उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में धर्मसभा आयोजित हुई।
पूज्य डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि आत्मज्ञान के अभाव में मानव जीवन अधूरा है। मनुष्य नश्वर शरीर और भौतिक सुख-सुविधाओं में उलझा रहता है, जबकि जीवन का वास्तविक आधार आत्मा है।उन्होंने कहा कि शरीर जड़ और आत्मा चेतन है।
शरीर का अस्तित्व आत्मा के कारण ही है। जिस प्रकार किसी संख्या में ‘एक’ के बिना शून्यों का कोई मूल्य नहीं रहता, उसी प्रकार आत्मा के बिना शरीर के सभी अंग निष्प्राण हैं।
उन्होंने आचार्य मानतुंग का उदाहरण देते हुए कहा कि आत्म-ऊर्जा जागृत होने पर व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनता है।
आत्मबल अनंत है और इसे जागृत कर महापुरुषों ने समाज को शांति एवं कल्याण का मार्ग दिखाया।प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने आत्मा की विभिन्न अवस्थाओं की व्याख्या करते हुए कहा कि कर्म और गति के अनुसार आत्मा नरक, तिर्यंच, मनुष्य एवं देव गति को प्राप्त करती है।धर्मसभा में अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन ने रूपनगर पंजाब, दिल्ली, भीलवाड़ा और सूरत से आए समाजसेवियों का स्वागत किया गया।
महिला संघ ने तेल तब की तपस्विनी बहनों का अभिनंदन किया। महामंत्री हिम्मत बडाला ने आभार जताया।