उदयपुर। सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा ही नहीं है, इसलिए केवल हंगामा खडा कर पूरे सत्र में सदन को नहीं चलने दिया।

विपक्ष बार-बार अपना रवैया और प्रश्न बदलता रहा और पलायन करते रहे।

सरकार ने अपनी ओर से हर आरोप का जवाब देने का पूरा यत्न किया, लेकिन विपक्ष हंगामा करता रहा, या भागता रहा।गुरुवार को ही लोकसभा सत्र पूरा होने के बाद आज उदयपुर पहुंचे सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि इस सत्र में वंदे मातरम को लेकर महत्वपूर्ण बिल लाया गया। युवाओं को लेकर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट वक्तव्य दिया है और नकल विरोधी बिल भी लाया गया।

एनटीए के पुनर्गठन को लेकर भी बिल लाया गया। डेटा संरक्षण को एआई से जोडकर तैयार करने के लिए एक बिल पारित किया।

एफसीआरआई बिल को भी जेपीसी को भेजा गया है। यह बिल इसलिए महत्वूपूर्ण है कि विदेशों से जो पैसा आता है वह पारदर्शी हो तथा लोकतांत्रिक हो।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण बिल लेकर आई, लेकिन विपक्ष इन्हें हंगामा खडा कर रोकने के प्रयास करता रहा।

डॉ रावत ने जलजीवन मिशन पर चर्चा करते हुए कहा कि हर घर शुद्द जल पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलजीवन मिशन 2.0 घोषित किया है और इस योजना को 2028 तक विस्तारित किया है, जबकि कांग्रेस की सरकार में इस योजना में भी घोटाले किए गए जिसके कारण मंत्री स्तर का एक नेता अभी तक जेल में है।

उन्होंने बताया कि फ्री टेड को लेकर प्रजेन्टेशन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दिया और इससे जाहिर होता है कि हमारे देश की इकॉनोमी कितनी तेज रफृतार से आगे बढ रही है।

आंकडों की बात करें तो 2014 तक फ्री टेड को लेकर जो एग्रीमेंट हुए थे उनकी संख्या सिर्फ 10 थी और यह 10 टिलीयन इकॉनोमी को लेकर थी, लेकिन 2014 के बाद फ्री टेड को लेकर जो एग्रीमेंट हुए है वो जीडीपी की 60 टिलीयन डॉलर को लेकर वैश्विक स्तर पर है जो छह गुना ज्यादा है।

यह विकसित भारत के अनुरुप तेेजी से आगे बढ रहा है।बीएपी के सांसद सिर्फ कांग्रेस के पिछलग्गूउन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेेस के नेता तो कई गलतियां करते ही हैं, लेकिन बीएपी के डूगरपुर-बांसवाडा के सांसद ने भी कांग्रेस के पिछलग्गू की तरह ही नीति को अपनाया।

उनका उद्देश्य क्षेत्र की जनता के लिए काम करना होना चाहिए, लेकिन उनकी अब तक की जो नीति रही है वह समाज में अस्मिता विरोधी चेहरा रहा है। पूजा क्या होती है, धर्म क्या होता है और लोगों की संस्कृति पर वे आक्रमण करते नजर आते है।

उनका चर्च प्रेरित जो एजेंडा है, विशेष तौर पर धर्म कोड को लेकर और संविधान की गलत व्याख्या को लेकर उन्ही बातों को लेकर चलते हैं।नक्सलवादियों के साथ खडे देखे गए बीएपी सांसदसांसद डॉ रावत ने कहा कि कांग्रेेस ने नक्सलवादियों के प्रति सहानुभूति दिखाई उसी तरह बांसवाडा के सांसद भी नक्सलवादियों के साथ में खडे देखे गए।

जब नक्सलवादी हिडमा का एनकाउंटर हुआ तब उनके साथ खडे देखे गए। इनका राष्टीय प्रवक्ता जितेंद्र तो हर घर में हिडमा निकलेगा-कितने हिडमा मारोगो ऐसे नारे लगाते हुए इंडिया गेट पर देखे गए थे।

ये सब इकोसिस्टम है जो क्षेत्र में शांति विरोधी है। ये लोग युवाओं के प्रश्न पर भी सामने नहीं आते।

चर्चा करने की बात होती है तो पलायन कर जाते हैं।बीएपी सांसद की यूएन यात्रा ने लक्ष्मण रेखा को लांघासांसद डॉ रावत ने हाल में बांसवाडा सांसद की यूएन यात्रा पर कहा कि एक सांसद को पूरी अनुमति सरकार से लेकर जाना चाहिए और देश के बाहर क्या बोलना है यह भारत की संप्रभुता के अपने प्रश्न है।

उनके दायरे में रखकर बोलना पडता है, लेकिन डूंगरपुर-बांसवाडा सांसद इन सब लक्ष्मण रेखाओं को लांघते हुए देखे गए और देश के मूल निवासी को लेकर जो एक लाइन बनाई गई उसको तोडना बहुत खतरनाक जैसा है।

यह संविधान विरोधी है इसके दायरे से बाहर जाने वाला अत्यंत खतरनाक कदम है।

एक प्रश्न पर रावत ने कहा कि डूंगरपुर में रोत ने मीडिया से कहा कि वे अपनी निजी यात्रा पर यूएन गए थे, जबकि एक सांसद भी निजी यात्रा पर जाता है तो उसके भी प्रोटोकोल बने हुए, नियम-उपनियम बने हुए हैं, जिस पर अनुमति लेनी होती है।राहुल गांधी को कोई गंभीरता से नहीं लेताराहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों के प्रश्न पर सांसद रावत ने कहा कि राहुल गांधी को अब कोई गंभीरता से नहीं लेते।

वे खुद अपना रवैया और प्रश्न बदलते रहते हैं। गृहमंत्री हर बात का जवाब देने के लिए तैयार थे, जबकि राहुल गांधी व विपक्ष खुद भागते रहा।

जेन जी जिज्ञासु और प्रतिभाशालीसांसद डॉ रावत ने जेन जी के प्रश्न पर कहा कि जेनजी जिज्ञासु है। डिजीटल गजेट्स के साथ उनका जन्म हुआ और आज वे एआई के दौर में है।

यह पीढी प्रतिभाशाली भी है। साथ में नए प्रश्नों को ग्लोबल तरीके से रखना चाहती है।

प्रधानमंत्री ने भी इसका संकेत किया है जो हमारे सबके लिए अनुकरणीय है। जेनजी के प्रश्न कीमती है, तर्कपूर्ण है इसलिए इसकी चिंता हमारी पीढी कर कर रही है और यह विकसित भारत की ओर से लेकर जाएगा, ऐसी संभावनाए नजर आ रही है।