उदयपुर। नाबार्ड के तत्वाधान में ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) एवं सूक्ष्म सिंचाई निधि (एमआईएफ) पर संभाग स्तरीय कार्यशाला शुक्रवार को होटल जिंजर में आयोजित हुई।

कार्यशाला की अध्यक्षता नाबार्ड के उप महाप्रबंधक राम प्रसाद शर्मा ने की।

कार्यशाला में अग्रणी जिला प्रबंधक संजय गुप्ता, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक नीरज यादव सहित लोक निर्माण विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शिक्षा, पशुपालन, उद्यानिकी एवं वन विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की।कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री शर्मा ने ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने में आरआईडीएफ एवं एमआईएफ की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन एवं पूर्णता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे इन योजनाओं के विकासात्मक प्रभाव को अधिकतम किया जा सकेगा।

नाबार्ड के अधिकारियों द्वारा दोनों योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें पात्र क्षेत्र, परियोजना मूल्यांकन के मानदंड, ऋण पात्रता संबंधी प्रावधान, स्वीकृति प्रक्रिया, संशोधित संवितरण व्यवस्था तथा निगरानी प्रणाली सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।कार्यशाला में बताया गया कि उदयपुर संभाग में वर्तमान में 2,544.16 करोड़ रूपए की आरआईडीएफ समर्थित परियोजनाएं क्रियान्वयनाधीन हैं।

इन परियोजनाओं में ग्रामीण सड़कें, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, पशुपालन, उद्यानिकी एवं वानिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

ये परियोजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ अवसंरचना के विकास तथा ग्रामीण आबादी के जीवन स्तर में सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।कार्यशाला के दौरान धीमी गति से चल रही एवं समस्याग्रस्त परियोजनाओं की विशेष रूप से समीक्षा की गई।

नाबार्ड के अधिकारियों ने संबंधित विभागों के साथ परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं पर चर्चा की।

अधिकारियों ने परियोजनाओं को समय पर धरातल पर उतारने, चरणबद्ध लक्ष्यों का पालन करने तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्र एवं पूर्णता रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने पर जोर दिया।

बैठक में भूमि अधिग्रहण, प्रक्रियात्मक बाधाओं, बजटीय सीमाओं तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों के कारण हो रहे विलंब पर भी चर्चा की गई।

संबंधित विभागों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाकर परियोजनाओं की प्रगति में तेजी लाने की सलाह दी गई।