उदयपुर निकाय चुनाव: आरक्षण लॉटरी के बाद भाजपा-कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल

उदयपुर। आगामी निकाय चुनावों को लेकर जयपुर में हुई आरक्षण लॉटरी के बाद उदयपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उदयपुर नगर निगम महापौर पद अनारक्षित होने के साथ भींडर नगर पालिका और सलूंबर नगर परिषद के अध्यक्ष पद भी अनारक्षित घोषित किए गए हैं। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।

अनारक्षित सीट होने से अब किसी भी वर्ग का प्रत्याशी महापौर पद की दौड़ में शामिल हो सकता है। हालांकि महापौर बनने की पहली सीढ़ी पार्षद का चुनाव जीतना होगी। ऐसे में अब सभी संभावित दावेदारों की निगाह वार्ड आरक्षण की आगामी लॉटरी पर टिकी है।

10 नए वार्डों ने बदला चुनावी गणित

उदयपुर नगर निगम में इस बार 10 नए वार्ड जुड़ने और परिसीमन के कारण शहर का चुनावी नक्शा बदल गया है। कई कॉलोनियां और क्षेत्र एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शामिल हुए हैं। ऐसे में लंबे समय से किसी विशेष वार्ड में राजनीतिक पकड़ रखने वाले नेताओं के सामने भी नए मतदाताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी।

महापौर पद के दावेदारों के लिए पार्टी टिकट के साथ-साथ सही और जीतने योग्य वार्ड का चयन भी महत्वपूर्ण हो गया है।

भाजपा में कई नाम चर्चा में

उदयपुर में भाजपा का लंबे समय से मजबूत राजनीतिक आधार रहा है। महापौर पद अनारक्षित होने के बाद भाजपा में कई नामों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इनमें प्रमोद सामर, पारस सिंघवी, अतुल चंडालिया, नानालाल बया, रामकृपा शर्मा, यशवंत आंचलिया, जिनेन्द्र शास्त्री, हरीश राजानी, पिंकी मांडावत और अलका मूंदड़ा के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में बताए जा रहे हैं।

हालांकि पार्टी टिकट का अंतिम फैसला संगठनात्मक पकड़, चुनावी जीत की संभावना, वार्ड आरक्षण, सामाजिक एवं क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किए जाने की संभावना है।

कांग्रेस को सत्ता वापसी की उम्मीद

कांग्रेस के लिए अनारक्षित महापौर सीट शहर की सत्ता में वापसी का एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। कांग्रेस खेमे में भी संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

फतह सिंह राठौड़, गोपाल कृष्ण गोपजी, पंकज शर्मा, अरुण टांक, अजय पोरवाल, के.के. शर्मा और दिनेश श्रीमाली सहित कई नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं।

दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि टिकट का अंतिम निर्णय संगठन ही करेगा और जीत की संभावना सबसे महत्वपूर्ण आधार होगी।

जिला प्रमुख पद पर भी नई तस्वीर

निकाय चुनाव के साथ ग्रामीण राजनीति में भी आरक्षण की तस्वीर बदलने से नए समीकरण बन रहे हैं। जिला प्रमुख पद अनारक्षित होने के बाद अब किसी भी वर्ग का प्रत्याशी इस पद के लिए दावेदारी कर सकता है।

कांग्रेस खेमे में पूर्व उप प्रमुख लक्ष्मी नारायण पंड्या का नाम भी जिला प्रमुख पद के संभावित दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। स्थानीय ग्रामीण राजनीति और पूर्व में उप प्रमुख के रूप में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें कांग्रेस के संभावित मजबूत चेहरों में माना जा रहा है।

हालांकि अभी किसी भी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है और वार्ड आरक्षण तथा पार्टी की रणनीति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

भाजपा का छह बोर्ड का इतिहास

उदयपुर नगर निगम की राजनीति में भाजपा का लंबे समय से दबदबा रहा है। अब तक भाजपा के छह बोर्ड बन चुके हैं। किरण माहेश्वरी, युधिष्ठिर कुमावत, रवीन्द्र श्रीमाली, रजनी डांगी, चन्द्रसिंह कोठारी और जी.एस. टांक महापौर रह चुके हैं।

2026 में महापौर पद अनारक्षित होने के बाद भाजपा अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस शहर की सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगाने की तैयारी में है।

ग्रामीण क्षेत्र में भी बड़ा मुकाबला

सलूंबर के जिला बनने और उदयपुर से सटी पेराफेरी पंचायतों के अलग होने के बाद जिले का राजनीतिक और भौगोलिक गणित बदल चुका है। उदयपुर जिले में 20 पंचायत समितियां, 590 ग्राम पंचायतें और 318 पंचायत समिति वार्ड हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 13.78 लाख से अधिक है।

ऐसे में जिला प्रमुख से लेकर पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर तक चुनावी समीकरण महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

अगली लॉटरी पर टिकी निगाहें

फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर वार्ड आरक्षण की अगली लॉटरी पर है। इसके बाद ही संभावित प्रत्याशियों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

महापौर पद और जिला प्रमुख पद अनारक्षित होने से दावेदारों की संख्या बढ़ना तय है। अब दोनों दलों के सामने चुनौती होगी कि वे जीतने वाले चेहरे, सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन और संगठनात्मक समीकरण के बीच सही उम्मीदवार का चयन कैसे करते हैं।

उदयपुर में इस बार चुनाव केवल महापौर की कुर्सी की लड़ाई नहीं, बल्कि शहर और ग्रामीण क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने की बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।