उदयपुर। भारत सरकार की प्रमुख पहल ’’सहकार से समृद्धि’’ के आधारभूत स्तंभ ’सहकारिता में सहकार’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन दी उदयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रताननगर स्थित प्रधान कार्यालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, गुंजन चौबे ने की। जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) नाबार्ड, नीरज यादव मुख्य अतिथि रहे।
आरंभ में श्री उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, उदयपुर लोकेश जोशी ने ’सहकार से समृद्धि’ की संकल्पना पर प्रकाश डाला। श्री जोशी ने बताया कि ’सहकार से समृद्धि की विभिन्न योजनाएं न केवल विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियों को वित्तीय रूप से सक्षम होने में सहायता करती है वरन यह सामाजिक विकास के ढांचे को भी मजबूत बनाती है। श्री जोशी ने सहकार से समृद्धि योजना की कुछ पहलों को विशेष रूप से उल्लेखित करते हुए प्रतिभागियों से उन योजनाओं के अन्तर्गत लाभान्वित होने की अपील की।
वरिष्ठ बैंक प्रबंधक वैभव गौड ने ’सहकारिता में सहकार’ पहल की पृष्ठभूमि एवं मानक संचालन प्रक्रिया से अवगत करवाया।  श्री गौड ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सक्षम प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों को बैंक मित्र के रूप में नियुक्त कर उन्हें माईक्रो एटीएम उपलब्ध करवाना है, ताकि यह बैंक मित्र सहकारिता की भावना को आमजन तक पहुँचाने में सहायक हो सके।
मुख्य अतिथि श्री यादव ने ’सहकारिता में सहकार’ पहल में नाबार्ड के योगदान को रेखांकित किया। श्री यादव ने बताया कि नाबार्ड अपनी वित्तीय समावेशन योजना के तहत केन्द्रीय सहकारी बैंकों को 90 प्रतिशत अनुदान पर माइक्रो एटीएम उपलब्ध करवा रहा है, जिससे कि बैंकों के माध्यम से अधिक से अधिक डेयरी समितियों एवं ग्राम सेवा सहकारी समितियों को माइक्रो एटीएम सुविधा से लाभान्वित किया जा सके।
कम्प्यूटर प्रोग्रामर हितेश पंचाल ने बताया कि बैंक अब तक 179 सहकारी समितियों को माइक्रो एटीएम उपलब्ध करवा चुका है जिसमें से 95 डेयरी समितियां है। नाबार्ड की योजना का लाभ उठाते हुए बैंक ने 100 और माइक्रो एटीएम क्रय करने का प्रस्ताव भिजवा दिया है जो कि शीघ्र ही अन्य डेयरी समितियों को उपलब्ध करवाए जाएंगे। श्री पंचाल ने माइक्रो एटीएम की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया तथा माइक्रो एटीएम संबंधित प्रतिभागियों की समस्याओं का भी तुरंत समाधान किया। श्री पंचाल ने बताया की बैंक पूर्व में भी डेयरी समितियों को माइक्रो एटीएम के निर्बाध उपयोग हेतु कार्यशालाएं आयोजित कर चुका है, तथा आवश्यकता पडने पर भविष्य में भी इस तरह की कार्यशालाएं आयोजित की जाती रहेगी।
उदयपुर डेयरी से विशेष रूप से आमंत्रित श्रीमती वीणा खंडेलवाल ने कार्यशाला आयोजन हेतु नाबार्ड एवं बैंक को धन्यवाद दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके कार्यक्षेत्र की अधिक से अधिक डेयरी सहकारी समितियों के खाते केन्द्रीय सहकारी बैंक की शाखाओं में खोले जाएंगे। साथ ही साथ डेयरी समितियों के सचिवों को बैंक मित्र बनाकर उन्हें माइक्रो एटीएम प्रयोग में लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
अध्यक्षीय उदबोधन में अतिरिक्त रजिस्ट्रार श्रीमती गुंजन  चौबे  ने ’सहकारिता में सहकार’ के माध्यम से ’सहकार में समृद्धि’ की संकल्पना को सुदृढ़ करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता विभिन्न सहकारी समितियों एवं संस्थाओं के आपसी सहयोग पर ही निर्भर करती है, अतः उन्होने सभी डेयरी सहकारी समितियों के सचिवों को इस पहल में पूर्ण निष्ठा से जुडने एवं सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के दौरान चयनित प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किये गये तथा व्यक्तिगत कृषको को एटीएम कार्ड भी प्रदान किये गये। कार्यक्रम के अंत में प्रबंध निदेशक आशुतोष भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। श्री भट्ट ने ’सहकारिता में सहकार’ पहल में भागीदारी देने के लिए उनका उत्साहवर्धन करते हुए भविष्य में इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा की। कार्यक्रम में उदयपुर, सलूम्बर तथा राजसमन्द जिले के 70 से अधिक प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों के सचिव, उपस्थित रहे। साथ ही डाॅ मेहजबीन बानो, अधिशासाी अधिकारी बैंक, विनोद कोठारी, उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां राजसमन्द, श्री कौटिल्य भट्ट, विशेष लेखा परीक्षक, सहकारी समितियां उदयपुर एवं श्री प्रिंस गहलोत, प्रबंधक प्रशासन की सक्रिय भागीदारी रही । कार्यक्रम का मंच संचालन डाॅ धर्मेश मोटवानी ने किया।