उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आचार्य भगवान श्री आनंद ऋषि जी एवं डॉ. सुरेन्द्र मुनि के जन्मोत्सव के अवसर पर देवेंद्र धाम में धार्मिक आयोजन हुआ।

इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे और सामूहिक एकासन सहित विभिन्न धार्मिक आराधनाएं की गईं।धर्मसभा में भगवान पार्श्वनाथ के समवशरण की भव्य झांकी के समक्ष श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से ‘उवसग्गहरं स्तोत्र’ का जाप किया।

डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में भगवान पार्श्वनाथ के उपदेश और जैन धर्म के सिद्धांत मानव जीवन को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने संयम, तप, त्याग और करुणा का संदेश दिया।

उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर मनुष्य आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण की ओर बढ़ सकता है।उन्होंने कहा कि जैन मंदिरों में श्रद्धालु भगवान के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के माध्यम से अपनी भक्ति भावना प्रकट करते हैं।

जन्मोत्सव जैसे अवसर केवल उत्सव नहीं, बल्कि संतों के जीवन एवं संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम में साधु-साध्वियों, महिला मंडल एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की सहभागिता रही।

धर्मसभा में प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने संत परंपरा, तपस्या, संयम और धर्म आराधना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन संतों का जीवन त्याग, तप, सहनशीलता और आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है।

उनके मार्गदर्शन में श्रावक-श्राविकाएं धर्म के प्रति अपनी आस्था को मजबूत करते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।डॉ. राजेंद्र मुनि ने उपाध्यक्ष रमेश मुनि जी के सान्निध्य में चल रहे चातुर्मास की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं धर्म आराधना में संलग्न हैं।

इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, सामायिक, एकासन एवं तपस्याएं की जा रही हैं।धर्मसभा में श्रीमती वर्षा छाजेड़ ने 18 उपवास की दीर्घ तपस्या के प्रत्याख्यान लिए।

इस अवसर पर गणमान्यजनों का समाज की ओर से अभिनंदन किया गया। सामूहिक एकासन, सामायिक एवं अन्य धार्मिक आराधनाओं के साथ कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव से संपन्न हुआ।