उदयपुर | जनमत मंच के तत्वाधान में "राष्ट्रीय समुद्र दिवस" की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास महावर ने जानकारी देते हुए बताया कि "राष्ट्रीय समुद्री दिवस" या "राष्ट्रीय महासागर दिवस" मनाया जाता है। यह दिवस भारत के पहले भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक पोत 'एस एस लॉयल्टी' की मुंबई बंदरगाह से लंदन तक की पहली यात्रा को याद करने के लिए मनाया जाता है जो अपरिक 05,1919 ई. को हुई थी।
यह भारत के समुद्री परिवहन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी। यह एक यादगार उपलब्धि थी, क्योंकि ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से ब्रिटेन के लिए यह पहली यात्रा थी। ब्रिटिशों के नियंत्रण वाले समुद्री मार्ग के बावजूद, भारतीयों ने इस मार्ग से यात्रा की।
अंतरमहाद्वीपीय वाणिज्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से, वर्ष 1964 ई.में पहली बार इस दिन को मनाया गया।
भारत का समुद्री इतिहास
भारत का समुद्री इतिहास ईसा पूर्व तीसरी सहस्राब्दी से शुरु होता है। उस समय सिंधु घाटी सभ्यता के भारतीय निवासियों ने मेसोपोटामिया के साथ समुद्री व्यापार संबंध स्थापित किए थे। वैदिक अभिलेखों के अनुसार, भारतीय व्यापारी या सौदागर प्रारंभ में अरब और सुदूर पूर्वी देशों के साथ व्यापार करते थे।
मौर्य वंश में नौसेना विभाग
मौर्य वंश का अध्ययन करने पर एक विशिष्ट 'नौसेना विभाग' का पता चलता है, जिसका निर्माण व्यापारिक जहाजों की देखरेख के लिए किया जाता था। इन जहाजों के माध्यम से कई भारतीय वस्तुएँ रोमन तक पहुँचती थीं। धीरे-धीरे भारत और ग्रीको-रोमन के बीच व्यापार में तेजी आई और इस प्रकार, रेशम और अन्य विलासितापूर्ण वस्तुओं के साथ-साथ मसाले मुख्य रूप से भारत से पश्चिमी दुनिया में आयात किए जाने लगे।
भारतीय जहाजरानी का उदय
समुद्री इतिहास की यह विरासत जारी रही। अनंत: इसी से भारतीय जहाजरानी का उदय हुआ, जिसने 5 अप्रैल, 1919 ई. को व्यापारिक यात्रा शुरु की( "एसएस लॉयल्टी नामक जहाज का निर्माण सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया था।") और यह जहाज मुंबई बंदरगाह से यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना हुआ।
मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने बताया कि वर्ष 1959 ई. में भारत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) का सदस्य बना। यह संगठन समुद्री संरक्षण और समुद्री जहाजों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिम्मेदार है।
साथ ही समुद्र के माध्यम से आवागमन सुरक्षित रहता है और पर्यावरण को भी बढ़ावा मिलता है। ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं वाणिज्य के लिए प्रमुख जलमार्ग प्रदान करता है एवं मत्स्य पालन, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में लाखों लोगों को रोजगार देते हैं।
इस वित्तीय वर्ष में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीताराम द्वारा ₹12.2 लाख करोड़ का बजट समुद्र और समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास हेतु दिया गया है |
राष्ट्रीय समुद्री दिवस पुरस्कार
इस शुभ दिन पर भारतीय समुद्री क्षेत्र के लिए लोगों द्वारा किए गए सभी प्रयासों को सम्मानित करने के लिए एक पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाता है। जिसमें वरुण पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इसमें भगवान वरुण की एक प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। जो प्रत्येक समुद्री यात्रा में उनके लंबे और असाधारण योगदान को सम्मानित करता है।
समुद्र या जल से संबंधित साहसिक कार्यों (जैसे नौकायन, गोताखोरी) के लिए भारत सरकार द्वारा तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (Tenzing Norgay National Adventure Award) दिया जाता है, जो सर्वोच्च पुरस्कारों में से एक है। इसमें ₹15 लाख तक की नकद राशि शामिल है। यह अर्जुन पुरस्कार के समकक्ष माना जाता है।
मंच के सहायक सचिव विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि - समुद्र के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना करना भी कठिन है। समुद्र पृथ्वी की जीवन-रक्षक प्रणाली है, जो 70% से अधिक ऑक्सीजन प्रदान करता है। यह विशाल कार्बन सिंक (carbon sink) के रूप में जलवायु को नियंत्रित करता है, वैश्विक तापमान को संतुलित रखता है, और भोजन (मछली), परिवहन (90% व्यापार) व आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में मानव सभ्यता के लिए आवश्यक है।
इस अवसर पर डॉ. कुणाल आमेटा ने बताया कि समुद्र में तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य खनिज संसाधनों का अपार भंडार है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
समुद्र केवल पानी का विशाल निकाय नहीं है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका संरक्षण किया जाना अति आवश्यक है।
Udaipur
राष्ट्रीय "समुद्र दिवस" का ऐतिहासिक महत्व - डॉ. श्रीनिवास महावर
Related stories
Tiranga is my life, my pride, and the identity of my nation.
The Tiranga… is not merely a piece of cloth in three colours. It is the living embodiment of the blood that h…
Sai Tirupati University Celebrates 80th Independence Day with Patriotic Fervor
Udaipur: Sai Tirupati University, Umarda, celebrated the 80th Independence Day with enthusiasm and patriotic…
साईं तिरुपति विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से आयोजित
उदयपुर। उमरड़ा स्थित साईं तिरुपति विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास, अति उत्साह और द…
A Unique Initiative to Reconnect with Roots
Jaipur, To emotionally connect the new generation of wealthy business families born in the country's major me…