उदयपुर | विज्ञान समिति तथा डॉ. डी.एस. कोठारी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 08.07.2026 को प्रौद्योगिकी व्याख्यानमाला के अंतर्गत "जैविक खेती एवं पौध संरक्षण" विषय पर आयोजित वार्ता में प्रो. उमाशंकर शर्मा, पूर्व कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, ने कहा कि जैविक खेती कृषि की एक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल पद्धति है। इस पद्धति में रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक विकल्पों का उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, पर्यावरण की रक्षा होती है तथा सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य पदार्थों का उत्पादन संभव होता है।
प्रो. शर्मा ने बताया कि जैविक खेती में गोबर की खाद, हरी खाद, फसल चक्र और जैविक कीट नियंत्रण जैसी प्राकृतिक विधियों का उपयोग किया जाता है। इन उपायों से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है, जल और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. के. एल. कोठारी ने की। स्वागत उद्गार (स्वागत उद्बोधन) प्रो. महीप भटनागर, अध्यक्ष—विज्ञान समिति द्वारा प्रस्तुत किया गया। वक्ता का परिचय डॉ. के. पी. तलेसरा ने दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन इंजी. आर. के. चतुर ने किया। आभार प्रदर्शन महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष रविन्द्र सुराणा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन इंजी. एम. पी. जैन, महासचिव—कोठारी संस्थान ने किया।
वार्ता में डॉ. के. एल. कोठारी, डॉ. के. एल. तोतावत, इंजी. बी. एल. खमेसरा, डॉ. बी. एल. चावत, श्री अशोक जैन, डॉ. एस. एस. पोखरणा, शांतिलाल भण्डारी, डॉ. पुष्पा कोठारी, रेणु भण्डारी, आर. सी. भटनागर, इंजी. एम. के. मेहता, इंजी. अविनाश भटनागर, मधु मित्तल, इंजी. डी. के. वर्दिया तथा महावीर इंटरनेशनल के सुरेश चन्द्र बड़ीवाल, राजकुमार नलवाया, राजेन्द्र सिंह भण्डारी, राजेन्द्र कुमार सुराणा, स्वराज जैन, कृष्णा भण्डारी सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी प्रोफ़ेसर विमल शर्मा ने दी।
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