उदयपुर | जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय), उदयपुर के संघटक संस्थान राजस्थान विद्यापीठ प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का चयन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की प्रतिष्ठित 'वाणी' योजना के तहत भारतार्थं कृत्रिम-मेधा (भारत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन के लिए किया गया है। यह कार्यशाला आगामी सितम्बर माह में आयोजित की जाएगी।
इस कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधुनिक व जटिल तकनीकी विषयों को संस्कृत भाषा के माध्यम से सरल, सुबोध और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने बताया कि वर्तमान में एआई और जनरेटिव एआई शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और समाज में तीव्र गति से बदलाव ला रहे हैं। हालांकि, अंग्रेजी भाषा की बाध्यता के कारण कई जिज्ञासु और शोधार्थी इस उन्नत तकनीक का पूर्ण लाभ उठाने से चूक जाते हैं। इस अंतर को पाटने और तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ही इस विशेष कार्यशाला का खाका तैयार किया गया है।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी ने जानकारी दी कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स, चैटजीपीटी, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और नैतिक एआई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सह-समन्वयक डॉ. यज्ञ आमेटा ने बताया कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों में न केवल तकनीकी कौशल का विकास करेगी, बल्कि संस्कृत के माध्यम से उच्च शिक्षा को जोड़ने के विज़न को भी धरातल पर उतारेगी।
इस कार्यशाला में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के संकाय सदस्य, शोधार्थी, स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थी और उद्योग विशेषज्ञ प्रतिभागी के रूप में शामिल हो सकते हैं। एआईसीटीई के दिशा-निर्देशानुसार राष्ट्रहित में आयोजित यह पूरा कार्यक्रम सभी चयनित प्रतिभागियों के लिए पूर्णतः निःशुल्क रहेगा।
इस अवसर पर निजी सचिव केके कुमावत, डॉ. ललित सालवी, डॉ. विकास डांगी उपस्थित थे।