उदयपुर। शहर के ब्रह्मपोल बाहर स्थित दरगाह हजरत इमरत रसूल शाह बाबा के चल रहे तीन दिवसीय 136वें उर्स का समापन रविवार सायं बाद नमाजे अस्र रंग-सलातो-सलाम, फातिहा, दुआ व कुल के छींटों के साथ हुआ।
दरगाह कमेटी के मीडिया प्रभारी मोहसिन हैदर ने बताया कि हजरत इमरत रसूल शाह बाबा के तीन दिवसीय उर्स का आगाज शुक्रवार को बाद नमाजे असर परचम कुशाई की रस्म के साथ हुआ। उर्स के चलते दरगाह परिसर में विभिन्न धार्मिक आयोजन जैसे कुरआन ख्वानी, चादर शरीफ के जुलूस, महफिले मीलाद के आयोजन किये गये जिसमें लियाकत हुसैन में नातिया कलाम पेश किए व नातख्वां हाजी चांद मोहम्मद ने नातिया कलाम के साथ-साथ मुर्शीद रूठ न जाना हम तो मर जाएंगे कलाम पढ़ा।
उर्स के इस अवसर पर दरगाह कमेटी के सदर हाजी सरवर खान, पूर्व सदर मुहम्मद यूसुफ, सेक्रेट्री शादाब खान, हाफिज मेहमूदुज्जमा, नायब सदर मुबारिक हुसैन, इमरान खान, मुबीन खान, शब्बीर खान, हाजी इक़बाल हुसैन, एडवोकेट तौकीर रज़ा, मोहम्मद शब्बीर, अमजद खान, फिरोज रंगरेज, शराफत हुसैन, आरिफ खान, मोहम्मद हैदर सहित कमेटी के सदस्यों व मौजूद जायरिनों ने चादर, फूल व इत्र पेश किए। जायरिनों में लंगर व तबर्रूक का वितरण भी किया गया।
दरगाह सदर हाजी सरवर खान व सेक्रेट्री शादाब खान ने बताया कि उर्स के तीसरे दिन कार्यक्रमों का आगाज रविवार प्रातः कुरआन ख्वानी के साथ हुआ जिसमें कलामे पाक की तिलावत की गई। दोपहर बाद नमाज जौहर महफिल समां कव्वाली का आयोजन किया गया जिसमें कव्वाल पार्टियों ने नातिया कलाम व सूफियाना कलाम पेश किए।
महफिले समां कव्वाली का आयोजन - महफिले समां का आगाज रविवार दोपहर बाद नमाजे जोहर किया गया। जिसमें कव्वाल असलम साबरी उदयपुरी ने शाहे-मर्दां है अली..., ओ पालनहारे, उस्माँ के प्यारे तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं... पढ़ा। उसके बाद हजरत इमरत रसूल बाबा की शान में जिस्त में मैंने कोई काम भी अच्छा न किया, लाज रख ली मेरे लजपाल ने रुसवा ना किया पढ़कर सामाईन की खूब दाद लूटी।
कव्वाल नजीर न्याजी पार्टी ने नातिया कलाम हुजूर मेरा कोई नहीं है..., ख्वाजा तेरा साथ हो, यहां भी वहां भी..., दिल में अगर तड़प न हो आशिक़ी आशिक़ी नहीं, दर्द से हो जो बे-ख़बर आदमी आदमी नहीं... महफिल में एक नया रंग जमा दिया।
कव्वाल अखलाक सुल्तानी ने तेरे दर के मंगते है तेरा नमक खाते है ख़्वाजा..., तू बड़ा गरीब नवाज है, तेरी जात पर तेरे नाम पर, मेरा घर का घर कुर्बान है... पढ़ कर सामाईन की खूब दाद लूटी।
रंग, सलातो-सलाम, फातिहा व कूल के छींटों के साथ उर्स का समापन - उर्स के आखिर में कव्वाल पार्टियों ने मिलकर हजरत अमीर खुसरों का लिखा हुआ रंग - आज रंग है ऐ मां रंग है री, मेरे इमरत रसूल के घर रंग है... पढ़ा।
कुल की रस्म के तहत कलामे पाक की तिलावत व फातिहा ख्वानी मस्जिद दरगाह इमरत रसूल बाबा के इमाम हाफिज मेहमूदुज्जमा ने पेश की। जायरिनों की सलामती के साथ-साथ मुल्क में अमन, शांति व भाईचारे के लिए दुआएं की।
उसके बाद मौजूद लोगों ने कुल के छींटे लिए और सभी ने एक-दूसरे के गले मिलकर उर्स की मुबारक बाद दी। इसी के साथ हजरत इमरत रसूल बाबा के तीन दिवसीय 136वें उर्स का समापन हुआ।