उदयपुर, पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी, उदयपुर के तिरुपति कॉलेज ऑफ नर्सिंग में रैगिंग के विरुद्ध जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम संयोजक नर्सिग काॅलेज प्रिंसिपल (यू.जी) डॉ.संजय नागदा ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को रैगिंग की रोकथाम, यूजीसी एवं आईएनसी के दिशा-निर्देशों,रैगिंग से जुड़े कानूनी प्रावधानों,मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव तथा रैगिंग की रोकथाम में नर्सिंग संस्थान एवं नर्सिंग विद्यार्थियों की भूमिका के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत,उद्घाटन संबोधन एवं माॅ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में नर्सिंग काॅलेज के डीन प्रो.डॉ.के.सी.यादव ने यूजीसी एवं आईएनसी के दिशा-निर्देश विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया।

उन्होंने रैगिंग की रोकथाम के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को संस्थागत अनुशासन एवं जिम्मेदार व्यवहार के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि नर्सिंग शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता, जिम्मेदारी, सम्मान और व्यावसायिक मूल्यों का विकास करना भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से सुरक्षित एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस दौरान पीएमसीएच के पीएसएम विभाग के प्रोफेसर कर्नल डॉ. आशीष कुमार गोयल ने “रैगिंग के यूजीसी विनियम एवं कानूनी परिणाम” विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि रैगिंग किसी भी रूप में स्वीकार्य व्यवहार नहीं है और इसे केवल मनोरंजन, परिचय या परंपरा के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने रैगिंग से संबंधित नियमों एवं कानूनी परिणामों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को सावधान किया कि किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार विद्यार्थी के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को नियमों का पालन करने तथा किसी भी अनुचित गतिविधि से दूर रहने की सलाह दी।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ.विकास गौड़ ने “स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के प्रशिक्षणार्थियों में रैगिंग के मनोवैज्ञानिक प्रभाव” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया।

उन्होंने रैगिंग के कारण उत्पन्न होने वाले मानसिक एवं भावनात्मक प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किसी विद्यार्थी का अपमान करना, उसे डराना, धमकाना अथवा मानसिक दबाव में रखना उसके आत्मविश्वास एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

उन्होंने तनाव, भय, चिंता, आत्मविश्वास में कमी, सामाजिक दूरी, अकेलापन तथा पढ़ाई में रुचि कम होने जैसी समस्याओं के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक किया।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ एवं संवेदनशील होना विशेष रूप से आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने साथियों के प्रति सहानुभूति रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।

सेमिनार के इस अवसर पर डॉ.संजय नागदा, “संस्थागत व्यवस्था एवं नर्सिंग प्रोफेशनल्स की भूमिका” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने रैगिंग की रोकथाम में संस्थान की जिम्मेदारी तथा नर्सिंग विद्यार्थियों की भूमिका को विस्तार से समझाया।

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान में रैगिंग की रोकथाम के लिए प्रभावी संस्थागत व्यवस्था, जागरूकता, निगरानी और विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी भी प्रकार की रैगिंग अथवा अनुचित व्यवहार की जानकारी मिलने पर उसे छिपाने के बजाय उचित संस्थागत माध्यम से सामने लाना चाहिए।

डॉ.नागदा ने नर्सिंग विद्यार्थियों को उनके भविष्य के व्यावसायिक दायित्वों से जोड़ते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के नर्सिंग प्रोफेशनल्स होंगे।

इसलिए विद्यार्थी जीवन से ही अनुशासन, सम्मान, जिम्मेदारी, सहानुभूति और नेतृत्व क्षमता विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से वरिष्ठ विद्यार्थियों को संदेश दिया कि वरिष्ठता का अर्थ अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

वरिष्ठ विद्यार्थियों को कनिष्ठ विद्यार्थियों का मार्गदर्शन, सहयोग और संरक्षण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि “सीनियर विद्यार्थियों को मार्गदर्शक बनना चाहिए, डराने वाला नहीं।”

सेमिनार को सफल बनाने में गजेंद्र सरगरा,भूमि निमावत,खुशबू वैष्णव,एवं इशिका वैष्णव का योगदान रहा।