लागत भी कम होती है और कम मात्रा होने के कारण ABO अनुकूलता की भी आवश्यकता नहीं रहती।
संस्था के सह-सचिव संयम सिंघवी ने बताया कि इस चर्चा में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ बी.एस. बंब, रक्त चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ संजय प्रकाश, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ सचिन जैन, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ एन.के. जोशी, डॉ कल्पेश चौधरी एवं डॉ विनोद पोरवाल ने अपने विचार रखते हुए क्रायो प्रेसिपिटेट के अधिकाधिक उपयोग पर बल दिया तथा सरल ब्लड सेंटर के इस अभिनव प्रयास की सराहना की।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि सरल संस्था की पहचान उसके सेवारत कर्मियों का दीर्घकालीन जुड़ाव है। कार्यक्रम के दौरान लंबे समय से सेवाएं दे रहे चिकित्साधिकारी डॉ सुरेश डांगी एवं डॉ प्रांशु शर्मा को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
अंत में उपस्थित सभी अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
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