उदयपुर। स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ पर राष्ट्र मंदिर–नवलखा महल सांस्कृतिक केंद्र, गुलाब बाग में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्र में आयोजित विविध कार्यक्रमों में बुजुर्गों से लेकर युवाओं, किशोरों और बच्चों तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे दिन नवलखा महल परिसर राष्ट्रभक्ति के नारों, तिरंगे और देशप्रेम की भावनाओं से सराबोर रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य के नेतृत्व में गुलाब बाग के मुख्य द्वार से नवलखा महल तक निकाली गई भव्य तिरंगा रैली से हुआ। हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में लोगों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष के साथ रैली में भाग लिया।

इसके पश्चात वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखंड वंदे मातरम् गायन किया गया। गायन के पश्चात न्यास अध्यक्ष अशोक आर्य ने राष्ट्रध्वज का ध्वजारोहण किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

मातंगिनी हाजरा और कनकलता बरुआ का उदाहरण देकर युवाओं को दिया संदेश अपने संबोधन में अशोक आर्य ने वंदे मातरम् के राष्ट्रीय आंदोलन में रहे ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक गीत किस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना का केंद्रीय स्वर बन गया, इसका उदाहरण वंदे मातरम् है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को यह समझना होगा कि भारत की स्वतंत्रता सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई, बल्कि इसके लिए असंख्य वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं मातंगिनी हाजरा और कनकलता बरुआ का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर 73 वर्षीय मातंगिनी हाजरा थीं और दूसरी ओर मात्र 17 वर्ष की कनकलता बरुआ।

दोनों ने तिरंगा हाथ में लेकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध मार्च किया। पुलिस की गोलियों का सामना करते हुए भी उन्होंने तिरंगे को अपने हाथ से नीचे नहीं गिरने दिया।

मातंगिनी हाजरा गोली लगने के बाद भी तिरंगा ऊंचा रखे रहीं और कनकलता बरुआ ने भी प्राणोत्सर्ग तक ध्वज को नहीं छोड़ा।

अशोक आर्य ने कहा कि इन वीरों का जज्बा हमें निरंतर यह स्मरण कराता है कि आजादी बड़ी कीमत चुकाकर मिली है और स्वतंत्र भारत की स्वतंत्रता, एकता एवं गौरव की रक्षा करना अब हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया।

नवलखा महल बना राष्ट्रभक्ति और संस्कारों का जीवंत केंद्र उन्होंने कहा कि नवलखा महल सांस्कृतिक केंद्र केवल दर्शनीय स्थल नहीं, बल्कि मानव निर्माण और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाला केंद्र है। यहां भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, संस्कारों और महापुरुषों की जीवनगाथाओं को विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इसी कड़ी में प्रसिद्ध दानवीर महाशय राजीव गुलाटी के सहयोग से निर्मित सिलिकॉन म्यूजियम विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

यहां देश के 18 महान क्रांतिकारियों की अत्यंत जीवंत प्रतिमाएं दर्शकों को इतिहास के उस कालखंड में ले जाती हैं, जहां वे इन अमर बलिदानियों के त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को मानो प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।

निःशुल्क प्रवेश पर उमड़े हजारों दर्शक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र मंदिर नवलखा महल सांस्कृतिक केंद्र में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क रखा गया।

प्रातः 10 बजे से सायं 6 बजे तक बड़ी संख्या में दर्शक यहां पहुंचे। विभिन्न प्रकल्पों का अवलोकन करने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रियाएं अत्यंत उत्साहजनक रहीं।

अनेक दर्शकों ने इसे “अद्भुत, आश्चर्यजनक और प्रेरणादायक” बताते हुए कहा कि प्रत्येक भारतीय को यहां एक बार अवश्य आना चाहिए।1500 दर्शकों ने आज नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र का अवलोकन किया।

बुजुर्ग, प्रौढ़, युवा, किशोर और बच्चे—हर आयु वर्ग के लोगों के लिए केंद्र में प्रेरणा के अनेक स्रोत मौजूद रहे।

आजाद भारत थ्रू माय लेंस’ में शिवानी शर्मा प्रथम स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न्यास की ओर से ‘आजादी थ्रू माय लेंस’ फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में मुंबई की शिवानी शर्मा ने प्रथम, जयपुर के अजय पारीख ने द्वितीय तथा उदयपुर के संजय धाकड़ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इनको प्रमाण पत्र और सत्यार्थ प्रकाश प्रेषित किया जा रहा है।

न्यास के मंत्री श्री भवानी दास आर्य ने पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की। न्यास के कोषाध्यक्ष श्री नारायण मित्तल ने सभी प्रतिभागियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संविधान ज्ञान परीक्षा इससे पूर्व स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर न्यास की ओर से श्रीमती दुर्गा गौरमात, दिव्येश सुथार एवं सिद्धम आर्य के नेतृत्व में गुलाब बाग भ्रमण करने वाले नर नारियों के मध्य संविधान विषयक परीक्षा का आयोजन किया गया।

इसमें प्रतिभागियों से भारतीय संविधान और उससे संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर उनके ज्ञान का परीक्षण किया गया। सभी विजेता प्रतिभागियों को न्यास की ओर से महर्षि दयानंद सरस्वती का अमर ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पारितोषिक के रूप में भेंट किया गया।

युवाओं और कर्मचारियों ने संभाली व्यवस्थाएं समूचे कार्यक्रम की व्यवस्थाएं न्यास के स्टाफ द्वारा व्यवस्थापक श्री भंवरलाल गर्ग के नेतृत्व में तथा नवलखा महल के युवा प्रकोष्ठ द्वारा श्रीमती ऋचा पीयूष के नेतृत्व में सुव्यवस्थित रूप से की गईं।

कार्यक्रम के दौरान आगंतुकों की सुविधा, प्रवेश, विभिन्न प्रकल्पों के दर्शन तथा अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विशेष प्रबंध किए गए।

सहयोगियों में श्री विनोद कुमार राठौर श्री रविंद्र राठौर सुश्री सृष्टि राठौर भास्कर मित्तल, मितिशा मित्तल, जयेश आर्य, सुभाष गुप्ता, नवनीत आर्य, करण मेनारिया, रेखा गमेती, यशवंत मीणा , देवीलाल पारगी, लक्ष्मण खराड़ी, निरमा, विकास उल्लेखनीय हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर नवलखा महल में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि जब इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और संस्कारों को जीवंत रूप में समाज के सामने प्रस्तुत किया जाता है तो हर आयु वर्ग उससे जुड़ता है।

राष्ट्र मंदिर नवलखा महल ने स्वतंत्रता दिवस पर एक बार फिर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त संदेश दिया।