उदयपुरमनुष्य जीवन में उन्नति के लिए सबसे आवश्यक प्रश्न करना है, अपने प्रश्नों के प्रति दृढ़ता रखना है, यदि प्रश्न होंगे तभी उनका समाधान होगा ।
ये विचार अंतर्राष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता योगेश भारद्वाज, कुलपति, पाणिनी आर्ष विद्याकुलम,बढ़ेडी ,मुजफ्फरनगर ने आर्य समाज हिरण मगरी के छः दिवसीय वेद प्रचार समझ के दूसरे दिन सोमवार को व्यक्त किए।
उन्होंने कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा के कठोपनिषद के मंगलाचरण मंत्र की व्याख्या के क्रम में मृत्यु और नचिकेता की कथा सुनाते हुए कहा कि हम सभी जीवात्मा नचिकेता है और परमपिता परमेश्वर अक्षत अर्थात मृत्यु है।
नचिकेता ने आचार्य मृत्यु से प्रश्न कर ही अपनी आध्यात्मिक जिज्ञासा का समाधान पाया। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रीमद दयानंद सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने कहा कि राष्ट्र प्रथम के भाव आर्य समाज के संस्थापक महर्षि देव दयानंद सरस्वती ने सर्वप्रथम रखे।
महर्षि ने जिस वैचारिक क्रांति का शंखनाद किया वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। कार्यक्रम का आरंभ भिनोपदेशक पंडित केशव देव शर्मा के मधुर भजनों से हुआ।
विशिष्ट अतिथि मुनि नरेंद्र आर्य ने शिक्षा से संस्कार, संस्कार से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व कल्याण हेतु स्वदेशी शिक्षा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का आरंभ विश्व कल्याण हेतु इंद्र प्रकाश वैदिक के पुरोहित्य में यज्ञ से हुआ।
स्वागत आर्य समाज हिरण मगरी के प्रधान संजय शांडिल्य और आभार मंत्री वेद मित्र आर्य ने ज्ञापित किया संचालन उपमंत्री भूपेंद्र शर्मा ने किया।
सेक्टर 4 स्थित आर्य समाज हिरण मगरी परिसर में चल रहे छह दिवसीय वेद प्रचार समारोह प्रातः 7:30 से प्रातः 10:00 बजे तक और सायं 5:30 से 7:30 बजे तक प्रतिदिन 27 अगस्त तक चलेगा।
28 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म पर्व के साथ प्रातः 7:30 से 11:00 बजे तक समापन सत्र होगा। धर्म प्रेमी जन इस आयोजन में भाग लेने हेतु आमंत्रित हैं।