हर वर्ष 15 अगस्त 1947 को जब देश का तिरंगा पूरे गौरव के साथ आकाश में लहराता है और राष्ट्रगान की धुन करोड़ों भारतीयों के हृदय में राष्ट्रप्रेम का संचार करती है, तब हमारा मन स्वाभाविक रूप से 1947 की उस ऐतिहासिक सुबह की ओर लौट जाता है, जब भारत ने सदियों की पराधीनता की बेड़ियां तोड़कर स्वतंत्रता प्राप्त की थी। यह स्वतंत्रता हमारे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान का परिणाम थी।

लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति तक सीमित नहीं है। आज, जब भारत अपने यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब हमारे सामने आज़ादी का एक नया अर्थ और एक नई चुनौती भी मुँह बाए खड़ी है । वह है गंदगी से आज़ादी, बीमारियों से आज़ादी, प्रदूषण से आज़ादी, जल संकट से आज़ादी और नागरिक लापरवाही से आज़ादी।

1947 में हमने पराधीनता की बेड़ियां अवश्य तोड़ी थीं लेकिन अब समय है कि हम गंदगी, बीमारी और अस्वच्छ जीवनशैली की बेड़ियों को भी तोड़ें। यही विकसित भारत के संकल्प का अगला चरण है और यही स्वतंत्रता दिवस का सच्चा संदेश भी होना चाहिए।

*आज़ादी का अगला पड़ाव—स्वच्छ और स्वस्थ भारत* हम अक्सर विकास का मूल्यांकन बड़ी सड़कों, ऊंची इमारतों, औद्योगिक निवेश और आधुनिक तकनीक से करते हैं।

निस्संदेह ये विकास के महत्वपूर्ण मानक हैं, लेकिन किसी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति का सबसे बड़ा पैमाना उसके नागरिकों का स्वास्थ्य और उनके आसपास का स्वच्छ वातावरण है।यदि किसी गरीब परिवार की वर्षों की बचत बीमारी के इलाज में चली जाए, यदि दूषित पानी या गंदगी के कारण बच्चे बीमार पड़ें, यदि अस्वच्छ वातावरण के कारण कामकाजी लोगों की उत्पादकता प्रभावित हो, तो विकास की तस्वीर अधूरी रह जाती है।

बीमारी पर खर्च होने वाला पैसा केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी बोझ डालता है। इसके विपरीत, स्वच्छता पर किया गया प्रत्येक निवेश भविष्य के स्वास्थ्य खर्च को कम करने की दिशा में एक बड़ा महत्त्वपूर्ण निवेश है।

बचा हुआ धन शिक्षा, कौशल, रोजगार, पोषण और बेहतर जीवन स्तर पर लगाया जा सकता है।इसलिए स्वच्छता केवल सफाई का विषय नहीं है बल्कि यह स्वच्छता ,स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और राष्ट्र निर्माण का विषय है।

*स्वच्छ भारत से स्वच्छ राजस्थान की ओर* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन देश में स्वच्छता को सरकारी कार्यक्रम की सीमा से बाहर निकालकर जन-आंदोलन बनाने की ऐतिहासिक पहल है।

इस अभियान ने देश के करोड़ों नागरिकों को यह अहसास कराया है कि स्वच्छता केवल नगर निकायों या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में इसी भावना को और व्यापक स्वरूप देने का प्रयास हो रहा है।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि स्वच्छ शहर, स्वस्थ नागरिक और हरा-भरा राजस्थान ही विकसित राजस्थान की मजबूत नींव हैं।

स्वच्छता का लक्ष्य केवल कागजों पर उपलब्ध आंकड़ों में नहीं, बल्कि शहरों और गांवों की गलियों में दिखाई देना चाहिए। कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन हो, घर-घर से कचरा संग्रहण प्रभावी हो, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण हो, सार्वजनिक स्थान स्वच्छ रहें, नालियां साफ रहें, जल स्रोत सुरक्षित रहें और नागरिक स्वच्छता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं—यही वास्तविक सफलता है।

*डूंगरपुर ने दिखाया—छोटा शहर भी बड़ा बदलाव ला सकता है* दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर में नगर परिषद सभापति के रूप में काम करने का अवसर मेरे लिए केवल एक प्रशासनिक अनुभव नहीं, बल्कि स्वच्छता और नागरिक भागीदारी की शक्ति को समझने का महत्वपूर्ण अवसर भी रहा।डूंगरपुर जैसे शहर ने यह साबित किया कि बदलाव केवल बड़े महानगरों में ही संभव नहीं है।

यदि राजनीतिक नेतृत्व की इच्छाशक्ति, प्रशासन की सक्रियता और नागरिकों की भागीदारी एक साथ जुड़ जाए तो छोटा शहर भी देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।स्वच्छता और जल संरक्षण के क्षेत्र में डूंगरपुर के अनुभव ने मुझे यह विश्वास दिया कि भारत के प्रत्येक शहर में परिवर्तन की अपार संभावनाएं हैं।

आवश्यकता केवल मात्र बड़ी बड़ी योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने वाली प्रशासनिक और नागरिक प्रतिबद्धता की है।यही कारण है कि स्वच्छ भारत मिशन से मेरा जुड़ाव मेरे लिए किसी पद या दायित्व से अधिक एक सामाजिक जिम्मेदारी है।

*राजस्थान के 41 जिलों की यात्रा—समीक्षा से समाधान तक* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन के प्रति मेरी सक्रिय भूमिका को देखते हुए मुझे राजस्थान में तीसरी बार स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) का ब्रांड एम्बेसडर बनने का अवसर मिला है।

यह सम्मान जितना गर्व का विषय है, उससे कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी भी है।पिछले कई महीनों से मैं मुख्यमन्त्री भजन लाल शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान के सभी 41 जिलों का दौरा और समस्त स्थानीय निकायों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बैठकें कर स्वच्छता अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहा हूं।

जहां कमियां दिखाई देती हैं, वहां उन्हें दूर करने के लिए सम्बंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को पाबन्द किया जा रहा है । यह यात्रा केवल अधिकारियों के साथ बैठकों तक सीमित नहीं है।

मेरा प्रयास है कि जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया जाए।

अब दूसरे चरण की बैठकों का क्रम भी शुरू हो चुका है। मेरा उद्देश्य स्पष्ट है—स्वच्छता के लक्ष्य फाइलों और रिपोर्टों में नहीं, बल्कि राजस्थान की हर गली और हर मोहल्ले में दिखाई दें।

*स्वच्छता का सबसे बड़ा सैनानी —नागरिक स्वयं* हम सरकार से यह अपेक्षा नहीं कर सकते कि वह हमारे घर के बाहर सफाई करने के साथ-साथ हमारी आदतें भी बदल दे। नगर निकाय कचरा उठा सकता है, लेकिन नागरिक कचरा सड़क पर न फेंके—यह निर्णय नागरिक को स्वयं लेना होगा।सरकार नालियां बना सकती है, लेकिन उनमें प्लास्टिक और कचरा न डालने का संकल्प समाज को लेना होगा।

सरकार जल संरक्षण की योजनाएं बना सकती है, लेकिन पानी की एक-एक बूंद बचाने की आदत परिवारों को विकसित करनी होगी।यही कारण है कि स्वच्छता का सबसे बड़ा सैनानी कोई सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि स्वयं जागरूक नागरिक ही है।

यदि प्रत्येक भारतीय केवल इतना संकल्प ले ले कि “न गंदगी करूंगा, न करने दूंगा”, तो स्वच्छ भारत अभियान एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर भारत की जीवनशैली बन जाएगा।

*स्वच्छता और जल संरक्षण—दोनों एक ही लड़ाई के हिस्से* स्वच्छता को केवल कचरा उठाने तक सीमित करना भी सही नहीं होगा। स्वच्छता का संबंध हमारे जल स्रोतों, पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों को सँवारने से भी है।दूषित जल बीमारी का कारण बनता है।

जल स्रोतों में कचरा डालना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। प्लास्टिक प्रदूषण आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा करता है।

इसलिए स्वच्छता का अर्थ है—कचरे का उचित प्रबंधन, जल स्रोतों की रक्षा, पानी की बचत, वृक्षारोपण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नागरिक व्यवहार।जब हम अपने शहर को साफ रखते हैं, तो हम केवल वर्तमान को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित करते हैं।

*असली आज़ादी बीमारी के डर से भी मुक्ति है* स्वतंत्र भारत का सपना केवल इतना नहीं था कि देश अपना शासन स्वयं चलाए। सपना यह भी था कि प्रत्येक भारतीय सम्मान के साथ जीवन जी सके।सम्मानजनक जीवन का अर्थ है—स्वच्छ घर, स्वच्छ सड़क, स्वच्छ सार्वजनिक स्थान, सुरक्षित पेयजल, स्वस्थ पर्यावरण और बीमारी से बचाव की बेहतर व्यवस्था।

इस दृष्टि से देखा जाए तो स्वच्छता सामाजिक न्याय और मानवाधिकार का भी विषय है। गंदगी का सबसे अधिक असर समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ता है। इसलिए स्वच्छ भारत वास्तव में एक अधिक समान और सम्मानजनक भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

*15 अगस्त पर लें एक नया संकल्प* 15 अगस्त केवल उत्सव का दिन नहीं है। यह आत्ममंथन और संकल्प का भी दिन है। इस वर्ष जब हम तिरंगे को सलाम करें, तो उसके साथ अपने शहर, अपने गांव और अपने मोहल्ले को भी स्वच्छ रखने का संकल्प भी लें।

हम संकल्प लें—कि हम कचरा इधर-उधर नहीं फेंकेंगे।गीले और सूखे कचरे को अलग करेंगे।पानी की एक-एक बूंद का सम्मान करेंगे।सार्वजनिक स्थानों को अपना समझकर उनकी स्वच्छता बनाए रखेंगे।

प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग से बचेंगे। पेड़ लगाएंगे और पर्यावरण की रक्षा करेंगे।

और सबसे महत्वपूर्ण—गंदगी करने वाले को रोकने का साहस भी दिखाएंगे। डूंगरपुर में हमने घर और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के सामने कचरा डालने वालों पर जुर्माना लगाया था जिससे बहुत बड़ा परिवर्तन आया ।

हमने नगर की प्राचीन बावड़ियों की सफाई और जीर्णोद्धार कर नगर में पेयजल आपूर्ति के नए स्त्रोत विकसित किए थे । वर्षा जल के बचाव के लिए घरों में टंकिया बनवा और आसपास की ज़मीन में खड्डे खुदवा उसे छतों के पाइपों से जोड़ा था।

उसके अभूतपूर्व परिणाम दिखें थे और वर्षों से सूखे हैण्ड पम्प भी चार्ज हो गए थे। पर्यावरण सुधार के लिए पोधारोपण, संग्रहित कचरा से बायोगैस प्लांट में बिजली उत्पादन,गोबर गैस प्लांट आदि अनेक प्रयोग और नवाचार किये गए थे ।

राष्ट्रभक्ति केवल सीमा पर खड़े सैनिक का कर्तव्य नहीं है। राष्ट्रभक्ति उस नागरिक के व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए जो अपने शहर को साफ रखता है, पानी बचाता है, पेड़ लगाता है और सार्वजनिक संपत्ति को अपनी संपत्ति समझकर उसकी रक्षा करता है।

*विकसित भारत की मजबूत नींव* भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की थी । आज हम आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों से पूरा नहीं होगा।इसके लिए स्वस्थ नागरिक चाहिए।स्वच्छ शहर चाहिए।सुरक्षित पर्यावरण चाहिए।जागरूक समाज चाहिए और ऐसी नागरिक संस्कृति चाहिए जिसमें स्वच्छता किसी अभियान की मोहताज न हो।

राजस्थान इस दिशा में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में स्वच्छ, स्वस्थ और हरियालों राजस्थान का जो संकल्प आगे बढ़ रहा है, उसकी सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब सरकार के प्रयासों के साथ समाज की इच्छाशक्ति भी जुड़े।मैं राजस्थान के सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और विशेषकर युवाओं से इस स्वतंत्रता दिवस पर आह्वान करता हूं कि वे स्वच्छता को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे अपने जीवन का संस्कार बनाएं।

आइए, इस 15 अगस्त को तिरंगे के सामने एक ऐसा संकल्प लें जो आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर भारत दे।1947 में हमने पराधीनता की बेड़ियां तोड़ी थीं।अब हमें गंदगी, बीमारी और लापरवाही की बेड़ियां तोड़नी हैं।

यही अमृतकाल का सच्चा संकल्प है।

यही विकसित भारत की मजबूत नींव है। और यही स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।क्योंकि असली आज़ादी तभी होगी, जब भारत स्वच्छ होगा, भारत स्वस्थ होगा और हर नागरिक जागरूक होगा।हम स्वाधीनता दिवस पर यह संकल्प लें कि हम न गंदगी करेंगे, न करने देंगे। स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत ही सशक्त भारत है।