कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ओफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में प्रवेश लेने वाले नव आगंतुक छात्र-छात्राओं के इंडक्शन प्रोग्राम में जल मित्र डॉ पी सी जैन ने जल की आज की स्थिति को देखते हुए कहा कि इस सीमित जल के होते हुए जल के प्रति सोच को बदलना होगा अन्यथा जिस गति से भूमि जल गिर रहा

वह प्रकृति द्वारा हजारों वर्षों में संचित पूंजी है। यदि हम इसे कुछ दशकों में समाप्त कर देंगे, तो भविष्य की पीढ़ियों(आप) के लिए गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। धरती के भीतर का यह मौन सूखा हमें चेतावनी दे रहा है कि विकास और संसाधन उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करना अनिवार्य है।

भूमि धंसने की घटनाएँ केवल तकनीकी समस्या नहीं हैं; वे प्रकृति का संदेश हैं कि उसके नियमों की उपेक्षा का मूल्य अंततः समाज को ही चुकाना पड़ता है और विशेष कर आप युवाओं को गंभीर जल संकट का सामना करना होगा ।  अदृश्य जल को साड़ियां और टी-शर्ट में प्रत्यक्ष दिखाते हुए उन्हें सीमित करने की सलाह दी। जल स्रोतों को प्लास्टिक और पूजा सामग्री को डालने पर जल जीवों किस तरह हानि होती है यह बताया। 

अंत में जल गीत सभी ने मिलकर गाया। 

अपने दूसरे भाग  के कार्यक्रम में एक सिगरेट से कितना काला काला जहर निकलता है जो - उन्होंने बताया। सभी से शपथ दिलाई कि वह कभी अपने माता-पिता को नशे के कारण दुखी नहीं करेंगे और किसी भी प्रकार का नशा ना करेंगे ना करने देंगे। 

कार्यक्रम अधिकारी हरवेंदृ मीणा ने स्वागत और धन्यवाद स्थापित किया।डॉ मंजीत सिंह ऐन सी सी अधिकारी भी उपस्थित थे | सहयोग मनीष एवं उनके साथियों ने किया। डीन डॉ विनोद यादव ने डॉ जैन को सहयोग हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया |